यह सबसे अच्छी Desi Kahani बच्चों के लिए लिखा गया है। जिसे पढ़ कर मनोरंजन के साथ – साथ अच्छी शिक्षा भी सिखने को मिलेगा।

अक्सर बच्चे बहुत ही ज्यादा शरारती होते है। उन्हें रात के समय सोने के लिए दाढ़ी या माता – पिता के द्वारा Desi Kahani सुनाई जाती है जिससे वे कहानी सुनकर सो जाते है। 

Desikahani

सबका साथ, सबका विकास

एक समय की बात है, एक जंगल में एक सांप, एक मुर्गा, और एक बंदर रहते थे। यह तीनों दोस्त थे और हमेशा एक साथ खेलते थे।

Moral Story in Hindi - Top 18+ Best Desi Kahani in Hindi
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एक दिन, उन्होंने एक बड़े पेड़ के नीचे बैठकर बात की। मुर्गा बोला, “हमें अपने जीवन को और बेहतर बनाना चाहिए। हमें एक समुदाय बनाना चाहिए ताकि हम सभी एक-दूसरे की मदद कर सकें और साथ में खुशियाँ बाँट सकें।”

सांप ने इस पर सहमति दी, और बंदर ने भी हां कह दी। उन्होंने अपने जीवन में समुदाय की आवश्यकता समझी और इसे बनाने का निर्णय लिया।

पहले उन्होंने एक मंच बनाया, जिस पर समुदाय के सभी अधिकारी बैठ सकते थे। फिर उन्होंने एक समुदाय की बैठक बुलवाई, जिसमें वे निर्णय लेते थे।

जीवन में इस नए समुदाय का गठन होते ही, उनके साथ जीवन में बहुत सुख और समृद्धि आई। अब वे एक-दूसरे की मदद कर सकते थे, साथ में खेल सकते थे, और अपने जीवन को बेहतर बना सकते थे।

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि समुदाय का गठन करना महत्वपूर्ण होता है। हमें साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए और अपने साथीजनों की मदद करना चाहिए। इससे हम सभी का साथ, सभी का विकास होता है।

खरगोश और कछुआ की दोस्ती

बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक बड़ा ही अजीब सा दृश्य दिखाई देने लगा। वहां एक खरगोश और एक कछुआ एक साथ बैठे हुए थे। यह दृश्य अजीब इसलिए था क्योंकि खरगोश बहुत तेज़ था और कछुआ धीमे धीमे चलता था।

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जंगल के अन्य जानवर इसे हंसते थे और उनका मजाक उड़ाते थे। खरगोश को यह सब बहुत ही गुस्सा आया, लेकिन वह इस पर ध्यान नहीं दिया। वह और कछुआ बेहद अच्छे दोस्त बन गए।

एक दिन, जब खरगोश और कछुआ अकेले जंगल में घूम रहे थे, तब एक शेर उनके पास आया। शेर खरगोश को खाने का सोच रहा था।

खरगोश के तेज़ दिमाग ने उसे बचाने के लिए एक योजना बनाई। वह शेर से बोला, “शेर जी, हम तुम्हारी खास सेवा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हम एक शर्त पर।”

शेर ने पूछा, “कौन सी शर्त है?”

खरगोश ने कहा, “हमें एक स्पेशल दौड़ लगाने की इजाजत दीजिए। हम बहुत ही तेज़ दौड़ सकते हैं और तुम्हें हम पकड़ नहीं सकते।”

शेर इस चुनौती को स्वीकार कर लिया। खरगोश और कछुआ ने एक दौड़ लगाई और शेर उन्हें पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वे दौड़ते दौड़ते बाहर पहुँच गए, जहां शेर उन्हें पकड़ नहीं सका।

शेर थककर हार मानकर वहीं बैठ गया। खरगोश और कछुआ हँसते हुए वापस आए और शेर से बोले, “देखा, हमने कहा था ना, हम तुम्हें पकड़ नहीं सकते!”

