इस आर्टिकल में लिखी गई मजेदार Latest Desi Kahani से आपके मनोरंजन के साथ-साथ बहुत ही अच्छी शिक्षा मिलेगी।

यह Latest Desi Kahani  बच्चों तथा बड़ों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाली है। अगर आप इस कहानी को पूरी अंत तक पढ़ते हैं तो आपको बहुत ही अच्छी शिक्षा मिलेगी।

Latest Desi Kahani In Hindi

साहस की परिचय।   

एक बार की बात है ।सबर नामक जंगल में बहुत ही सुंदर सुंदर हिरण रहते थे। उन सब में एक सुमति नाम की हिरण थी। और उसकी बेटी सुशीला अभी छह महीना की ही थी। वह हिरण अपनी बेटी सुशीला को अपने साथ जंगल में लेकर के धूमा करती थी।

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साहस का परिचय

एक दिन की बात है सुशीला अपनी मां के साथ जंगल में घूम रही थी। तभी अचानक दो गीदड़ आ पहुंचे।

वे दोनों गीदड़ बेचारी सुशीला को मारकर खाना चाहते थे।

सुशीला की मां सुमति उन दोनों गीदड़ को अपने सिंह से बार-बार चोट करके उन्हें रोक रही थी। मगर गीदड़ मानने को तैयार ही नहीं थी।

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तभी अचानक वहां पर बहुत सारे हिरण का झुंड आ गया। अब वह हिरनी उन गीदड़ को मारने के लिए उसके पीछे दौड़ने लगी। अब दोनों गीदड़ अपनी प्राण बचा कर के वहां से बहुत ही तेज गति से भाग गए।

सुमति और सुशीला का जान आज उसके परिवार ने फिर से बचा लिया।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हम लोग मिलजुल कर रहेंगे तो बड़ी सी बड़ी समस्या का समाधान तुरंत निकल सकता है।

बिच्छू और संत की कहानी


हम लोगों को यह बात पूरी तरह से मालूम है कि बिच्छू का स्वभाव उग्र प्रजाति का होता है। वह सदैव ही दूसरी लोगों को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन संत स्वभाव से बहुत ही शांत होते हैं। संत दूसरों की कल्याण में रुचि रखते हैं।

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बिच्छू और संत की कहानी

एक समय की बात है बरसात का दिन था। एक बिच्छू संत की कुटिया से नाले के रास्ते बहुत ही तेज गति से बहते हुए जा रहा था। तभी संत ने अचानक बिच्छू को नाली से बहता देख लिया।

संत ने उसे अपने हाथ से पकड़ कर के नाली से बाहर निकाल दिया।

वह बिच्छू ने तुरंत अपनी स्वभाव के कारण संत को तुरंत डंक मारा और फिर नाली में गिर गया।

उसे संत ने बिच्छू को फिर से अपने हाथ से निकला। वह बिच्छू ने फिर से साधु को डंक मारा।

यह प्रक्रिया लगभग तीन से चार बार हुआ।

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संत की कुटिया के पास वैधराज का घर था । वह यह सब बड़े ही ध्यान से देख रहे थे। यह देख वैधराज तुरंत दौड़ करके आए । और वह एक डंडे के सहारे उस बिच्छू को दूर फेंक दिया।

वैधराज जी ने संत से कहा – यह बात आपको भली-भांति मालूम है कि बिच्छू का स्वभाव हमेशा नुकसान पहुंचाना ही होता है।

लेकिन फिर भी आपने उसे अपने हाथ से बचाया। आप ऐसा क्यों कर रहे थे महात्मा ”

संत ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया की बिच्छू अपना स्वभाव नहीं बदल सकता है।तो मैं भी अपना स्वभाव कैसे बदल सकता हूं।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कितनी भी कठिनाई स्थिति हो हमें उसमें अपनी स्वभाव को नहीं बदलना चाहिए हमें प्रकृति के अनुसार अच्छे कर्मों पर चलना चाहिए।

सच्ची मित्रता


मुनावर के जंगल में दो बहुत ही शक्तिशाली से शूरवीर और सिंहराज रहते थे। शूरवीर अब धीरे-धीरे बुड्ढा हो चला था। जिसके कारण अब वह अधिक शिकार नहीं कर पाता था।

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सिंह राज उसके लिए शिकार करता और भोजन ला करके देता था। सिंह राज जब शिकार पर निकलता,, तो उस समय शूरवीर अकेला हो जाता था।

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सच्ची कहानी

पहले डर के मारे उसके पास कोई जानवर नहीं जाते थे।

लेकिन एक दिन एक सियार का झुंड ने शूरवीर शेर को अकेला देख करके उसे पर टूट पड़े। आज सियार के झुंड को बड़ा शिकार मिला था।

थोड़े ही देर में सियार के झुंड ने चारों तरफ से नोच नोच कर शूरवीर शेर को घायल कर दिया था। अब वह बेहोश की हालत में हो गया।

तब भी अचानक सिंह राज वहां पर दहाड़ते हुए पहुंचा। सिंहराज को वहां आते देख सियार के झुंड पूरी तरह से वहां से भाग निकले। जिसके कारण उसके मित्र शूरवीर शेर का जान बच सका।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची मित्रता हमेशा काम आती है इसलिए सभी को एक सच्चे मित्र की आवश्यकता जरूर होता है।

