दौड़ने वाला कछुआ – Short Hindi Moral Story for Kidsदौड़ने वाला कछुआ – Short Hindi Moral Story for Kids

 आप सभी प्यारे मित्रों के लिए इस moral story के कहानी में आपके बच्चों को व्यस्त रखने का एक शानदार तरीका है। संभवत: इस moral story में आपके बचपन की सबसे प्यारी यांदो में से एक वह कहानियां है जो आपने अपने बचपन में सुना होगा।

आपके बचपन की अधिकतर moral story कहानियों में से एक हों “, इसमें उस तरह की कहानियां नहीं है जो आजकल अक्सर देखने को मिलते हैं और हम क्या इस सब (moral story)कहानियों को अपने बच्चों के साथ साझा करना आवश्यक समझते हैं क्यों नहीं सूची से शुरुआत करें जो आपके लिए मैं रखा हूं।

Desi Kahani– Top 5 Best Moral Story In Hindi– चिड़िया की कहानी
kids story in hindiTop 5 Best Moral Story In Hindi– चिड़िया की कहानी

इस पोस्ट में अंग्रेजी में बच्चों के लिए 5 moral Story कहानियों की एक सूची शामिल है और हम यह भी बताते हैं कि ये कहानियाँ आपके बच्चे को नैतिक मूल्यों को विकसित करने में क्यों मदद करती हैं।

इस आर्टिकल में हिंदी में बच्चों के लिए 5 moral story की सूची शामिल है और हम यह सभी बताते हैं कि यह moral story आपके बच्चे को नैतिक मूल्यों को विकसित करने में क्यों मदद करती है

चिड़िया की कहानी (The moral story Of Birds)

हमे अपनी जीवन में ऐसे मौके कई बार आते हैं,। की जब हमें लगता हैं कि हमें दूसरो पर निर्भर होने की बजाए ,”हमें अपनी कार्य को खुद करना चाहिए।

क्युकी अगर हम दूसरे के भरोसे बैठे रहे तो, क्या पता तय समय में होने वाले सभी काम सही समय पर होने की संभावना कम होती है तो आप लोगों को हम एक चिड़िया की कहानी (Moral Story In Hindi) बताने जा रहे हैं।

जिस कहानी से हम यह सीख सकतें है किहमें अपने जीवन में दूसरो पर निर्भर होने की बजाए। अपना काम खुद से करना चाहिए। तो चलिए शुरू करते हैं।

पंडित टोला नाम की एक गांव में एक किसान रहता था। उसके गांव के बाहर एक छोटा – सा खेत था। एक बार किसान अपने खेत में अरहर फसल बोया हुआ था “, और उसके खेत में चिड़ियां ने घोंसला बना लिया।

कुछ समय बीतने के बाद चिड़ियां उस घोंसले में अंडे भी दे दिया। फिर कुछ दिन बाद उस घोंसले में से दो छोटे छोटे बच्चे निकाल आए। और वे बड़े मजे से उस खेत में अपना जीवन गुजारने लगे।

कुछ समय बाद फसल पुरी तरह पक गई। और साथ ही कटाई का समय भी आ गए। गांव के सभी किसान अपने – अपने खेत की फसल की कटाई करने में लग गए। अब चिड़ियां और उसके बच्चों को वह खेत छोड़कर दूसरे नए स्थान पर जाने का समय आ गया था।

समय बीतने लगा एक दिन एक दिन खेत में चिड़ियां के बच्चो ने सुना “, किसान को यह कहते हुए की, कल मैं अपने फसल कटाई के लिए अपने पड़ोसी से पूछूंगा, और उसे खेत में भेजूंगा।

यह सुनकर चिड़ियां के बच्चे सहम गए थे, और साथ ही किसान की बातों से सभी परेशान हो गए। और उस समय चिड़ियां कही दाने के लिए गई हुई थी। और जब वह वापस लौटी तो बच्चों ने,”

उसे किसान की बात बताते हुए कहा,”मां आज हमारा यहां अंतिम दिन हैं। और रात में हमें यहां से दूसरे स्थान के लिए निकलना होगा।

चिड़ियां ने उतर दीया,”