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अपनी ताक़तों का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए। हमें दुसरों की मदद करने का मौका देना चाहिए, न कि उनका मजाक उड़ाना चाहिए। अगर हम सही तरीके से मिलकर काम करें, तो हम हर मुश्किल को पार कर सकते हैं।

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गाय और सियार: दोस्ती की महत्ता

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटी सी गाय जंगल में अकेली चराई करती थी। वह बड़ी ही आकेली थी और अकेलेपन में उसे बहुत अकेलापन महसूस होता था। एक दिन, जब वह अपने खाने की तलाश में घूम रही थी, तभी उसने जंगल के किसी कोने में एक सियार को देखा।

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सियार एक बहुत ही चालाक और खुशमिजाज था। वह गाय के पास आया और उसके साथ बात करने लगा। “नमस्ते, गाय दोस्त, क्या आप अकेली हैं?” सियार ने पूछा।

गाय थोड़ी चौंकी, पर उसने सियार से अपनी तनावपूर्ण कहानी सुनाई। सियार ने कहा, “गाय दोस्त, हम दोनों दोस्त बन सकते हैं। मैं तुम्हें साथ खाने के लिए मदद कर सकता हूँ और हम साथ में मस्ती करेंगे।”

गाय थोड़ी सी संदेही थी, पर वह सियार के साथ दोस्ती करने के लिए तैयार थी। दोनों ने मिलकर खाना खाया और साथ में खेलने लगे।

जब गर्मियों में प्यास लगती तो गाय और सियार एक साथ जल पीते और आपसी समर्थन देते। दोनों के बीच बड़ी गहरी दोस्ती हो गई।

एक दिन, जंगल में एक शेर आया, और वह गाय की ओर बढ़ा। गाय डर के मारे थरथराई, पर सियार ने ब्रेवली अपने दोस्त के पास खड़े होकर कहा, “डरो मत, गाय दोस्त, मैं तुम्हारे साथ हूँ।”

सियार ने शेर के साथ एक चाल खेली और उसको गुमराह कर दिया। शेर भागकर जंगल की ओर चला गया। गाय ने अपने दोस्त सियार का आभार व्यक्त किया और उनकी दोस्ती की महत्वपूर्ण चीजों में से एक है यह समझ लिया।

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि दोस्ती में सहयोग और समर्थन की महत्ता होती है। हमें दोस्तों की सहायता करनी चाहिए और उनके साथ समय बिताना चाहिए, क्योंकि अकेले हम कितने भी ताकदवर हों, साथ मिलकर हम और भी महत्त्वपूर्ण काम कर सकते हैं।

शेर और खरगोश की मित्रता

बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक शेर और एक खरगोश रहते थे। वे दोनों बड़े अच्छे दोस्त थे और साथ-साथ खेलते थे।

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एक दिन, शेर ने खरगोश से कहा, “आज हम एक महाशक्तिमान द्रव्य खोजेंगे जो हमें खुशियों से भर देगा।”

खरगोश थोड़ी चिंतित थे, क्योंकि शेर तो बड़े ही शक्तिशाली थे और वह सिर्फ एक छोटी सी खरगोश थे। लेकिन उन्होंने सहमति दे दी और शेर के साथ चल दिया।

वे दोनों जंगल की खोज में निकल पड़े और कई दिन तक चलते रहे, लेकिन वे खोज में कुछ भी नहीं पा सके। उनके पास खाने का भी सामान खत्म हो गया और वे बिना खाने भूखे-प्यासे हो गए।

खरगोश थक गए और बोले, “शेर भैया, हमने जो किसी द्रव्य की खोज की थी, वह हमें नहीं मिला। हम भूखे-प्यासे हो रहे हैं और अब हमें घर वापस जाना चाहिए।”

शेर ने विचार किया और समझ गए कि वे गलत रास्ते पर चल रहे थे। उन्होंने खरगोश से माफ़ी मांगी और सहमति दी कि वे अब वापस जा सकते हैं।

खरगोश और शेर वापस अपने घर की ओर बढ़ने लगे, जब खरगोश ने देखा कि एक छोटा सा गुफा है, जिसमें कुछ खाने की चीजें रखी हुई थीं। खरगोश ने खुशी-खुशी खाने की चीजें खाई और शेर के साथ साझा किया।

