इस Moral Stories In Hindi में लिखी गई सभी कहानियां बहुत ही शिक्षाप्रद आई है जिसे आप तथा आपके बच्चे पढ़ कर के बहुत कुछ शिक्षा मिलेगी।         

यह Moral Stories In Hindi कहानियां मुख्यता हमारे दादा जी या फिर हमारे माता-पिता के द्वारा सुनाई जाती है जिसे बच्चे पढ़कर मनोरंजन के साथ-साथ अच्छी शिक्षा की प्राप्ति करते हैं।

चूहा ने किया शेर की मदद {Moral Stories In Hindi}


एक बार की बात है। शेर एक पेड़ के नीचे सो रहा था। तभी अचानक एक चूहा पेड़ के बिल से बाहर आया,, और उस शेर के शरीर पर गिर गया। उसके बाद शेर ने उस चूहे को कसकर पकड़ लिया।

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लेकिन वह शेर कुछ सोच समझ करके उसे चूहा को अपने कैद से मुक्त कर दिया। वह चूहा इस दयालु शेर को इसके लिए धन्यवाद दिया और कहा कि मैं भी आपको कभी मुसीबत के समय जरूर सहायता करूंगा।

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लेकिन कुछ दिनों के बाद एक दिन वह शेर शिकारी के जाल में फस गया। वह शेर परेशान होकर के दहाड़ने लगा। उस की दहाड़ सुनकर चूहा समझ गया कि यह मुसीबत में है इसलिए वह उसे शहर के पास गया।

चूहा ने देखा कि शेर जाल की नीचे फंसा हुआ है । उसने धीरे-धीरे पूरी जाल को काट दिया और शेर बाहर आ गया। इसके लिए शेर उस चूहा को धन्यवाद दिया ” चूहा ने कहा ” कि आपने मेरी मदद किया इसलिए मैं आपका भी मदद कर दिया।

                     कौवा की बुद्धिमानी {Moral Stories In Hindi}


गर्मी का मौसम चल रहा था। और एक कौवा बहुत ही ज्यादा प्यासा था। वह पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। वह कौवा उड़ रहा था। तभी उसे अचानक एक घड़ा दिखाई दिया। वह का उसे खड़े के पास गया और झांक कर देखा तो उसमें थोड़ा सा पानी दिखाई पड़ा।

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प्यासा कोआ

वह कौवा उस घड़े से पानी पीने का कोशिश किया। लेकिन उसका चौक घड़े में पानी कम होने की वजह से नहीं पहुंच पाया ।और वह पानी नहीं पी पाया। वह कौआ एक बात समझ में आई। उसने पास में पड़े कंकर को अपने सोच में दबाकर उसे घड़े में डालना शुरू कर दिया।

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कौवा जैसे जैसे ही कंकड़ को पानी में डालता पानी ऊपर आता जाता इस तरह से जब पानी ऊपर आ गया तब कौआ ने आसानी से पानी पी लिया। और अपनी प्यास बुझाई फिर उड़ गया।

                  ढेला और हरा पत्ता {Moral Stories In Hindi }


एक बार की बात है एक बार पीपल का पत्ता नीचे गिर गया। वह उड़ते उड़ते एक खेत में जा पहुंचा। तभी उसकी मुलाकात खेत में उपस्थित एक मिट्टी की ढीला से हुआ। और यह दोनों एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए।

Top 10 Moral Stories In Hindi – बच्चों के लिए छोटी कहानी इन हिंदी
ढेला और पत्ता की कहानी

एक दिन मौसम बिगड़ गया आंधी और पानी का मौसम होने वाला था। वे दोनों घबरा गए की पानी आएगा तो ढीला गल जाएगा और हवा आएगी तो पत्ता उड़ जाएगा और उन दोनों की दोस्ती खत्म हो जाएगी।

अचानक तेजी से हवा बहने लगा। तब ढेला ने तुरंत पत्ता के ऊपर बैठ गया जिसकी वजह से पत्ता उड़ने से बच गया। हवा थम चुका था अब धीरे-धीरे बारिश चालू हो गया। अब बताने ढेला की जान बचाने के लिए उसके ऊपर खड़ा हो गया जिसकी वजह से वह ढेला पानी में गिरने से बच गया।

