बच्चों की सबसे पहली पसंद DesiKahani कहानी होती हैं जिसे बच्चे बहुत ही ज्यादा ध्यान से सुनते हैं। और मनोरंजन के साथ – साथ अच्छी शिक्षा मिलती हैं।

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सच्चाई की महिमा

एक समय की बात है, गांव में एक छोटे से लड़के का नाम राजू था। वह बड़ा ही सच्चा और ईमानदार था। उसकी शिक्षा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि वह कभी झूठ नहीं बोलता था।

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एक दिन, राजू की मम्मी उससे एक काम करने के लिए बोली। मम्मी ने उससे कहा, “राजू, कृपया बाजार जाकर दुकानदार से 5 किलो दाल खरीद आओ।”

राजू खुशी-खुशी दाल की तरफ चला गया। वह दुकानदार के पास पहुंचकर दाल के बारे में पूछते हैं, और दुकानदार ने 5 किलो दाल उनको दी।

राजू अपनी घर की ओर लौट आया, लेकिन रास्ते में दाल की थैली फट गई और दाल सड़ गई। राजू बहुत दुखी हुआ घर आया, क्योंकि वह अपनी मम्मी से सच्चाई बताने में डर रहा था।

मम्मी ने देख लिया कि राजू दुखी है। वह पूछने लगी, “राजू, क्या हुआ? क्यों इतना दुखी हो?”

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राजू थोड़ी देर सोचने के बाद खुद को सच्चाई से सामना करने का निर्णय लिया। उसने मम्मी को सच्चाई में बता दिया कि दाल की थैली रास्ते में फट गई और दाल सड़ गई।

मम्मी थोड़ी ही चिंतित हुई, लेकिन वह राजू की सच्चाई की सराहना की क्योंकि उसके पास कोई और विकल्प नहीं था।

मम्मी ने राजू से कहा, “राजू, मुझे खेद है कि दाल की थैली फट गई, लेकिन मैं खुश हूँ कि तुमने सच्चाई बताई। सच्चाई हमेशा सबसे महत्वपूर्ण होती है।”

राजू को यह सिखने को मिला कि सच्चाई से दुखी होना बेहतर है जबकि झूठ बोलकर खुद को शान्ति करने की कोशिश करने से।

इस DesiKahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि सच्चाई और ईमानदारी हमारे जीवन में हमेशा महत्वपूर्ण होती हैं, चाहे हमारी परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों। सच्चाई से होने वाले किसी भी नुकसान का सामना करना हमें सीखने का अवसर देता है और हमें और भी मजबूत बनाता है।

बच्चों की कहानी: “समय का मूल्य

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक छोटा सा लड़का नामक ‘रजू’ रहता था। वह बहुत ही निरंतर खेलता और मस्ती करता था, लेकिन वह कभी भी समय की महत्व को समझ नहीं पाता था।

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रजू के पिता बहुत ही समझदार और जागरूक थे। वे अपने बेटे को समय की महत्व के बारे में हमेशा सिखाते रहते थे, लेकिन रजू कभी इस पर ध्यान नहीं देता था।

एक दिन, रजू अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। वह इतना खुश था कि वह समय का ध्यान ही नहीं दे रहा था। अचानक, उसके पिता ने उसे बुलवाया और कहा, “रजू, तुम्हारे पास कल एक परीक्षा है, और तुम्हें अभी तक अपनी पढ़ाई नहीं की है।”

रजू बहुत चौंका, और उसने अपने पिता से माफी मांगी क्योंकि वह समय को नजरअंदाज कर दिया था। पिता ने उसे समझाया कि समय का मूल्य अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है और वह सब कुछ है।

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रजू ने उस दिन से समय का महत्व समझ लिया और अपनी पढ़ाई में ध्यान देने लगा। वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता गया और अच्छे अंक प्राप्त करने में सफल हुआ।

इस DesiKahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि समय का मूल्य होता है और हमें इसका सही तरीके से समय से समझना चाहिए। हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समय का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए और समय की मूल्य की समझ रखनी चाहिए।

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रामू के ईमानदारी का मूल्य

बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक छोटे से लड़के का नाम रामु था। रामु बहुत ही ईमानदार और सच्चा बच्चा था। उसकी माता पिता ने उसे ईमानदारी का महत्व सिखाया था।

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एक दिन, जब रामु अपने खेत में काम कर रहा था, उसने एक बड़ी सी पाइप खुदाई करते समय पाई। जब वह पाइप बाहर निकाला, तो उसे देखकर वह हैरान हो गया। पाइप के अंदर चमकदार सोने के सिक्के थे।

रामु के मन में दो विचार थे। पहला विचार था कि वह सोने के सिक्के छुपा ले और धनी बन जाए। दूसरा विचार था कि वह इसे गांव के मुखिया को दिखाए और वो इसे सही जगह पहुंचाए।

रामु ने अपने माता-पिता की सिख पर चलते हुए दूसरा विचार चुना। वह गांव के मुखिया के पास चला गया और सोने के सिक्कों की खोज की जानकारी दी।