शेर और खरगोश ने देखा कि दोस्ती और सहयोग की ताकद ही सब कुछ होती है। उन्होंने सिखा कि दो अलग-अलग प्राकृतिक शक्तियों को मिलकर बेहतर परिणाम प्राप्त किया जा सकता है।

सिखना: इस Desi Kahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि दोस्ती और सहयोग महत्वपूर्ण हैं। हमें दूसरों की मदद करना और साथ में काम करना चाहिए, ताकि हम सभी खुश और समृद्ध जीवन जी सकें।

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कौवों की उदाहरण

किसी समय की बात है, एक जंगल में कौए का झुंड बसा था। वहां के कौए सभी बड़े और तेज थे, लेकिन उनमें एक छोटा सा कौआ था, जिसका नाम चिंटू था।

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चिंटू छोटा और कमजोर था, लेकिन वह बहुत ही समझदार था। वह हमेशा अपने बड़े भाइयों और बहनों की सलाह सुनता और सीखता था।

एक दिन, जब जंगल में बड़ी गर्मी आ गई, सभी पक्षी और जानवर बड़े प्यासे हो गए। उन्हें प्यास लगी और वे पानी की खोज में बाहर निकले।

चिंटू ने देखा कि एक पेड़ के नीचे एक बड़ा सा प्याला खड़ा है, और उसमें पानी भरा हुआ है। वह तुरंत अपने छोटे बच्चों को बुलाया और उन्हें बताया कि वे सभी साथ में प्यास बुझा सकते हैं।

लेकिन चिंटू के बड़े भाइयों और बहनों ने उसकी बात नहीं मानी और उसे बुरी तरह से ताना मारा। “तू छोटा है, हमसे क्यों बड़ा दिखने की कोशिश कर रहा है?” वे बोले।

चिंटू ने कहा, “मैं छोटा हूँ, लेकिन मैं जानता हूँ कि साथ में काम करके हम प्यास को बुझा सकते हैं।”

फिर चिंटू ने बड़े भाइयों और बहनों से प्यास बुझाने के तरीके बताये और सब ने मिलकर प्यास बुझाई।

इसके बाद, जब वे अपने साथियों के साथ वापस आए, तो सबको अच्छा लगा कि चिंटू ने सही तरीके से सोचा और काम किया। वे सभी ने चिंटू की समझदारी की सराहना की और उसे अपना छोटा भाई माना।

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि आकार और उम्र कुछ नहीं कहते, महत्वपूर्ण बात है आपकी समझदारी और योगदान। चिंटू ने अपने साथियों की मदद करके दिखाया कि हर किसी का योगदान महत्वपूर्ण होता है, चाहे वह छोटा हो या बड़ा।

कौवे की दुकान: एक नैतिक कहानी

बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर गाँव में एक बुद्धिमान कौआ अपनी छोटी सी दुकान चलाता था। वह दुकान में स्वादिष्ट दाने और छाया जगह प्रदान करता था, और उसका दाना देने का तरीका बहुत ही विचारशील था। लोग खुशी-खुशी उसकी दुकान पर आते और दाना खरीदते थे।

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एक दिन, एक लोमड़ी उसकी दुकान पर गई और धीरे-धीरे उसके पास पहुँची। लोमड़ी ने कहा, “बहनजी, आपके पास इतने सुंदर दाने हैं, क्या आप मुझे थोड़े से देंगे?”