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इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर दो दोस्त एक दूसरे की मदद करें तो कोई भी मुसीबत हो उसे आसानी से पार पा सकते हैं।

                        राजा का चित्र {Moral Stories In Hindi}


बहुत समय पहले की बात है।एक राज्य में एक राजा राज्य करता था दुर्भाग्य बस उसकी केवल एक आंखें और एक पर ही था। इन सभी कमजोरियों के बावजूद भी वह एक बहुत ही दयालु बुद्धिमान और अपने राज्य के सबसे कुशल शासक था। इस राजा के शासनकाल में उनकी प्रजा बहुत ही खुशहाल जीवन जी रही थी।

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सबसे अच्छा राजा का चित्र

एक दिन की बात है। वह राजा अपने महल की गलियारों में टहल रहे थे। तभी राजा की दृष्टि वहां दीवाल पर बने हुए चित्रों पर लगी। उन सभी चित्र को देखकर के राजा के मन में विचार आया कि भविष्य में जब उनके उत्तराधिकारी महल के इन गलियारों में टहलने आएंगे तो यह चित्र देखकर के उन्हें अपनी पिछली पीढ़ियों का याद आएगी।

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लेकिन दुर्भाग्य की बात है उस दीवार पर अभी तक राजा का कोई चित्र नहीं था। और राजा को यह भी नहीं पता था। कि उनकी शारीरिक रूप से छीन होने के कारण के कारण उनका चित्र कैसा दिखेगा। यह देखते हुए वह राजा ने निश्चय किया कि आप इस दीवार पर मेरा भी चित्र बनेगा।

अगले दिन राजा ने अपने राज्य के सबसे श्रेष्ठ चित्रकारों को राज दरबार में उपस्थित करने के लिए आमंत्रित किया। राजा ने उन सभी चित्रकारों को कहा कि महल की दीवारों पर चित्र लगाने के लिए मेरी अच्छी से अच्छी चित्र बनाना होगा।

फिर राजा ने कहा जो भी चित्रकार बनाना चाहते हैं । वह आगे हैं ।और जो चित्रकार जिस प्रकार से अच्छी चित्र बनाएगा उसके अनुसार ही उसे इनाम दिया जाएगा जो अच्छी चित्र बनाएगा उसे सबसे अच्छी इनाम दिया जाएगा।

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उस दरबार में उपस्थित सभी चित्रकला के श्रेष्ठ माने जाने वाले थे। लेकिन राजा का यह आदेश सुनते हुए सभी सोचने लगे कि हमारे महाराज तो काना और लंगड़ा है। इस तरह से उनका सबसे सुंदर चित्र कैसे बन सकता है।

यह भी हो सकता हैं।अगर चित्र खराब हुआ तो राजा हमें क्रोधित होकर फांसी की सजा ना सुना दे। सबके मन में यह विचार उठ रहे थे । इसमें से कोई भी आगे नहीं आया चित्र बनाने के लिए। सभी चित्रकार वहां से कोई ना कोई बहाना बनाकर के जाने लगे।

अब वहां मात्र केवल एक बहुत ही युवा चित्रकार बचा था। अब राजा ने उससे पूछा ” क्या तुम मेरे चित्र बनाने के लिए तैयार हो ” ?

वह युवा चित्रकार ने चित्र बनाने के लिए राजी हो गया । फिर राजा ने उसे चित्र बनाने का अनुमति प्रदान किया। वह युवा चित्रकार अगले ही दिन से राजा का चित्र बनाने के लिए कार्य प्रारंभ कर दिया।

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कुछ दिन बाद चित्र बना करके तैयार हो गया। लेकिन अब उसे चित्र को देखने का समय आ चुका था। तो दरबार में वे दरबारी के साथ – साथ सभी चित्रकार भी उपस्थित हुए थे। जिन्होंने राजा का चित्र बनाने से इनकार कर दिया था। सभी लोग बड़े हैं उच्च शिक्षा के साथ उस चित्र को देखने के लिए बहुत ही उत्साहित होकर परेशान थे।

