Short Story in Hindi with Moral ~ Top 5 Best Moral Story in Hindi

desi kahani 2~ Top 5 Best desi kahani in Hindi
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आप लोग हमेशा बचपन में अपने दादा मां से अच्छे Short Story in Hindi with Moral ~ Top 5 Best Moral Story in Hindi को पढ़ना चाहते हैं इस Short Story in Hindi with Moral में आप लोगों को बहुत ही बेहरीन कहानी लाया हुं आप लोग इस Short Story को पढ़ कर बहुत कुछ सीखेंगे।

इस Short Story in Hindi with Moral को पढ़ कर आप बाहर समाज में जीने लायक और बच्चो को बुद्धिमान व्यक्ति और साहसी बनाने में मदद कर सकते हैं। और आप इस दुनिया में जीने के लिए तत्पर हो जायेंगे।

गांव की लड़की और चर्चा विदेशों में (Short Story in Hindi with Moral)

बहुत समय पहले की बात है एक लड़की अपने गांव में बड़े ही खुशहाल और खुशनुमा मिजाज में रहती थी। वह लड़की एक छोटे से गांव से आती थी। हम तो जानते ही हैं, यह बात हमें पता तो है ही कि गांव में बसने वाले लोग बहुत ही सहज और अच्छे स्वभाव के होते हैं।

और हमें यह भी पता है कि गांव में रहने वाले लोग सभी लोग एक दूसरे से जुड़े रहते हैं और हमेशा एक दूसरे की मदद करने और दुख और खुशी में साथ रहने में हमेशा विश्वास रखते हैं।

Short Story in Hindi with Moral ~ Top 5 Best Moral Story in Hindi
Short Story in Hindi with Moral~ Top 5 Best Moral Story in Hindi

फिर उसी गांव में एक गरीब परिवार बसने के लिए आया हुआ था। उनका मन धैर्य से भरा हुआ था, लेकिन उनके पास संसाधन बहुत ही कम थे। और वे चाहते थे कि उनकी बेटी भाग्यशाली हो और अच्छी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। और सपने देखते थे उनकी बेटी दुनिया में सबसे ऊंचाई पर शिक्षा के मामले में पहुंच चुकी है।

Short Story in Hindi with Moral 

उस गांव के एक व्यापारी ने इस परिवार की गरीबी को देखा और समस्या को भी देखा, और साथ ही उन्हें मदद करने का भी निर्णय लिया। व्यापारी ने उस गरीब आदमी के लड़की को लेकर अपने साथ दूसरे शहर में चला गया। और फिर उससे एक अच्छे से स्कूल में डालने का फैसला किया था।

अब व्यापारी और गरीब परिवार की बेटी शहर में पहुंच चुकी थी। और वह लड़की अपने आप को एक नई दुनिया के आयाम में महसूस किया। साथ ही वह लड़की बहुत मेहनती और अपनी पढ़ाई में पुरा ध्यान लगा कर करती थी।

वह लड़की अपने पढ़ाई के प्रति इतना मगन रहती थी कि वह खेलने बहुत कम तथा TV भी नहीं के बराबर देखती थी। और उसका लक्ष्य सदैव अपने उच्च शिक्षा प्राप्त में लगी रहती थी।

Short Story in Hindi with Moral

एक दिन उसके शहर में बहुत बड़ी प्रतियोगिता आयोजित हुआ जिसमे सभी विद्यार्थी को मौका मिला अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का और तभी उसके दिल में भी उमंग जगी। की मैं भी इस प्रतियोगिता में भाग लूंगी।

वह अपने तैयारी में पुरी तरह से लग गई। और वह रोजाना पढ़ाई करती थी। और वह दिन रात मेहनत करती रही। साथ ही उसके मेहनत उसे फल देने लगीं।

वह लड़की प्रतियोगिता के दिन वह तैयार रही, और अपने माता – पिता के आशीर्वाद के साथ वह प्रायोजित प्रयोगिता के स्थान पर पहुंच गई।