बच्चों इतनी जल्दी नहीं”, मुझे ऐसा लगता है कि इस खेत की फसल की कटाई कल नहीं होगी। और चिड़िया की कही हुई बात उस दिन सही साबित हुई। दूसरे दिन उस किसान के पड़ोसी खेत नहीं आया आवर खेत की फसल की कटाई नहीं हो सकी।

शाम को किसान खेत में आया और खेत को जैसे-तैसे देखकर बड़बड़ाने लगा। यह पड़ोसी तो नहीं आया। ऐसा करता हूं कि कल मैं अपने किसी रिश्तेदार को भेज देता हूं।

चिड़िया के बच्चों ने फिर किसान की बातों को सुन लिया। और चिड़िया के बच्चे घबराने लगे “,जब चिड़िया आई तो वह यह सब चिड़िया से बताएं तब चिड़िया बोली”,

“तुम लोग किसी भी बात की चिंता ना करो, और हमें आज रात कहीं पर भी जाने की जरूरत नहीं है। और मुझे नहीं लगता कि इस किसान का रिश्तेदार आएगा।

और चिड़िया के मां के द्वारा बोला गया, बात ठीक वैसा ही हुआ किसान के रिश्तेदार किसान के खेत नहीं पहुंचे। चिड़िया के बच्चे हैरान थे कि उसकी मां के द्वारा कही हुई बात सभी सही साबित हो रही है।

फिर अगली शाम जब किसान खेत आता है तो खेत की वही स्थिति देख फिर बड़बड़ाने  लगता है कि,”यह लोग तो कहने के बाद भी खुद कटाई करने के लिए नहीं आते हैं। इसलिए कल मैं खुद आकर खेत की कटाई शुरू करूंगा।

चिड़िया के बच्चों ने किसान की यह भी बात सुन ली। और जब चिड़िया के बच्चों ने अपनी मां से यह सभी बातें बताया तो वह बोली,”बच्चों अब समय आ गया है हमें यह खेत छोड़ने की:”हम आज ही या खेत छोड़कर किसी दूसरी जगह चले जाएंगे।

चिड़िया के दोनों बच्चे हैरान थे कि इस बार क्या वजह है कि मां तुरंत दूसरी जगह जाने के लिए बोल रही है। यह बात अपनी मां से पूछे ”

चिड़िया ने बोली:”,

बच्चों”, पिछली दो बार किसान फसल की कटाई पर करने के लिए दूसरे पर निर्भर था। और वह दूसरों को कह कर अपने काम से पल्ला झाड़ लिया था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।

किसान इस बार अपने काम की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लिया है। इसलिए हमें यह आवश्यक है कि यह जगह छोड़कर हमें दूसरी जगह जाना चाहिए।

साथ ही अब उस चिड़ियां के बच्चे भी बड़े हो गए थे, और दोनों ने उड़ना भी सिख लिया था। और फिर उसी रात चिड़िया और उसके बच्चों ने उस खेत से उड़ गए।

और कही और जगह पर जाकर अपनी घर बना लिया। इस तरह चिड़ियां किसान को खेत की फसल कटाई करने से पहले ही सुरक्षित स्थान पर चले गए।

Moral story  कहानी से शिक्षा:– इस moral story से हमें यह शिक्षा मिलती है कि, जब तक किसान दूसरो के भरोसे अपनी फसल की कटाई के लिए रहा तो नहीं हुआ।

लेकीन जब वह दूसरों की भरोसा छोड़कर अपना कार्य खुद से करने का निर्णय लिया तो उस खेत की चिड़ियां भी समझ गई थी कि अब किसान ने अपने फसल को काटने का फैसला कर लिया है। की अपना काम खुद कर सकता है। तो चिड़ियां भी यह समझ कर उस खेत को अपने बच्चो के साथ छोड़ दिया।

इसलिए हमें अपने काम किसी दूसरे की बजाय हमें खुद पर करने का भरोसा करना चाहिए।

Karva Chauth ki Kahani

इस moral story me मैं आपको करवा चौथ व्रत की कथा साहित्य पुरी अच्छी तरह से बताने वाला हूं जो आपको आपकी सास मां के द्वारा सुना ही होगा।

बहुत समय पहले की बात है , एक साहूकार की सात बेटे और एक बेटी करवा नाम की थी। साहूकार के सभी सात बेटे अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। और यहां तक कि वह सब पहले अपने बहन को खाना खिलाते फिर वह स्वंय खाना खाते थे। एक बार की बात है उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।