जब वह उस चित्र को सबके सामने प्रस्तुत किया। तो राजा समेत दरबार में उपस्थित सभी लोग उसे देखकर आश्चर्य चकित रह गए। वह चित्र बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति किया था।

उस चित्र में राजा दोनों तरफ पैर करके घोड़े पर बैठे हुए थे। जिसे एक ही तरफ के पैर दिखाया गया। दूसरा पैर घोड़े के होने से छुप गया था। साथ ही राजा उस घोड़े पर बैठकर अपने हाथ में धनुष बाण लेकर एक आंख बंद करके निशाना साधते हुए दिखाया गया था। जिसकी वजह से उसके काने होने की कमजोरी छुप गया था।

इस चित्र को देखकर राजा बहुत ही प्रसन्न हुआ। वह चित्रकार ने अपने बुद्धिमता का उपयोग करते हुए,, राजा की चित्र में कमजोरियों को छुपा दिया था। इसलिए वह एक बहुत ही सुन्दर चित्र प्रस्तुत किया। फिर राजा ने उस चित्रकार को पुरस्कृत किया और अपने दरबार के मुख्य चित्रकार घोषित किया।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में सफल होना है। तो हमलोग को हमेशा सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। अलग – अलग भी प्रिस्थितियों में भी सकारात्मक दिशा में सोचने से किसी भी समस्या का समाधान आसानी से हो जाता हैं।

                खुली हुई मुठ्ठी और बंद मुट्ठी {Moral Stories In Hindi }


श्याम सुंदर नाम का एक मारवाडी था। जिसके दो बेटे थे। लेकीन दोनों बेटों का स्वभाव एक – दुसरे के विपरीत था। एक बेटा बहुत ही फिजूलखर्ची करता था। दूसरा बेटा बहुत ही कंजूस था। उसके पिता इन दोनों के स्वभाव से बहुत ही ज्यादा परेशान थे। उसने कई बार उसे समझाया ? लेकीन वे लोग अपनी स्वभाव नहीं बदल रहे थे।

कुछ दिन बाद पता चला हमारे गांव में एक बहुत ही सिद्ध महात्मा पधारे हुए हैं। वह उनके पास इसलिए चला गया ताकि महात्मा मेरे दोनों बेटों को समझा सके।

उसने उस महात्मा को यह सब कुछ बता दिया। इस बात को सुनकर महात्मा ने कहा ” तुम अपने दोनों पुत्रों को मेरे पास लाना , मैं उन दोनों से बात करूंगा।

अगले दिन वह दोनों पुत्रों को लेकर उस सिद्ध महात्मा के पास गया। महात्मा ने दोनों पुत्रों को अपने पास बैठाया ” और अपनें दोनों हाथों की मुठिया बंद कर उन्हें दिखाते हुए कहा ” यदि मेरा हाथ ऐसा हो जाए , तो कैसा लगेगा।

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तभी दोनों बेटों ने बताया ” लगेगा आपकों हाथ की कोई गंभीर बीमारी है।

इसके बाद महात्मा ने अपने हाथ की मुठ्ठी खोल दिया। फिर अपने दोनों हाथों को फैलाकर दिखाते हुए प्रश्न किया ” अपने हाथ को थोड़ा दुसरी ओर घुमाते हुए कहा ” अब इस तरह हमारा हाथ हों जाय तो कैसे लगेगा।

फिर से दोनों बच्चों ने कहा ” महाशय फिर वही लगेगा कि आपकों कोढ़ हुआ है। उन दोनों के उत्तर सुनकर महात्मा अब महात्मा थोड़ा गंभीरता से समझाने का प्रयास किया। और फिर उन्होने इन्हें समझाने लगे, अपने मुठ्ठी सदा बंद रखना या खुला रखना, इस प्रकार का कोढ़ ही है।