Short Story in Hindi with Moral

उस लड़की की मेहनत और उसकी बेहतरीन तैयारी के कारण उसने प्रथम स्थान प्राप्त किया। और अब वह सभी के लिए एक अच्छा प्रेणा स्रोत बन गई।

उसकी कठिनाइयों और संकटों से भरी जीवन के यात्रा ने दिखाया की, मेहनत समर्पण और आत्म विश्वास के साथ किया गया कार्य से हर कठिनाइयों को पार किया जा सकता है। उस लड़की ने अपने दम पर यह प्रमाणित किया की मेहनत के दम पर सब कुछ हासिल किया जा सकता है।

Short Story in Hindi with Moral

उस लड़की कि यह जीत पूरे गांव को गर्व महसूस कराई। गांव के सभी लोग उसे बधाई देने उसके घर गए। और उसे अच्छे व्यवहार के साथ समान दिया। उस लड़की के लिए यह अनुभव एकमहत्त्वपूर्ण सीख दीया की कोई भी परिस्थिति हो उसका मतलब हारना नहीं होता है। बल्कि स्थिरता और मेहनत से अपने लक्ष्य को प्राप्त करना होता है।

Short Story in Hindi with Moral

उस लड़की की कहानी उस छोटे गांव में पुरी तरह फैल गई। और जैसे– तैसे उस लड़की का गांव और उसका नाम पूरे विदेशो तक पहुंचने लगे। और उस लड़की की कहानी सभी को प्रेरित करने लगीं।

विशेष रुप से पढ़ाई करने वाले बच्चों को, जो मुसीबतों और प्ररिस्थितियो से निपटते हुए अपने सपनों को प्राप्त करना चाहते हैं।

और फिर गांव के बादशाह के कानों में उस लड़की कि कहानी पड़ी। तब बादशाह ने खुश होकर उस लड़की को स्कॉलरशिप दिया ताकि वह लड़की और अधिक ज्ञान और संपूर्णता प्राप्त करें।

Short Story in Hindi with Moral

उस लड़की कि सफलता की कहानी सभी लोगों के दिलों में बस गया। और गांव के लोग अच्छे शिक्षा के माध्यम से उज्वल भविष्य की कामना करने लगीं। उस लड़की कि सामर्थ्य और संघर्ष की कहानी गांव के अन्य बच्चों को प्रेरित करने लगीं।

उस लड़की कि वजह से उस गांव में अब एक शिक्षा आंदोलन प्रारंभ हुआ। जिस आंदोलन का मकसद मुख्य रूप से गांव के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा प्राप्त करना था।

फिर लोगों ने गरीब बच्चों के शिक्षा के लिए समर्थन किया। और साथ ही उन्हें विद्यालय जाने की सुविधा प्रदान किया। सभी ने मिल कर पूरे गांव में एक शिक्षा का माहौल तैयार किया।

इस आंदोलन के फलस्वरूप गांव में एक उच्चतम स्तर का विद्यालय खोला गया। जहां सभी बच्चे निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकते थे।

तथा इस विद्यालय में विद्यार्थी को निधि की सुविधा भी प्रदान की गई। ताकि वे बिना किसी चिंता के पढ़ाई कर सकें। गरीबी के बावजूद ,वह छोटी सी बच्ची उच्च शिक्षा प्राप्त कर लिया। और अपने परिवार को गर्व महसूस कराया।

Top 5 Moral Story in Hindi 

वह लड़की अपने गांव की गरीबी को निकालकर उज्जवला की ओर ले गई। उसने अपनी शिक्षा को पूरी की, और अध्ययन के दौरान उनकी बेटी ने बहुत सारे गरीब बच्चों के लिए संस्थानिक सहायता कार्य शुरू किया।

वह लड़की संस्था को गठित करके बच्चों की शिक्षा, आहार और विभिन्न प्रकार की सामग्रियों की आवश्यकता को प्रदान करती थी।

उस लड़की के द्वारा बनाए गए संस्था का नाम”” उज्जवल आशा”” रखा गया। यह संस्था गांव के अलावा नगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी बच्चों की सेवा करने लगी। उसने अपनी बेटी को भी उस गांव के संस्था का संचालन संपादित करने का जिम्मेदारी शॉप।