शाम को जब अपना व्यापार – व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत ही व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाना खाने की आग्रह करने लगे।

लेकीन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ व्रत का आज निर्जल व्रत हैं। और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्द्ध देकर ही खा सकती है। चुकी चंद्रमा अभी तक नहीं निकला था। इसलिए वह भूख प्यास से व्याकुल हो रही थी।

सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की यह हालत देखी नही जाती हैं , और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी के ओट में रख देता हैं। और दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता था कि की मानो चतुर्थी की चांद उदित हो रहा हो।

इसके बाद भाई अपनी बहन से बताता है कि चांद निकाल गया है। तुम उसे अर्धय देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ी पर चढ़ कर चांद को देखती हैं और उसे अर्द्ध देकर खाना खाने बैठ जाती हैं।

जब वह भोजन का पहला टुकड़ा मुंह में डालती हैं तो उसे छींक आ जाती हैं फिर वह दूसरा टुकड़ा मुंह में डालती हैं तो उसमे बाल आ जाता हैं। और जैसे ही भोजन का तीसरा टुकड़ा अपने मुंह में डालने जाती हैं की उसके पति के मृत होने की खबर आ जाती हैं। और वह बोखला जाती हैं।

उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती हैं, की उसके साथ ऐसा हुआ है। करवा चौथ की व्रत गलत तरीका से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।

सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चिय करती हैं कि वह अपने पति की अंतिम संस्कार नही होने देगी। और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन देकर रहेगी।

वह पूरे एक साल तक अपने पति के साथ बैठे रहती हैं। उसकी देखभाल करती हैं। उसके ऊपर उगने वाली सुइनुमा घास को वह एकत्रित करती रहती है।

फिर एक साल बाद करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ की व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती है तो वह प्रत्येक भाभी से,”यम सुई ले लो”पीय सुई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो ऐसा आग्रह करती हैं। लेकीन हर बार उसे अगली भाभी से आग्रह करने को कह चली जाती हैं।

लेकीन इस बार जब छह नंबर की भाभी का बारी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती हैं। यह भाभी उसे बताती हैं कि चुकी छोटे भाई की वजह से उसकी व्रत टूटी है इसलिए यह कराने को सक्ति उसकी पत्नी में ही है।

वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है। और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा नही कर दे तुम उसे छोड़ना मत। ऐसा कह कर वह चली जाती हैं।

जब सबसे अंत में सबसे छोटी भाभी आती हैं जिसके पति के वजह से करवा की व्रत टूटने से यह सब हुआ है तो करवा उनसे भी सुहागन बनने की आग्रह करती हैं। लेकीन वह टालमटोल करने लगती हैं। इसे देख करवा उन्हे जोर से पकड़ लेती हैं।

फिर करवा अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए आग्रह करने लगती हैं। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है खसोटती है। लेकीन करवा भी नहीं छोड़ती हैं।

और अंत में उसकी तपस्या को देख उसकी भाभी पसीज जाती हैं। और अपनी छोटी उंगली को चीरकर उसमें से अमृत करवा के पति के मुंह में डाल देती हैं।

करवा का पति तुंरत श्रीगणेश – श्रीगणेश करते हुए उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु की कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाती हैं।

हे श्री गणेश – गौरी मां जिस प्रकार करवा को चीर सुहागन का वरदान आपसे मिला , वैसे ही सभी सुहागिनियो को मिले

करवा चौथ भगवान की जय।

इस kids story in hindi (moral story)से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कभी भी भगवान की पूजा में बाधा नहीं पूजा में सहायता करनी चाहिए।

इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना।

करवा चौथ में कौन सा कथा पढ़ा जाता है?

करवा चौथ की कहानी कितने बजे सुनते हैं?

करवा चौथ कैसे शुरू हुआ था?

करवा चौथ की कहानी कब सुननी चाहिए?

चांद को अरग देते समय क्या कहते हैं?

करवा चौथ कथा के बाद क्या हम पानी पी सकते हैं?

करवे में क्या क्या भरा जाता है?

क्या हम पीरियड्स में करवा चौथ पूजा कर सकते हैं?

