bhoot ki kahaniyan

भूतों की कहानी

यह कहानी एक छोटे से गांव की है, जिसका नाम रामपुर था। गांव के आदिवासी लोग वहाँ के प्राचीन मंदिर के पास रहते थे। मंदिर का दरवाजा हमेशा बंद रहता था, क्योंकि वहाँ पर कुछ अजीब घटनाएँ होती थीं।

Bhoot Ki Kahaniyan / 5 भूत की कहानियां
Bhoot Ki Kahaniyan / 5 भूत की कहानियां

गांव के लोग भूतों के अस्तित्व का विश्वास करते थे, और मंदिर को भूतों का घर मानते थे। कहते थे कि रात्रि के समय वहाँ पर भूत गूंथा करते हैं और वहीं पर उनकी आत्माएँ बसती हैं।

एक दिन, गांव के एक युवक नामक आर्यन ने मंदिर के पास अपने दोस्त के साथ किलकारियाँ मारने की सोची। वह और उसके दोस्त रात को मंदिर के पास पहुंचे और किलकारियाँ मारने लगे।

धीरे-धीरे रात बढ़ी, और वे अपनी मस्ती में खो गए। तभी कुछ अजीब आवाजें आने लगीं।

“तपक, तपक… तपक, तपक…”

आर्यन और उसके दोस्त डर के मारे चौंक गए। उन्होंने चिपकी आवाजों की ओर देखा, और वहाँ कुछ अद्भुत चीजें देखीं।

वे थे तीन छोटे बच्चे, जो बहुत ही अद्भुत दिख रहे थे। वे बच्चे कुछ खेल रहे थे, और उनके चेहरे पर एक मित्रता और खुशी की मुस्कान थी।

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आर्यन और उसके दोस्त ने समझा कि ये भूत नहीं थे, बल्कि कुछ खोये हुए बच्चे थे जो यहाँ आए हुए थे। वे बच्चे जानवरों के साथ खेल रहे थे और इसे देखकर वे दर से थम गए।

आर्यन और उसके दोस्त ने उन बच्चों को अपनी सिर में उठाया और उनके परिवार की खोज की। वे जाने-अनजाने में एक खोये हुए बच्चों की जिंदगी को बचाने में सफल रहे।

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें हमेशा जो कुछ भी हो रहा है, उसे खेलने का हक नहीं होता। अक्सर हम अपनी मस्ती में इतने खो जाते हैं कि हम दूसरों को अपने कार्यों की सजा चुकानी पड़ती है। हमें यह याद दिलाना चाहिए कि हमें हमेशा अपनी क्रियाओं का उचित मूल्य देना चाहिए, ताकि हमें और दूसरों को कोई हानि न हो।

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भूतिया मानसिक अस्पताल

यह कहानी एक छोटे से गांव के पास स्थित भूतिया मानसिक अस्पताल की है, जिसे लोग डर के मारे त्याग दिया था। इस अस्पताल का नाम ‘संताना मानसिक चिकित्सालय’ था। यह जगह काफी लोगों के लिए डर का कारण बन चुकी थी।

Bhoot Ki Kahaniyan / 5 भूत की कहानियां
Bhoot Ki Kahaniyan / 5 भूत की कहानियां

गांव के पुराने लोग कहते थे कि इस अस्पताल में कुछ अजीब घटनाएँ होती थीं। रात के समय, वहाँ से अजीब आवाजें और रोने-धोने की चीखें आती थीं। यह अफसोस की बात है कि गांव के लोग इसे बस एक रूखी कहानी मानते थे और किसी के करीब नहीं जाते थे।

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एक दिन, गांव के युवक नामक आर्यन ने अपने दोस्त के साथ निर्णय लिया कि वे इस अस्पताल का पता लगाएंगे कि क्या सचमुच में कुछ अजीब हो रहा है। वे अस्पताल के पास जा पहुंचे और वहाँ की भयंकर गूंथाओं और खिड़कियों के साथ खेलने लगे।

धीरे-धीरे रात आई, और उन्होंने अस्पताल की ओर बढ़ते हुए वहाँ से आवाज आने की कोशिश की।

थपक, थपक… थपक, थपक…”

आर्यन और उसके दोस्त डर के मारे चौंक गए। वे चिपकी आवाजों की ओर बढ़ते हुए देखने के लिए तैयार थे।

Bacchon ki Bhoot ki kahaniyan

जब वे अस्पताल के बगीचे में पहुंचे, तो वे एक पुराने पेड़ के पास पहुंचे, और वहाँ कुछ अजीब चीजें देखीं।

पेड़ के नीचे एक लड़का खड़ा था, जिसके हाथ-पैर बंद थे और वह गोली मार रहा था। उसका चेहरा पानी में डूबा हुआ था, और वह आवाजें निकाल रहा था, “बचाओ… कृपया मुझे बचाओ…”

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आर्यन और उसके दोस्त ने तुरंत प्रयास किया और उस लड़के को पानी से बाहर निकाला। वह लड़का डर के मारे थे और उन्होंने पूरी बात सुनाई।

यह जगह वास्तविक मानसिक अस्पताल नहीं थी, बल्कि यह जगह एक बच्चे की प्रातिक्रिया थी, जो यहाँ छोड़ा गया था क्योंकि उसके माता-पिता ने उसे नहीं चाहा था। वह लड़का बेहद डर के मारे थे और उन्होंने अस्पताल के खिड़कियों के पास अपनी क़िस्मत का इंतजार किया था।

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आर्यन और उसके दोस्त ने उस लड़के को अस्पताल के डॉक्टर के पास ले जाया और उसकी बचाव की कोशिश की। वे दरियादिल लोग थे और उन्होंने उस लड़के को उसके अधिकारी परिवार के पास लौटाया।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें दूसरों की मदद करने का कभी ना कभी मौका मिलता है, और हमें अपने डर को पार करके उन्हें सहायता पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। डर से भागने की बजाय हमें अपनी हिम्मत और साहस का सामर्थ्य दिखाना चाहिए, क्योंकि इससे हम अच्छे कर्मों का भी हिस्सा बनते हैं।

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