इस दौरान, उन्होंने एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। जहां पर गरीब बच्चों को मुफ्त में बुनाई, चित्रकला, गायन तथा नृत्य की भी शिक्षा दी गई। इस कार्यक्रम ने न केवल उन बच्चों की रूचि और कौशल में सुधार किया। बल्कि उन्हें एक साथी और परिवार की तरह आपसी मित्रता का भाव भी दिया।

उज्जवल आशा संस्था ने गांव में गरीबी के लिए लड़ाई लड़ी। और साथ ही नए सपनों के लिए एक बदलाव भी लाया। वह गांव को आर्थिक रूप से सख्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की। उसने उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए विद्यार्थी निधि योजना लागू किया। जिससे गरीब परिवार के बच्चे आराम से उच्च शिक्षा अध्ययन कर सकें।

Short Story in Hindi with Moral

उज्जवल आशा संस्था ने कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाए ताकि लोगों को रोजगार मिल सके। और उन्होंने एक स्वयंसेवी टीम का गठन किया। और भी साथ साथ मिलकर गांव के विकास के लिए कठिनाइयों का सामना भी किया।

उन्होंने स्वच्छता अभियान चलाया। साथ ही पेड़ पौधों की संरक्षित के लिए भी लोगों को जागरूक किया। तथा सभी समुदाय के लोगों के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए कार्यक्रम आयोजित भी किया।

उनकी मेहनत समर्पण और सेवा भाव के आदर्शों के कारण आप गांव की दृष्टि पूरी तरह से बदलने लगी थी। अब गांव में शिक्षा स्वच्छता और औद्योगिक विकास तथा सामाजिक समरसता की भावना बढ़ रही थी।

Top 5 Short Story in hindi 

उस गांव के नगरीकरण के बाद उस गांव के आसपास के भी गांव प्रेरणा स्रोत के रूप में उभरने लगे।

उज्जवल आशा संस्था को देख कर के सरकार ने भी मान्यता दी, और उसे एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सम्मानित किया। तथा साथ ही उसे सरकारी योजनाओं का भी संचालन करने का अनुमति मिली।

और अब उसे और भी अधिक लोगों की मदद करने का अवसर मिल चुका था। उसने बच्चों के लिए शिक्षा तथा गरीब परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार योजना का प्रारंभ किया।

उज्जवल आशा संस्था ने गरीबी और निराशा से लड़ते हुए वह गांव को सख्त बनाने के लिए नई-नई एस्की मे तैयार किया। और उसने ग्रामीण क्षेत्र में विकास के लिए कौशल विकास योजना तथा किसानों के लिए नवीनतम प्रीत संसाधनों से अवगत कराया। और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया।

Short Story in Hindi with Moral

उसने गांव को सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, और पर्यावरण के प्रति वृक्षारोपण अभियान चलाया। उसके इस प्रयास से गांव से गरीबी प्रदूषण कम हुआ और साथी लोगों ने जागरूक हुआ और अपनी सभी कठिनाइयों को बहुत ही आसानी तरीकों से साथी अपने गांव के विकास के लिए बहुत सारे सफल प्रयास भी किए।

इस Short Story से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी परिस्थितियों को ध्यान ना दे कर हमें अपने शिक्षा पर ध्यान लगाना चाहिए जिससे हमें अपनी और हमारे समाज के साथ-साथ पूरे देश की भी विकास हो सके

इसलिए सभी बच्चों से आग्रह है कि पढ़ाई करें और अच्छी शिक्षा प्राप्त करें जिससे उन्हें अपने घर का विकास करने में मदद मिल सके।

कर भला तो हो भला की कहानी (Short Story in Hindi with Moral)

इस Short Story में कर भला तो हो भला हम जानते हैं कि यह एक मुहावरा भी है और इसी के माध्यम से मैं आप लोगों को एक बेहतर कहानी सुनाने वाला हूं जिसे आप सुन कर के बहुत कुछ सीख सकते हैं तो चलिए शुरू करते हैं।