करवा चौथ पर सास को क्या देते हैं?

करवा चौथ में कितने दिए जलाए जाते हैं?

Bacchon ki Kahani

हैलो दोस्तो आज हम इस moral story (kids story in hindi) मेंहम छोटे छोटे बच्चों की कहानियों के बारे में जानेंगे। इन सभी moral story को पढ़ कर बहुत ही अच्छी शिक्षा मिलेंगी। और साथ ही मनोरंजन भी होगा।

हम जानते हैं कि अक्सर बच्चे कहानियों के शौकीन होते हैं और साथ ही उन्हें कहानियां बहुत ही सुंदर लगती हैं। और बच्चे कहानियों के बारे में सुनने में बहुत ही उत्साहित होते हैं। और उन्हे कहानियों के बारे में जानने में अच्छा लगता हैं।

एक वृक्ष पर एक उल्लू रहता था। उल्लू को दिन में दिखाई नहीं पड़ती है। इसलिए वह दिन भर अपने घोंसले में छिपकर बैठ कर है।और जब रात होती हैं। तो वे शिकार के लिए बाहर निकलते हैं।

एक समय की बात है , गर्मी के दिन थे। दोपहर की समय और आकाश में सूर्य आग की गोले की तरह चमक रहा था और बड़ी ही जोरों की गर्मी थी।

तभी कही से एक बन्दर गर्मी से परेशान आया और वृक्ष की डाल पर बैठ कर बोला, “ओह, बड़ी गर्मी भीषण हैं। अभी तो आकाश में सूर्य आग की गोले की तरह चमक रहा है।

बन्दर की बात उल्लू के भी कानों में पड़ी। और उल्लू से रहा नहीं गया और वह बोल पडा:”क्या कह रहे हों ? सूर्य चमक रहा है। बिलकुल झूठ! चंद्रमा की चमकने की बात कहते तो मान भी लेता।

तभी बन्दर ने उल्लू से बोला “चंद्रमा तो दिन में चमकता नही रात में चमकता है। और इस समय दिन है और दिन में सूर्य ही चमकता है। और जब सूर्य की प्रकाश तीव्र रूप में चारों तरफ फैल जाता हैं। तो भयावह गर्मी पड़ती हैं। और आज सचमुच बड़ी भयावह गर्मी पड़ रही है।

बन्दर ने उल्लू को समझाने का प्रयास किया की आकाश में सूर्य चमक रहा है। उसी के कारण भयावह गर्मी पड़ रही है। पर उल्लू अपनी बातों पर आड़ा रहा।

बन्दर की लाखो समझाने पर भी वह यही कहता रहा की न तो सूर्य है और न ही सूर्य का प्रकाश है और न ही गर्मी पड़ रहा है। और अब उल्लू और बंदर दोनो अपनी अपनी बात पर अड़े रहे।

इस पर उल्लू न विचार किया की चलो हम अपने दोस्तों के पास चल कर इस बात का निश्चय कर लेते हैं। और फिर बंदर ने उल्लू की बात को मान लिया। उल्लू उसे साथ लेकर दूसरे वृक्ष पर गया।

दूसरे वृक्ष पर सैकड़ों उल्लू रहते थे। उल्लू ने अपने सभी जात भाइयों को एकत्रित कर कहा “, भाइयों इस बंदर का कहना है कि इस समय दिन है। और आकाश में सूर्य चमक रहा है। अब आप लोग ही निर्णय करे ताकि अभी दिन है या रात है ! और आकाश में सूर्य चमक रहा है कि नहीं।

ऊल्लू की बात सुन कर उसके जात भाई जी– बंदर पर हंस पड़े। और बंदर की उपहास करते हुए कहा “, क्या कह रहे हों जी आकाश में सूर्य चमक रहा है। बिलकुल अंधे हो क्या ? और तुम हमारी बस्ती में ऐसे झूठी बातों का प्रचार मत करो !