मुखिया बहुत खुश हुआ कि रामु ने इसे सही जगह पहुंचाया और उसे ईमानदारी से वापस किया। उसने रामु को बड़ा पुरस्कार दिया और गांव के लोगों के सामने उसकी महानता की कहानी सुनाई।

रामु का यह ईमानदारी और सच्चाई के प्रति प्यार उसे गांव के लोगों के दिलों में बड़ा आदर दिलाने में सफल रहा। वह अमीर नहीं बना, लेकिन उसका यह ईमानदार और सच्चाई के प्रति समर्पण उसकी जीवन में सच्ची धन संपत्ति बन गयी।

इस DesiKahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि ईमानदारी और सच्चाई का मूल्य कोई भी सोने या चांदी से कम नहीं होता। हमें हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलना चाहिए, चाहे जीवन में कुछ भी हो। ईमानदारी हमारी असली मूल्य होती है और वह हमें हमेशा सफलता की ओर ले जाती है।

सजीव और दादा दादी की कहानी 

एक समय की बात है, गांव में एक बड़े ही आदर्श परिवार रहता था। इस परिवार के पास छह सदस्य थे – पिता, मां, दादी, दादा, एक बेटी, और उनका एक बेटा। इस परिवार की सबसे बड़ी दिशा थी, उनकी संयमित और सजीव दादी-दादा।

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Desikahaniदादी-दादा का प्रतिदिन की तरह की शुरुआत सुबह की पूजा से होती थी। वे ध्यान और साधना का पराया किया करते थे और गांव के लोग उन्हें एक बड़े आदर और सम्मान से देखते थे।

एक दिन, गांव में एक बड़ा मेला आया। सभी गांव वाले मेले के लिए बड़ी उत्सुकता से तैयार हो गए। बेटे और बेटी ने अपने मित्रों के साथ मेले के लिए बड़ी उत्सुकता से जाना। लेकिन दादी-दादा ने मेले में नहीं जाने का निर्णय किया, क्योंकि उनके लिए उनकी ध्यान और पूजा ही सबसे महत्वपूर्ण थी।

मेले के दिन, बेटे और बेटी गांव के लोगों के साथ मेले में गए और वहां खूबसुरत खेल और खाने का आनंद लिया। मेले में वे अपने मित्रों के साथ हंसते-हंसाते समय बिता रहे थे।

मेले के अंत में, जब वे अपने परिवार के पास लौटे, तो उन्होंने देखा कि दादी-दादा अपने आदर्शों के साथ अपने गर्म कपड़ों के बावजूद अगले पेड़ के नीचे बैठे थे।

बेटे और बेटी ने यह देखकर हैरानी में आ गए और अपने दादी-दादा के पास गए। उन्होंने पूछा, “आप यहाँ क्यों बैठे हैं? आपने मेले में क्यों नहीं जाया?”

दादी ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, “बेटा, हमारे लिए हमारी साधना और आदर्शों की प्राथमिकता है। हमें मेले की जरूरत नहीं है, हमारे लिए हमारा ध्यान ही सबसे महत्वपूर्ण है।”

बेटे और बेटी ने दादी-दादा की बातों को समझा और उनके साथ बैठकर ध्यान और साधना की ओर लौटे। वे जान गए कि असली सुख और शांति ध्यान और साधना में है, न कि मेले की भीड़ में।

इसके बाद, वे भी रोज़ाना अपने दादी-दादा के साथ ध्यान और साधना करने लगे और गांव के लोग उनके संयम और आदर्श का पालन करने लगे। इसके साथ ही, वे जान गए कि सच्ची धन-धना एक संयमित और सजीव जीवन में ही होता है।

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देसी कहानी: “प्यार की पहचान

एक छोटे से गाँव में रामु नामक लड़का रहता था। वह गरीब था, लेकिन उसमें आत्मविश्वास और साहस की भरमार थी। वह गाँव के सबसे अच्छे खिलाड़ी में से एक था और क्रिकेट में अपना नाम बनाने के लिए कभी हार नहीं मानता था।

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गाँव की सुंदर सुन्दर लड़कियाँ उसके पीछे पागल हो जाती थीं, लेकिन रामु का दिल सिर्फ एक ही लड़की के लिए धड़कता था, वो थी गाँव की सबसे सीधी सादी सुन्दर लड़की, प्रियंका।

रामु ने एक दिन अपने दोस्त संजय से कह दिया, “यार, मेरा दिल प्रियंका के लिए बेहद प्यार करता है। मुझे उसके साथ अपना जीवन बिताना है।”

संजय मुस्कुराया और कहा, “तू बिल्कुल कर सकता है, पर धीरे-धीरे। पहले उसे दोस्त बना ले, फिर उसको प्रपोज करने का समय आएगा।”

रामु ने संजय की सलाह मान ली और प्रियंका के साथ दोस्ती करने का प्रयास किया। वह उसके साथ समय बिताने लगी, और उनकी दोस्ती दिन-रात मजबूत हो गई।

कुछ महीने बाद, रामु ने अपने दिल की बात प्रियंका से कह दी, “प्रियंका, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?”