कौआ ने यह देखा कि लोमड़ी की नाक और कान कांप रहे थे, और वह तैयार था उसे थोड़ा सा दाना देने के लिए। लेकिन फिर उसने यह सोचा कि लोमड़ी एक धोखाधड़ी हो सकती है।

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कौआ ने उससे कहा, “ठीक है, मैं आपको थोड़ा सा दाना दे दूंगा, लेकिन सबसे पहले आपको एक सवाल का उत्तर देना होगा।”

लोमड़ी ने अच्छी तरह से इस स्वाला का उत्तर दिया, और कौआ ने उसे कुछ दाने दे दिए। लोमड़ी खुश होकर वहाँ से चली गई।

एक और दिन, एक गधा उसकी दुकान पर आया और दाने की मांग की। कौआ ने फिर से उसे एक सवाल का उत्तर देने को कहा। गधा ने उत्तर दिया और कौआ ने उसे दाने दिए।

इसी तरह, कौआ ने कई और जानवरों को दाने दिए, लेकिन हर बार उन्हें पहले एक सवाल का उत्तर देना होता था।

एक दिन, एक भालू उसकी दुकान पर आया और दाने की मांग की। लेकिन इस बार, जब कौआ ने उससे सवाल पूछा, भालू ने उत्तर नहीं दिया और उसकी दुकान से चली गई।

कौआ थोड़ी देर बाद बाहर गई और देखा कि भालू दुकान के सामने ही बैठ गया था, जबकि उसके पास बहुत सारे दाने थे।

कौआ ने भालू से पूछा, “तुमने मेरे सवाल का उत्तर क्यों नहीं दिया?”

भालू ने कहा, “मुझे समय की कमी थी और मैं बहुत भूखा था, इसलिए मैं जल्दी-जल्दी दाने खाना चाहता था।”

कौआ ने समझाया, “मैंने तुमसे सवाल पूछने का मकसद यह नहीं था कि मैं तुम्हें दाने न दूं, बल्कि मैंने तुम्हारी बुद्धि को चेक करना चाहा था। अगर तुम उस सवाल का उत्तर देते, तो मैं तुम्हें दाने देता।”

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इसके बाद, भालू ने कौआ से माफ़ी मांगी और कहा, “मैं आपकी सोच से सहमत हूँ, और मैं अब हमेशा सवाल का उत्तर दूंगा।”

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें हमेशा आदरपूर्वक और समझदारी से बात करना चाहिए। हमें दुसरों के साथ धोखा नहीं देना चाहिए और दिन की पहचान के लिए बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।

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कौआ और मेंढ़क:

बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक कौआ और एक मेंढ़क रहते थे। वे दोनों अच्छे दोस्त थे और साथ-साथ उड़ान भरते थे।

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एक दिन कौआ ने मेंढ़क से कहा, “मेरे प्यारे दोस्त, हम इस गाँव में हमें बहुत सारे लोगों को देखते हैं जो अपने जीवन में कुछ न कुछ काम करते हैं। हमें भी कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे हमारा जीवन महत्वपूर्ण बने।”

मेंढ़क ने सोचा और कहा, “तुम बिल्कुल सही कह रहे हो, कौआ! हमें कुछ काम करना चाहिए, लेकिन क्या?”

कौआ मुस्कुराया और बोले, “हम दोनों एक साथ काम करेंगे। हम पेड़ों पर अच्छे-अच्छे गीत गाकर लोगों का मनोरंजन करेंगे।”

मेंढ़क ने स्वीकार कर लिया और दोनों एक साथ काम करने लगे। वे पेड़ों पर बैठकर गीत गाने लगे, और उनका संगीत सभी को पसंद आने लगा।

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कुछ सालों बाद, एक दिन मेंढ़क ने कौआ से कहा, “मेरे प्यारे दोस्त, हम इतना पसंदीदा हो गए हैं कि हमें और अधिक लोग हमारे संगीत को सुनें।”

कौआ ने खुशी-खुशी सहमति दी और दोनों ने गाँव के बड़े मैदान में एक बड़ा संगीत कार्यक्रम आयोजित किया। लोग बड़ी उत्साह से उनका संगीत सुनने आए और सभी ने उनकी प्रशंसा की।

मेंढ़क ने खुशी-खुशी कहा, “देखो, कौआ, हमारी मेहनत का ये अच्छा परिणाम है।

कौआ ने बताया, “हाँ, दोस्त, हमने मिलकर काम किया और हमारा संगीत आज इतना प्रसिद्ध हुआ है। हमें यही सिखना चाहिए कि साझा काम करके हम अधिक सफल हो सकते हैं।”

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