यदि मुठ्ठी सदा बंद रखोगे, तो धनवान होते हुए भी निर्धन ही रहोगे। अगर तुम अपने मुठ्ठी सदा खुली रखोगे। तो फिर चाहें तुम कितना भी धनवान क्यू नही हो, तुम्हें जल्दी निर्धन होने में देरी नहीं लगेगा। इसलिए तुम कभी अपने मुठ्ठी बंद तो कभी खुला रखना चाहिए। इस प्रकार तुम्हारे जीवन का संतुलन अच्छे से बना रहेगा।

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उस मारवाड़ी के दोनों पुत्रों को सच में महात्मा की बात समझ में आ गया। और उन दोनों ने निश्चय किया कि, हम अपने जीवन में दोनों ही संतुलन बनाकर ही पैसों को खर्च करेगें।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में हमें धन की बहुत ही महत्व हैं। उसका खर्च कुछ सोच – समझकर ही करना चाहिए। इन्सान को ज्यादा फिजूल खर्ची भी नहीं करना चाहिए, और नहीं अधिक कंजूस बन कर रहना ठिक होता है। अर्थात एक के पास धन होते हुए भी दरिद्रता होगी, दुसरे के पास धन चले जाने के बाद भी दरिद्रता रहेगी। इसलिए हमें जीवन में हमेशा धन का संतुलन बना कर रखना चाहिए।

                       मक्खी और शहद Moral Stories In Hindi }


एक समय की बात है। रामपुर गांव में एक घर में एक शहद का जार रखा हुआ था। उस जार में बहुत ही मीठा शहद भरा हुआ था। एक दिन अचानक वह जार गिर कर टूट गया। और उसमें से सभी शहद बाहर धरती पर गिर गया।

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शहद में चिपक गई मधुमक्खी

मक्खियों ने जब इतना सारे शहद को देखा। तो लालच में आकर शहद पैर बैठ गई और शहद चाटने लगी। उन्हें बहुत ही मजा आ रहा था। और वे बहुत ही खुश थीं। वह आपस में बोल रही थी कि बड़े ही दिनों बाद हमें ऐसा मीठा शहद खाने को मिल रहा है।

सभी ने शहद पुरा पेट भर खाया, कुछ देर में जब उनका पेट भर गया। तो वो सब अब उड़ने के लिए सोचा ” लेकीन वे सभी मक्खी शहद में लथपथ हो गई थी। अब उनके पैर और पंख उस तरल और चिपचिपे शहद में पूरी तरह चिपक गया था। जिसकी वजह से उन्हें अब उड़ पाना बहुत ही कठीन हों गया था।

वह सभी मधुमक्खियां उड़ने का बहुत प्रयास किया। लेकीन सारे प्रयास व्यर्थ रहा। और वे सभी मधुमक्खी वही पर शहद में चिपक कर मर गई।

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इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी भी प्रकार का लालच नहीं करनी चाहिए। कभी – कभी थोड़े से समय का सूख मुसीबत का कारण खड़ा कर देते हैं। कई बार तो प्राणों पर आ जाती हैं। इसलिए आप कभी भी ऐसे थोड़े समय के सूख के लिए झांसे में नहीं आए। और फिर अपनी जीवन में सोच समझकर ही आगे बढ़ते रहना चाहिए।

                            बुद्धिमान तोता {Moral Stories In Hindi }


बहुत समय पहले की बात है। तमावर नामक घने जंगल में एक बहुत ही प्यारा तोता अपने दो बच्चों के साथ रहता था। उन लोगों का जीवन बहुत ही सुखमय बीत रहा था।

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बुद्धिमान तोता की कहानी

एक दिन की बात है। जब एक शिकारी जंगल से गुजर रहा था। तब उसकी नज़र तोता के दोनों बच्चों की जोड़ी पर पड़ा। वह शिकारी ने सोचा ” राजा को देने के लिए बिल्कुल ही ये तोते बहुत ही सुन्दर उपहार साबित हो सकता हैं। वह उन दोनों तोते को पकड़ कर के राजा के पास ले गया।

जब वह शिकारी उन दोनों तोतों को राजा को उपहार के रूप में दिया। तो राजा उन दोनों तोतों को देख करके बहुत ही खुश हुए ” और उस शिकारी को इसके लिए सौ सोने का सिक्का उपहार के रूप में प्रदान किया।