पर बंदर भी अपने बातों पर ठाना हुआ था। और बंदर की बातों को सुन सभी बन्दर कुपित हो उठे थे। और बन्दर को मारने के लिए झपट पड़े।

बन्दर भी प्राण बचाकर वहा से भाग चला। कुशल था कि दिन होने के कारण उल्लुओं को दिखाई नहीं पड़ रहा था। और इधर दिन होने के कारण बंदर को दिखाई पड़ रहा था। बन्दर ने बड़ी ही सरलता से भाग कर बंदरों से अपनी रक्षा किया।

Moral story (kids story in hindi) :– इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जहा मूर्खो की बहुमत होता है वहा इसी प्रकार सत्य वचन को भी असत्य सिद्ध कर दिया जाता है।

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मेंढक की दौड़(kids story in hindi of Frog) Moral Story

एक नदी में बहुत सारे मेंढक रहते थे। और नदी के बीचो – बीच में एक बहुत ही पुराना लकड़ी के काम में लगे हुए थे। और इस पर मछुआरे अपने जाल लगाया करते थे। और उसमें से एक खंभा बहुत ऊंचा था।

उस ऊंची खंबी की सतह भी बहुत ज्यादा चिकनी थी। एक दिन नदी के सभी मेडको ने निर्णय लिया कि क्यों ना हम लोग रेस लगाएं। अवर रेस में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों को सबसे ऊंची वाली खंभी पर भी चढ़ना होगा। हाउ आर यू सबसे पहले सबसे ऊंची हम भी वाली चोटी पर पहुंचेगा वही विजेता और राजा होगा।

मेंढकों की रेस का दिन आ गया ? चारों तरफ बहुत सारी भीड़ थी। और बहुत सारे मेंढक रेस में भाग लेने के लिए आए हुए थे। चारों तरफ में लोगों ने चोरी शोर मचा रखी थी और अब शुरू हुई।

लेकिन खांबे को देखकर मेंढकों की भीड़ में किसी भी मेंढकों को यह यकीन नहीं हुआ कि कोई भी इस ऊंची लकड़ी के खांबे को पार कर पाएगा। और चारों तरफ मेंढकों से यही सुनाई देता था यह बहुत ही कठिन है इसे पार पाना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन है। औरों कभी भी इस रेस को पूरी कोई नहीं कर पाएगा।

एक मेंढक ने कहा सफलता की तो बात ही दूर है इस पर कोई चढ ही नहीं पाएगा। और यही हो रहा था कोई भी मेंढकों उससे चल नहीं पा रहे थे। पर बहुत सारे मेंढकों ने हार नहीं मानी, और अपनी कोशिश जारी रखें कई बार मेंढकों है, चार पच बार गिरने के बावजूद भी अपनी कोशिश जारी रखें।

मेंढकों में कई भी अभी भी चिलाए जा रही रहे थे,यह नहीं हो पाएगा यह असंभव है। और चारों तरफ यही सुनाई दे रहा था। अरे यह रेस बहुत ही ज्यादा कठिन है। बहुत सारे मेंढक यह सुनकर के हताश होकर रे छोड़ दिए और निराश हो गए।

लेकिन उन्हीं मेंढकों में से एक छोटा सा मेंढक था जो बहुत बार गिरने के बाद भी वह बार-बार ऊपर चढ़ने का लगातार प्रयास करते जा रहा था। वह छोटा मेंढक ऊपर की तरफ बढ़ता रहा और अंततः उस खंभे के ऊपर चढ़ गया। और इस रेस का वह मेंढक विजेता बना। उसकी जीत पर सभी को बहुत ही आश्चर्य हुआ। और सभी बड़े मेंढक उसे चारों तरफ से घेर लिए और यह पूछने लगे तुमने यह कैसे किया।

मेंढकों  ने यह सवाल पूछा तुमने यह कैसे पूरा किया। और तुम्हें यह पूरा करने की शक्ति कैसे मिली। जरा हमें भी बताओ कि तुमने यह कैसे किया। तभी पीछे से उसका एक दोस्त बोलता है कि वह बहरा है। उसे कुछ सुनाई नहीं देता।

Moral story (kids story in hindi): – इस Moral Story से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कौन क्या कहता है इस पर ध्यान न देकर अपनी काबिलियत पर भरोसा करो पूरी विश्वास के साथ कोशिश करते रहो सफलता जरूर मिलती है

Latest kids story in hindi

नीले सियार की (kids story in hindi) कहानी:–

चंपक नामक एक सियार था जो कि बहुत ही भूखा था ज्यादा भूख लगने के कारण वह चंपक सियार इधर-उधर भटकते भटकते हुए नजदीक स्थित एक गांव में जा पहुंचा।

