Dipawali Kyon Manaya Jata Hai: बड़ी दिवाली कब हैं? 12 या 13 जानें मुहूर्त

Dipawali Ke

Dipawali Kyon Manaya Jata Hai: बड़ी दिवाली कब हैं? 12 या 13 नवंबर जानें मुहूर्त: यह Dipawali Kyon Manaya Jata Hai  मुख्य रूप से हिंदुओं का पर्व माना जाता है जिसमें दीपक जलाया जाता है और माना जाता है कि अंधेरों को प्रकाश की विजय हुई है जिसका अर्थ है कि हम अपने किसी विकट परिस्थिति से उभर चुके हैं और साथ ही इसमें पटाखे घर में रंगोलियां और पूरी तरह से घर को सजाया जाता है और बहुत ही धूमधाम के साथ मां लक्ष्मी श्री गणेश और भी बहुत सारे देवताओं की पूजा की जाती हैं।

Dipawali Kyon Manaya Jata Hai

इस Dipawali Kyon Manaya Jata Hai को अच्छा से मनाने के लिए लोग अपनी पूंजी का एक मोटी रकम इस त्यौहार पर खर्चा करते हैं। इस Dipawali Kyon Manaya Jata Hai  मैं बहुत सारे लोग अपने घर की पेंटिंग करेंगे बहुत सारे लोग अच्छे-अच्छे गोल्ड में इन्वेस्ट करेंगे कुछ लोग कार्य खरीदते हैं

दीपावली के त्यौहार में लोग अपने घरों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं और साथ ही पूजा-पाठ के लिए भी अलग-अलग की तरह की सजावट अपने घर को करते हैं।

Dipawali Kyon Manaya Jata Hai

दीपावली क्यों मनाई जाती है(Dipawali Kyon Manaya Jata Hai) हमारी संस्कृति के अनुसार कहा जाता है कि जब श्री रामचंद्र ने 14 वर्ष बीतने के बाद जब रावण को मार कर श्री रामचंद्र जी अपने अयोध्या नगरी पहुंचे थे तो अयोध्या नगरी वालों ने प्रभु के आने की खुशी में पुरी अयोध्या को दीपक से सजाया गया था। और यह भी कहा जाता हैं कि

Dipawali Kyon Manaya Jata Hai

उस रात के समय दिन के जैसे दिखाई दे रहे थे। और फ़िर हमारे प्रभु श्री रामचंद्र जी स्वागत बहुत ही धूम धाम से किया गया था। यही कारण है कि हम हर दीपावाली में दीपक जलाएं जाते हैं ताकि अंधेरे पर प्रकाश की जीत हों।

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इस Dipawali Kyon Manaya Jata Hai  में पूरे देश भर में Dipawali Kyon Manaya Jata Hai  – 12 नवंबर 2023  में मनाई जाएगी। लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – शाम 06.11 बजे से लेकर रात को 8.15 बजे तक रहेगा।

अमावस्या तिथि 12 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होगी । और 13 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 56 मिनट पर समाप्ति हो जायेगी। यह पूजा 10 नवंबर धनतेरस से शुरु होकर 15 नवंबर भाई दूज पर समाप्त होगा।

Dipawali Kyon Manaya Jata Hai

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दोस्तों हमें यह पता है कि हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में से दिवाली एक सबसे उत्तम परवाह है जिसे भारत के कोने कोने में दिवालिया मनाई जाती है इसमें बहुत सारे लोग अपने घर को सजाते हैं।

दोस्तों हमें यह पता है कि हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्व में से दिवाली एक सबसे उत्तम परवाह है जिसे भारत के कोने कोने में दिवालिया मनाई जाती है इसमें बहुत सारे लोग अपने घर को सजाते हैं।

दिवाली के दिन बहुत सारे लोग नए नए कपड़े पहनते हैं बहुत सारे लोग मांगे मांगे चीजें खरीदते हैं इसमें धनतेरस के दिन शुभ मुहूर्त पर लोक सामान को खरीदते हैं और सही समय पर संध्याकाल में मां लक्ष्मी तथा श्री गणेश और सरस्वती और भी बहुत देवताओं की पूजा अर्चना करते हैं। जब अपने वनवास काल के 14 वर्ष पूरा करने के बाद अपने राज्य अयोध्या लौटे थे।

तब अयोध्या में रहने वाले सभी नगर वासियों ने भगवान रामचंद्र की आने की खुशी में पूरे नगर को दीपक से सजा दिया था और उस दिन पूरी अयोध्या में रात दिन की तरह महसूस हो रहे थे। और जब आए श्री रामचंद्र जी और माता सीता तथा लक्ष्मण का स्वागत बहुत ही धूमधाम से दीपक से स्वागत किया गया।

इसी आस्था को देखते हुए हम आज हर साल दीपावली के रूप में इस पर्व को मनाते हैं। और यह त्यौहार आप केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में भी मनाई जाती है।

अमावस्या तिथि 12 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होगी । और 13 नवंबर को दोपहर 02 बजकर 56 मिनट पर समाप्ति हो जायेगी। यह पूजा 10 नवंबर धनतेरस से शुरु होकर 15 नवंबर भाई दूज पर समाप्त होगा।

इस Dipawali Kyon Manaya Jata Hai  मैं बहुत सारे लोग अपने अपने घरों को पेंट कर आते हैं अपने घरों को बहुत ही अच्छे से सजाते हैं और साथ ही बहुत सारे लोग अपने दरवाजे पर दीपावली के दिन रंगोलियां बनाते हैं भारत की संस्कृति में अलग-अलग प्रकार की रंगोलियां बनाई जाती है।

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