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राजमहल में लाने के बाद से वे दोनों तोता सबके लिए एक बहुत ही आकर्षण का केंद्र बन गए थे। राजा ने उन्हें सोने के पिंजरे में रखवाया। हर समय सेवक उनके आगे पीछे दौड़ते रहते थे। सभी प्रकार के ताजे – ताजे फल उन्हें खिलाए जाते थे।

राजा उनके साथ बहुत ही ज्यादा खुश नजर आता था और राजकुमार भी सुबह शाम उन दोनों के साथ आकर खेला करता था। ऐसी जीवन प्रकार के वे दोनों तोता बहुत ही खुश थे।

एक दिन छोटा तोता अपने बड़े भाई तोता से बोला ” भाई” हम दोनों कितने ही खुशनसीब हैं। जो इस माहौल में लाए गए और कितने ही सुख में जीवन जी पा रहे हैं। यहां पर हर कोई हम लोगों से कितना प्यार कर रहा है। और हम लोगों का कितना ख्याल रख रहा है।

हा, बिल्कुल, यहां पर हमारी जरूरत की सभी चीज बिना किसी मेहनत के ही मिल जा रहा है। अब हमारा जीवन तो पहले से अब और ही ज्यादा आरामदायक हो गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहां पर सभी लोग हम लोगों से प्यार करते हैं।

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उन तोतों को उसे राजमहल के सूख – सुविधा आराम बहुत ही अच्छी लग रही थी। लेकिन एक दिन सब कुछ बदल गया। वह शिकारी जिसने राजा को उपहार में तोते को दिए थे। वह राज दरबार में फिर से आया और इस बार एक बहुत ही सुंदर काला बंदर का बच्चा लाया था। वह राजा को उपहार में दे दिया।

अब वह काला बंदर उस राजमहल के आकर्षण का केंद्र बन चुका था। आप सारे सेवक उसे बंदर के ख्याल में लग गए और उसकी पूरी सुविधा दी जाने लगी। अब इन तोतों के प्रति सबका ध्यान रखना बंद हो गया था। अब राजकुमार भी तोतों के बदले उसे काले बंदर के बच्चे के साथ खेलना पसंद करने लगे।

यह देख कर के छोटा तोता बहुत ही दु:खी हुआ। बड़े भाई यह काला बंदर तो हमारी सारी सुख – सुविधा को छीन लिया है। इसकी वजह से अब हमारी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

वह बड़ा तोता नहीं जवाब देते हुए कहा ” कि इस दुनिया में कुछ भी स्थाई नहीं होता। वक्त बदलते कभी देर नहीं लगती है।

कुछ दिन बीता ” लेकिन वह बंदर बहुत ही शरारती था।पूरे राजमहल में उत्पाद मचा दिया। वह सेवकों को भी बहुत ज्यादा परेशान किया । राजकुमार भी उसकी इस हरकत देखकर के डर गए थे।

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राजा को जब इस बंदर के करतूतों के बारे में मालूम चला। तो उसने अपने सेवकों को आदेश दिया कि इसे जंगल में छोड़ करके आ जाओ। फिर उसे बंदर को जंगल में छोड़ दिया गया।

उसे दिन के बाद से वह सभी तोता महल के आकर्षण का केंद्र फिर से बन गए। आप छोटा तोता बहुत ही ज्यादा खुश था । उसने बड़े तोता इस बोला कि ” भाई ” अब हमारी दिन फिर से वापस आ गई।

बड़ा तोता बोला” एक बात याद रखो छोटे भाई ” कभी भी समय एक जैसा नहीं रहता है। इसलिए जब समय साथ ना दे, तो हमें दु:खी नहीं होना चाहिए। बुरा समय रहता है । तो उसके पीछे अच्छा समय भी जरूर आता है।

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अब उसे छोटे तोते को यह बात समझ में आ गई थी और उसने कहा ठीक है बड़े भाई अब हम लोग दु:खी के समय भी धैर्य के साथ बनाए रखेंगे।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी चीज अस्थाई नहीं होती समय के अनुसार सभी चीजें बदलती रहती है इसलिए संकट के समय में हमें धैर्य के साथ डटे रहना चाहिए।