प्रियंका थोड़ी देर चुप रही, फिर मुस्कुराई और बोली, “रामु, मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ।”

रामु और प्रियंका का संबंध मजबूत हुआ और वे एक-दूसरे के साथ खुशियों की ओर बढ़े।

समय बीतते बीतते, रामु ने अपने क्रिकेट के प्रयासों में भी सफलता पाई और उसका नाम गाँव के बाहर भी मशहूर हो गया। प्रियंका ने उसे हमेशा साथ दिया और उसके सपनों का समर्थन किया।

इस DesiKahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि प्यार में सफलता पाने के लिए साहस और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है, और संघर्ष के बावजूद सपनों को पूरा करने का साहस हमें हमेशा मिलता है।

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नीता की कठीन परिश्रम की कहानी 

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यह DesiKahani कहानी है एक छोटे से गाँव की, जहाँ का नाम रामपुर था। गाँव में एक गरीब परिवार रहता था, जिसका नाम राजू था। राजू के पास बहुत कम पैसे थे, लेकिन उसमें एक बड़ा सपना था। वह सपना था उसकी बेटी को एक अच्छी शिक्षा दिलाने का।

राजू की बेटी का नाम नीता था। वह बहुत होशियार और पढ़ाई में बहुत ताक़तवर थी। परंतु, पैसों की कमी के कारण वह कभी भी एक अच्छी स्कूल में नहीं पढ़ पाई।

एक दिन, गाँव में एक शिक्षा मेला आयोजित हुआ। इस मेले में विभिन्न स्कूलों के प्रतिनिधित्व था, और वहाँ पर एक स्कूल का प्रिंसिपल भी आया था। राजू ने नीता के साथ मेले का दौरा किया और उन्होंने उस स्कूल के प्रिंसिपल से मिलकर बात की।

प्रिंसिपल ने सुना कि नीता कितनी पढ़ाकू है और उसकी उच्च शिक्षा के लिए उसका सपना है। वह बहुत प्रभावित हुआ और नीता को अपने स्कूल में मुफ्त शिक्षा देने का आलंब दिया।

राजू और नीता बहुत खुश थे। नीता ने अपनी मेहनत और पढ़ाई में लगी और वह उन्नति की ओर बढ़ रही थी। उसके बाद, वह एक बड़े से कॉलेज में पढ़ने गई और अपने सपनों को पूरा किया।

रामपुर गाँव की इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अगर कोई सच्चे दिल से कुछ पाने का सपना देखता है, तो वह अपनी मेहनत और संघर्ष से उसे पूरा कर सकता है। पैसों की कमी होने पर भी, शिक्षा का महत्व कभी भी कम नहीं होता। नीता ने अपने पिता के साथ उस सपने को साकार किया और अच्छी शिक्षा पाई, जो उसके जीवन को बेहतर बनाने में मदद करी।

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गरीब का लडका डाक्टर बना

यह DesiKahani कहानी है एक छोटे से गाँव की, जहां एक गरीब परिवार बसता था। उनके पास एक ही बेटा था, जिसका नाम रामु है। रामु की माँ बहुत मेहनती थी और रोज़ गाँव के खेतों में काम करके जीवन यापन करती थी।

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गाँव का महत्वपूर्ण खेत उनके पास ही था, लेकिन कुछ समय से वह खेत सूखने लगा था। माँ बेहद परेशान थी क्योंकि उसके परिवार का पेट काटने का सिर्फ यही साधना था। उसने रामु से कहा, “रामु, हमारे पास अब और कुछ खाने के लिए नहीं है। हमें कुछ करना होगा।”

रामु ने अपनी माँ की चिंता देखी और वो तय कर बैठा कि वह इस समस्या का समाधान निकालेगा। वो अपने दोस्तों के साथ मिलकर खुदाई करने लगे और वहां खुदाई करते समय उन्होंने एक पुराने खजाने की खोज की।

जब खजाने की खोज विफल रही, तो रामु ने अपने दोस्तों से कहा, “दोस्तों, हमें यह खजाना नहीं मिलेगा। हमारे पास एक और उपाय है। हमें गाँव के लोगों को एक साथ आकर्षित करना होगा।”

रामु ने गाँव के बच्चों के साथ एक नाटक का आयोजन किया। नाटक में गाँव के समस्याओं का परिचय दिया गया और समाधान के रूप में खजाने की बात की गई।

गाँव के लोग नाटक को देखकर हैरान रह गए और उन्होंने रामु और उसके दोस्तों से खजाने के बारे में जानकारी प्राप्त की। वे सभी मिलकर खजाने की खोज में शामिल हो गए।

गाँव के लोगों की मेहनत और एकता के साथ, वे खजाने को खोज निकाले। खजाने के पास वे गरीब परिवार को आर्थिक सहायता मिली और खेतों में पानी का प्रवाह भी बहाल हो गया।

इस DesiKahani कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि मेहनत, साझेदारी, और विश्वास के साथ कोई भी समस्या हल कर सकती है। गरीब परिवार ने अपनी समस्या का समाधान ढूंढा और गाँव के लोगों के साथ मिलकर उसे पुरा किया। इससे समाज में एक सशक्त और मिलजुलकर जीने की मिसाल मिलती है।

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