एक राज्य में एक बहुत ही प्रसिद्ध राजा ता जिसका नाम किशोर दास था। अपने नाम की तरह ही वाह राजा अपने प्रजा के प्रति दास की तरह सेवा करता था। और प्रोजेक्ट के द्वारा भी कृष्णा दास को बहुत ज्यादा सम्मान मिलता था।

Short Story in Hindi with Moral

राजा कृष्णा दास हमेशा सभी को निस्वार्थ भाव से सेवा करते थे, चाहे वह उनके राज्य की प्रजा हो या किसी अन्य राज्य की प्रजा हो। उनका ख्याल सर्वोपरि था। और साथ ही उनके दान करने और उनके स्वभाव की चर्चा उनके अपने शत्रु भी किया करते थे।

उन सभी राज्यों में एक राजा गोपाल चंद्र था जो राजा की इस सभी कार्यों से वह निंदा करता था और साथ ही जलता करता था। और इसी जलन के कारण वाह राजा कृष्णा दास को हराने के लिए एक योजना बनाई, और साथ ही कुछ समय बाद कृष्णा दास के महलों पर हमला कर दिया।

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तथा राजा गोपाल चंद्र ने छल से कृष्णा दास को हराकर जीत लिया और फिर राजा कृष्णा दास को जंगल जाना पड़ा। लेकिन इतना होने के बावजूद भी कृष्णा दास की लोकप्रियता पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

और चारों तरफ माहौल में कृष्णा दास के ही चर्चा होती थी। जिससे गोपाल चंद्र को चयन नहीं था। और उसने राजा कृष्णा दास को मृत्युदंड देने का फैसला किया। और उसने प्रजा में ऐलान किया कि जो भी कृष्णा दास को पकड़कर के लाएगा मेरे सामने उसे 1000 सोने के सिक्के दिया जाएगा।

दूसरी तरफ कृष्णा दास जंगलों में भटक रहे थे तभी उन्हें एक राजगीर मिला और उनसे कहा:–भाई तुम इसी जगह के लगते हो क्या तुम मुझे राजा कृष्णा दास के राजे का रास्ता बता सकते हो।

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राजा कृष्णा दास ने पूछा–: तुम्हें क्या काम है राजा से। तब राजगीर ने कहा मेरे बेटे की तबीयत ठीक नहीं है। और मेरी सारी पूंजी उसके इलाज में चली गई।

और सुना है कि राजा कृष्णा दास सभी की मदद करते हैं तो मैं जाकर उनसे कुछ मदद के लिए याचना कर सकूं। यह सुनकर राजा कृष्णा दास उस राजगीर को लेकर राजा भीम सिंह के पास पहुंचा। और उन्हें देख राज्य में सभी अचंभित थे।

तब राजा कृष्णा दास ने गोपाल चंद्र को बोला: हे राजन आपने मुझे ढूंढने के लिए 1000 सोने के सिक्के देने का प्रस्ताव किया था। और इस मित्र ने हमें आपके सामने प्रस्तुत किया है इसलिए आप इन्हें 1000 सोने के सिक्के प्रदान करें।

यह सुनकर राजा रामचंद्र को एहसास हुआ कि या कृष्णा दास कितना महान और दानी है। और फिर उसने अपनी गलती स्वीकार किया। और साथ ही राजाराम कृष्णा दास को उनके महल को लौटा दिया। और सदा उनके दिखाए गए रास्तों पर चलने का फैसला किया। तो दोस्तों इसी को हम कहते हैं कर, भला तो हो भला ।

कहां एक तरफ गोपाल चंद्र ने राजा कृष्णा दास को मारना चाहता था और अंत में कृष्णा दास के करनी देखी तो वाह बहुत लज्जित हुआ और उनके पूरे राज्य को हमेशा के लिए लौटा दिया। और फिर स्वयं को भी उनके जैसा बनने में जुट गया।

महान पुरुष द्वारा सही कहा गया है कर भला तो हो भला। कृष्णा दास के करणी का ही फल ताकि और युद्ध हारने के बाद भी जिस तरह से राजगीर की मदद की यही कारण है कि उन्हें मदद मिली।