                       जल का मीठा होना { Moral Stories In Hindi }


एक समय पहले की बात है गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त कर रहे । सच्चिदानंद को जब उनका घर आने का संदेश उनके पिता के द्वारा मिला। तो वह बिना किसी देर किए अपने गुरुदेव के पास घर जाने की अनुमति मांगने चले गए।

गुरुदेव के द्वारा घर जाने की अनुमति दे दिया गया और अगले दिन सुबह हुआ गुरुकुल से निकल पड़ा। गर्मी का दिन था वह पैदल ही जा रहा था। तभी रास्ते में उसे प्यास लग गई।

वह शिष्य पानी की तलाश करते हुए आगे बढ़ा। कुछ दूर जाने के बाद से रास्ते की किनारे उसे एक कुआं दिखाई पड़ा। उसने अपनी प्यास बुझाने के लिए कुआं से पानी निकाला फिर पानी पिया। उसे कुआं का पानी बहुत ही शीतल और ठंडा था। वह उस पानी को पीकर तृप्त हो गया।

अभी वह आगे बढ़ाएं था कि उसने सोचा यह जल्द तो बहुत ही शीतल और मीठा है। और ऐसा पानी तो हमारे गुरुदेव शायद ही आज तक पीएम होंगे ।तो इसलिए मैं क्यों ना यह पानी गुरुदेव को प्रदान करूं। वह भी इस ठंडा और शीतल जल को पीकर के बहुत ही संतुष्टि महसूस करेंगे।

यह सोचकर के वह उसे कुएं से पानी एक मशक में लेकर के निकाला और अपने गुरु के आश्रम की तरफ निकल पड़ा। गुरुदेव ने वह जल पिया और बोला ” वत्स ” यह जल तो गंगा जल की तरह है। इसे पीने के बाद से मेरी आत्मा तृप्त हो गई।

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गुरुदेव की यह बात सुनकर के शिष्य बहुत ही खुश हुआ। और फिर से गुरुदेव से आजा लिया और घर निकल पड़ा।

उस शिष्य के द्वारा लाए हुए मशक गुरुदेव के पास ही पड़ा था। उसमें जल अभी और भी बचा था। उसी शिष्य के जाने के बाद से गुरुकुल के एक छात्र गुरुजी के पास आया।

वह शिष्य ने भी उस जल को पीने की इच्छा जताई तो गुरुदेव ने उस जल को पीने के लिए दे दिया। उसे छात्र ने मशक के एक अच्छा जल अपने मुंह में भरा और बाहर थूक दिया।

वह शिष्य बोला ” गुरुदेव ” यह जल तो बहुत ही कड़वा है। मैंने उसी शिष्य से इस जल की प्रशंसा सुनी । इसलिए इसे पीने के लिए आ गया। लेकिन मैं यह बात समझ नहीं पा रहा हूं। कि आपने उसकी झूठी प्रशंसा क्यों किया।

गुरुदेव ने जवाब दिया ” वत्स ” हो सकता है कि इस जल में शीतलता और मिठास नहीं हो , लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं की इसे लाने वाले के मन में अवश्य हो ” उसने जब वह जल पिया होगा,, तो मेरे प्रति आए हुए प्रेम के कारण वह जल मुझे पीने के लिए लाया होगा। ताकि उसके साथ साथ मैं भी उस जल का मिठास महसूस कर सकूं।

मैं भी जब उसे जल को ग्रहण किया । तो मुझे वह अच्छा नहीं लगा। लेकिन मैं उस शिष्य के हृदय में जो प्रेम सेवा की भाती वह पानी लाया था । जिसके कारण में प्रसन्न हो करके उसका प्रशंसा किया।

यह भी बात हो सकता है कि मशक के साफ नहीं होने के कारण उसे जल का स्वाद बिगड़ हो गया होगा। और जिस प्रकार मीठा था वैसा नहीं रहा होगा। जिस तरह कुएं से निकलते समय था।