कभी गांव में घूमने वाले कुत्तों ने उसे देख लिया। और उस पर टूट पड़े,, सियार ने जान बचाकर भागने में ही अपनी समझदारी समझे और जाकर एक मकान में घुस गया।

Desi Kahani– Top 5 Best Moral Story In Hindi– चिड़िया की कहानी
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वह मकान एक धोबी का था। और उस घर के कोने में एक बड़ा सा ड्रम रखा हुआ था। और चंपक उसी में चुप करके बैठ गया। और वह वही रात भर छुपा रहा।

सुबह होते ही सभी कुत्ते वहां से जा चुके थे। तभी चंपक ड्रम से निकलकर के जंगल की तरफ भाग गया। और उसे भूख के साथ-साथ बड़ी जोरों से प्यास भी लग रही थी। तो वह पानी पीने के लिए नदी के किनारे गया।

तो चंपक पानी में अपनी परछाई देखकर के चौक गया। और अब उसका रंग नीला हो चुका था। और चंपक रात में जिस ड्रम में चुप करके बैठा था। उसमें धोबी ने नीला रंग घोला हुआ था। और उस नील का रंग चंपक के शरीर पर चढ़ गया था।

पानी पीकर जब चंपक जंगल में पहुंचा तो, दूसरे जानवर उसे देख कर डर गए। सभी जानवर नीले रंग की कभी विचित्र जानवर नहीं देखे थे। वे सभी डर के मारे चारों तरफ भागने लगे। चंपत ने जानवरों को देखा तो बहुत बड़ा खुश हुआ। उसके दिमाग में ख्याल आया कि इन जानवरों को मूर्ख बनाकर मैं जंगल का राजा बन सकता हूं।

उसने भागते हुए सभी जानवरों को रोका और अपने पास बुला कर बोला:”जानवरों मुझसे डरो मत मैं ब्रह्मा जी का दूत हूं। उन्होंने मुझे तुम लोगों की रक्षा करने के लिए भेजा है। और इस जंगल का कोई राजा नहीं है तो अब मैं तुम्हारे जंगल का राजा हूं। और तुम लोगों की रक्षा की जिम्मेदारी अब मेरी है तुम लोग मेरे राज्य में निश्चिंत और खुशी से रहो।

अब चंपक की मजे हो गए वह दिन भर छोटे-छोटे जानवरों से अपनी सेवा कराता था। हाथी की सवारी कर जंगलों में घूमता। साथी शेर ,चीते और भेड़िए उसके लिए शिकार करके लाते थे। और बड़े ही उसमें से वह भिन्न-भिन्न कर अपने लिए मांस खाता और बचे हुए सभी उन लोगों को दे देता था।

चंपक की दिन पूरे ही शांति पूर्वक दिन बीत रहे थे। लेकिन झूठ,” आखिर कितने दिनों तक चुकता एक ना एक दिन सच्चाई सामने तो आ ही जाती है।

एक दिन सुबह चंपक सोकर अपनी माद से निकला तभी अचानक उसे दूर से यारों की आवाज हुआ – हुआ सुनाई दिया। चंपक आखिर था तो सियार ही।

चंपक भूल गया कि उसने अन्य जानवरों के सामने ब्रह्मा जी का दूत होकर उनकी राजा बनकर सेवा करने का झूठ बोला हुआ है। और वह भी मन मस्त होकर हुआ– हुआ चिल्लाने लगा।

जब दूसरे जानवरों ने चंपत की आवाज सुनी तो वह पहचान गए कि यह वास्तव में एक सियार है। और हमें मूर्ख बनाकर के राजा बना बैठा है।

सभी ने मारने के लिए उसके पीछे दौड़े। चंपक भी बड़े जोर से भागने का प्रयास किया लेकिन शेर और चीते के पंजों से बच नहीं सका और वह मारा गया।

Moral story(kids story in hindi):–इस moral story मैं हमें सियार की कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि झूठ की उम्र लंबी नहीं होती लेकिन जब सच्चाई बाहर आती है तो उसका परिणाम बहुत ही बुरा होता है इसलिए हमेशा सच्चाई के साथ रहे सच्चाई बोले और सच्चाई के साथ अपनी सभी काम को करें।

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