कर भला तो हो भला यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्स में लिखें और ऐसे ही मुहावरे वाले कहानी अपने बच्चों को सुनाएं जिससे उन्हें याद रहे। और साथ ही वे अच्छे मार्ग पर चलने में सफल रहे।

शिक्षा:–इस Short Story से हमें यहीं शिक्षा मिलती है कि अगर आप अपने लोगों की सेवा करेंगे तो आपको भी वहीं सेवा मिलेंगी।

बीरबल की खिचड़ी (Short Story in Hindi with Moral)

एक दिन की बात है राजा अकबर ने अपनें राज्य में ऐलान किया कि, नगर के पास के जलाशय जिसमें बर्फ जम जाता हैं और अगर कोई व्यक्ति उसमें रात भर रहेगा। तो उसे मनचाहा तोभा दिया जाएगा।

राजा के राज्य एक गरीब आदमी ने यह करने को तैयार हो गया। और साथ ही राजा अकबर ने उसकी देखभाल करने के लिए दो सिपाही को लगा दिया।

वह गरीब आदमी उस जलाशय में गया। और उसने लगभग एक किलोमीटर राज्य की दीवारों पर एक दीपक जल रही थी। और वह उसी तरफ मुंह करके खड़ा होने का फैसला किया। और उस गरीब आदमी की यह बात सिपाही को कुछ अजीब लगा।

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और वह गरीब आदमी उस कड़कड़ाती ठंड में जलाशय में खड़ा रहा। और सुबह राज्यसभा में आकर राजा से अपनी उपहार के लिए आग्रह किया।

तब अकबर ने अपनें सिपाही से पुष्टि करने के लिए पुछा कि क्या इस आदमी ने सच में उस जलाशय में एक रात बिताया। सिपाही ने कहा ~हां ? पर यह आदमी दूर लगभग 1 किलोमीटर दूर जल रहे उस दीपक से ताप ले रहा था।

यह सुन कर अकबर राजा को बहुत ज्यादा गुस्सा आया और किसी की भी बात को नही सुना और उस गरीब आदमी को सजा –ए– मौत दे दी। वह बुजुर्ग व्यक्ति सर झुकाए वही पर खड़ा रहा और फिर सिपाहियों ने उसे जेल में बंद कर दिया।

सभा में यह सब वही पर बीरबल भी देख रहा था। सभा के बाद बीरबल ने बादशाह अकबर से आग्रह किया कि वो उसके घर भोजन पर आए। और राजा अकबर ने नियंत्रण स्वीकार किया।

फिर अकबर रात को बीरबल के घर पहुंचा। और अकबर ने बहुत ही इंतजार किया और फ़िर राजा को भूख भी लगने लगा। पर खाना अब तक तैयार नहीं था।

अकबर ने गुस्सा में बीरबल से पूछा क्या हुआ कब भोजन मिलेगा। मैंने तो कही घंटे पहले ही खिचड़ी बनने के लिए रखी हुई है पर पता नहीं अभी तक नहीं बना।

अकबर ने गुस्सा से पुछा कि कहा बन रही है खिचड़ी। फिर बीरबल ने दिखाया उसने निचे चूल्हा में आग को जलाया था और ऊपर छत पर खिचड़ी पकने के लिए रखी थी।

यह देख कर गुस्सा में अकबर ने कहा, बीरबल तुम पागल हो। इस तरह तो पानी भी गरम नही होगा। तब बीरबल ने बड़े ही भाव पूर्वक कहा कि जब जलाशय में खड़ा आदमी एक किलोमीटर दूर जल रहे छोटे दीपक से ताप ले सकता है तो तो भला यह खिचड़ी भी बन जायेगी।

फिर राजा अकबर को पूरी बात समझ में आ गई। फिर उसने उस बुजुर्ग व्यक्ति को रिहा कर मुंह मांगा इनाम दिया। ऐसा था यह बीरबल की प्रसिद्ध कहानी।

इस Short Story से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर कोई भी समस्या हो उसे बड़ी ही समझदरी से से निपटना चाहिए।

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