जो भी हो , लेकिन मेरे लिए वह मायने नहीं रखता है। जो बात है ।वह है ,उसे शिष्य का मेरे प्रति प्रेम, वह अपने घर की यात्रा को निलंबित करके अपने गुरु के प्रेम की वजह से ही उन्हें पानी पिलाने वापस आया था यही मेरे लिए बहुत ही मीठा पानी है।

Moral Stories In Hindi Akbar Birbal ki kahani 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी भी घटना का सकारात्मक सोच रखनी चाहिए अगर हम उसके लिए गंदा सोच रखते हैं तो हमें गंदा ही प्राप्ति होती है। इसलिए हमेशा अच्छी सोच रखें अच्छी जीवन प्राप्ति होगी।

पारस पत्थर  {Moral Stories In Hindi }


उपवन वन में एक साधु महात्मा अपनी आश्रम में रहते थे। उनके पास ज्ञान प्राप्ति के लिए शिष्य दूर-दूर से आया करते थे। और उनके ही आश्रम में रहकर के शिक्षा की प्राप्ति करते थे।

उस आश्रम में रहकर के शिक्षा प्राप्त करने वालों में एक बहुत ही आलसी शिष्य था। उसे शिष्य को अपना समय व्यर्थ में बिताने और आज का काम कल के लिए टालने कोशिश करता था। उसे साधु महात्मा को इस शिष्य के बारे में पूरी जानकारी थी ।वह सोचते थे। यह शिष्य शिक्षा समाप्ति के बाद समय का सही उपयोग करना इसे समझ आ जाए।

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इसी उद्देश्य से उन्होंने शाम के समय में उस आलसी शिष्य को अपने पास बुलाया ” उसे एक पत्थर देते हुए कहा ” वत्स “यह कोई सामान्य पत्थर नहीं है । यह एक पारस पत्थर है। अगर यह पत्थर लोहे की किसी वस्तु को छू ले तो वह सोने का बन जाती है। इसलिए मैं दो दिनों के लिए यह पारस का पत्थर तुम्हें दे रहा हूं। और मैं दो दिनों तक अपने आश्रम में नहीं रहूंगा।

मैं अभी पड़ोस के गांव में एक मित्र के यहां रहने के लिए जा रहा हूं। जब मैं वहां से वापस आऊंगा । तब मैं यह पत्थर तुमसे वापस ले लूंगा। उससे पहले तुम चाहे जितना सोना उतना बना सकते हो।

उसके पास मात्र दो दिन था। लेकिन उसने सोचा कि अभी तो बहुत दिन है। ऐसा करता हूं, कि आज का दिन आराम कर लेता हूं। अगला पूरा दिन सोना बनाता रहूंगा। यह बात सोचते हुए वह एक दिन आराम करने में बिता दिया।

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जब दूसरा दिन आया तो वह सोचा कि आज जाकर बाजार से बहुत सारा लोहा खरीद लाऊंगा। फिर उसे पारस पत्थर से छूकर सोना बना दूंगा। उसे कम को करने के लिए अधिक समय तो लगेगा नहीं,, इसलिए पहले बहुत ही अच्छे अच्छे खाना खा लेता हूं ।फिर सोना बनाने का काम करने लगूंगा।

भरपेट भोजन करने की वजह से उसे आप सस्ती आने लगी उसने सोचा कि अभी तक तो शाम तक बहुत समय है। इसलिए क्यों ना मैं थोड़ा आराम कर लूं। आराम करने के बाद में सोना बनाने का काम शुरू कर दूंगा। थोड़ी देर में ही उसे बहुत ही गहरी नींद लग गया। अब वह गहरी नींद में सो गया था।

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जब उसका नींद खुला, तो सूर्य अस्त हो चुका था। साथ ही दो दिन का समय भी पूरा हो चुका था। साधु महाराज आश्रम वापस लौट आए थे । और उसके सामने खड़े थे।

साधु ने कहा ” पुत्र ” सूर्यास्त के साथ ही तुम्हारे दो ,दिन पूरा हो चुके हैं। अब तुम मुझे वह पारस पत्थर वापस कर दो।

अब छात्र क्या करता है उसके हाथ में कुछ नहीं था। आलस की वजह से उसने अपना अमूल्य समय गंवा दिया था। और साथ ही बहुत सारी धन कमाने का अवसर भी गवा चुका था। अब उसे अपनी गलती का एहसास हो चुका था। और उसे समय का महत्व भी समझ में आ गया था।

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अब वापस आने लगा और उसी क्षण से प्रतिज्ञा किया कि आज से मैं कभी भी आलस और समय की बर्बादी नहीं करूंगा। और फिर अपने गुरुदेव से क्षमा मांगा।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो किसी भी काम को टालने की आदत छोड़ दीजिए। हमारी समय अमूल्य है इसे व्यर्थ में ना गवाएं। क्योंकि एक बार समय हाथ से निकल जाने के बाद से वापस वह नहीं होता है।

                         सही घड़ा का घमंड  {Moral Stories In Hindi )


बहुत समय पहले की बात है। सोनपुर गांव में एक किसान रहता था। उसके पास दो घड़ी थे। वह उन दोनों घरों को लेकर के रोज सुबह अपने घर से बहुत दूर बहती नदी से पानी लाने के लिए जाता था।

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फूटा घड़ा की कहानी

पानी भरने के बाद से वहां उन दोनों घरों को लकड़ी के दोनों सिरों पर बांधकर अपने कंधे पर रखकर के उन्हें अपने घर वापस लाता था उसकी यही दिनचर्या थी।

उन दोनों घरों में से एक घड़ा पूरी तरह से सही – सलामत है। लेकिन एक घड़ा में थोड़ा सा फूटा हुआ था। इसलिए जब भी वह नदी से पानी लेकर के घर पहुंचता था। एक घड़ा पानी से लबालब रहता था। लेकिन दूसरे घड़े में पानी रिसने की वजह से वाह घोड़ा आधा खाली हो चुका रहता था।

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वह सही – सलामत घड़े को अपने आप पर बहुत ही ज्यादा घमंड था। हरवा किसान की पूरी पानी को उसके घर पहुंच आता था। लेकिन दूसरी तरफ हुआ फूटा हुआ घड़ा हमेशा दुखी रहता था। और शर्मिंदा रहता था ।क्योंकि वह किसान की पूरी पानी पहुंचाने में असमर्थ था। उसे अपने आप पर बहुत ही ग्लानि महसूस होती है । कि वह किस को व्यर्थ में मेहनत करवा रहा था।

एक दिन उस फूटे घड़ी से यह बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने किसान से क्षमा मांगा, और कहा ” मलिक”मैं खुद पर बहुत ही शर्मिंदा हूं । क्योंकि मैं आपके अच्छे से कम नहीं आ रहा हूं।

किसान ने कहा ” क्यों ” ऐसा क्या बात हो गया ?

फूटा हुआ घड़ा ने कहा ” कि मालिक ” शायद आप एक बात से अनजान है। कि मैं एक जगह से फूटा हुआ हूं। इसलिए नदी से घर तक पहुंचते पहुंचते मेरा आधा पानी रास्ते में गिर जाता है। मेरी इस कमजोरी के कारण आपकी पूरी मेहनत व्यर्थ चली जाती है।

यह बात सुनकर के वह किसान बोला ” घड़ा ” तुम दु:खी मत होना “तुम नदी से वापस घर आते समय रास्ते में खिले हुए फूलों को देखना तुम्हारा मन बहल जाएगा।

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उस दिन वह फूटा हुआ घड़ा ने वैसा ही किया। वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता हुआ आया। इससे उसका मन उस मे ही लगा रहा।

अब उसका मन पूरी तरह शांत हो गया। लेकीन वह जब घर पहुंचा तो देखा कि वह पुनः आधी हो गया है। तो इसलिए वह फिर से उदास हो गया। फिर उसने किसान से विनती किया कि उसकी जगह कोई दूसरा घड़ा ले लिजिए।

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किसान ने मना कर दिया और कहा कि तुम्हारे आधे पानी की वजह से उन सभी पौधों को पानी मिलता है जिससे आज भी बहुत ही अच्छे फल फूल दिए हुए हर-हर खेल रहे हैं।

 

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