कलुआ को मिला सजा


एक समय की बात है सोनपुर गांव में कलुआ नाम का एक कुत्ता रहता था। कलुआ से उसे गांव के गली के सभी लोग परेशान थे।

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कलुआ को मिली सजा

वह गली से निकलने वाले सभी लोगों को वह भो – भो करके डरता था। वह कभी काटने दौड़ता था। डर के कारण उसे गली में बच्चे अकेले जाना छोड़ चुके थे।

अगर कोई भी बच्चा गलती से भी उस गली में निकल जाता था। तो वह कुत्ता उसके हाथों से खाने की चीज को छिन कर भाग जाता था।

वह कलुआ ने अपने दोस्तों को भी परेशान किया हुआ था।

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वह कलुआ वहा पर सभी को डरा कर वहा का अपने आप को डॉन समझता था। लेकीन उसके झुंड़ में एक छोटा मोती नाम का भी कुत्ता था।

वह मोती कुत्ता किसी को भी परेशान नहीं करता था। वहां के सभी बच्चे भी उससे बहुत ही ज्यादा प्यार करते थे।

एक दिन मोती को सोहन ने एक रोटी लाकर दिया।

मोती बहुत ही ज्यादा खुश हुआ। वह उस रोटी को लेकर गाड़ी के नीचे चला गया। और वहीं पर बैठकर के बड़े ही चाव से खाने लगा।

कलुआ ने मोती को रोटी खाता हुआ देख बहुत ही जोर से झपट मारा और रोटी को लेकर के भाग गया।

मोती कुत्ता अब जोर – जोर से वहीं पर शिष्कारी भरने लगा।

यह बात सोहन ने अपने पापा को बताया। सोहन के पापा कलुआ के इस हरकत को बहुत ही अच्छी तरह से जानते थे। वह पहले भी उसे देख चुके थे।

उस समय सोहन के पापा को बहुत ही ज्यादा गुस्सा आया था लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया।

सोहन के पापा ने कमरे से एक लाठी निकला और फिर कलुआ की धुनाई कर दिया उसके बाद से कलुआ की पूरी तरह से नानी याद आ गई और यह सब करना हुआ छोड़ दिया।

इसके बाद से कलुआ इतना सुधर गया कि उस गली से जाने वाले किसी भी बच्चे को या किसी को भी परेशान नहीं करता था। यहां तक कि वह जब किसी छोटे बच्चे को भी देखता था तो छुप जाता था ताकि उसे कोई मारे नहीं।

इस Latest Desi Kahaniकहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बुरे कामों का नतीजा बुरा ही होता है इसलिए हमें बुरे काम करने से बचना चाहिए तभी हम एक सफल व्यक्ति बन सकते हैं।

बुलबुल के बच्चें


यह बात हम सभी लोगों को मालूम है कि हर बच्चे की सबसे पसंदीदा और प्यारी पक्षी उनके घर में लगाने वाली घोंसला गौरैया ही होती है।

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बुलबुल के बच्चे

उन लोगों के घर में दाना पानी मिलता है। इसलिए उन लोगों के घर में वह रहती है।

एक समय की बात है एक गौरैया ने AC के पीछे एक बहुत ही प्यारी घोंसला बनाया था। उसमें उसके तीन बच्चे खेल रहे थे। वे सभी उड़ना अभी नहीं जानते थे।

एक दिन की बात है। बुलबुल के बच्चों ने उड़ने के लिए अपनी मां को तंग कर दिया। वह बुलबुल रहती है कि तुम लोग थोड़ा और बड़ी हो जाओ। तब तुम्हें आकाश में उड़ना सिखाएंगे।

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वह सभी बच्चे ची ची ची ची ची ची करके बुलबुल को परेशान करते थे। कुछ दिन बाद बुलबुल ने उन बच्चों को उड़ाने के लिए कहा।

बुलबुल ने उनको अपने दोनों में हाथों में पकड़ कर के आसमान में ले गई। और उन्हें वहां से छोड़ दिया। फिर वह धीरे-धीरे उड़ने लगे।

जब बच्चे धीरे-धीरे गिरने लगते थे तो बुलबुल उन्हें अपनी पीठ पर बैठा लेती थी। और फिर आकाश में ले जाकर के उड़ने के लिए कहते थी।

ऐसा करते करते बुलबुल के बच्चे कुछ ही समय में उड़ना सीख लिए और आसानी से उड़ने भी लगे थे।

फिर बुलबुल चिड़िया ने सभी को अपने घर आने के लिए कहा – वह सभी बच्चे बुलबुल के पीछे उड़ते हुए घर चले आए।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अभ्यास किसी भी सफलता की पहली सीढ़ी होती है अगर आप किसी भी सफलता को अपने चाहते हैं तो उसके लिए निरंतर प्रयास कीजिए अभ्यास कीजिए तब आप जरुर सफल होंगे अपने जीवन में और उसे हासिल कर लेंगे।

सुरेश की समझदारी


सोमनपुर नामक गांव में कुछ लोग बहुत ही तेजी से बीमारी का शिकार हो रहे थे। डॉक्टर ने उन सभी के बीमारी का कारण मक्खी को बताया। वे लोग देखे की सोमनपुर में जो एक कूड़ेदान है।

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सुरेश की समझदारी

उस पर बहुत सारी मक्खियां गंदगी फैलाते हुए बैठती है। और उड़कर लोगों के घरों घरों में जाती थी। और कुछ लोगों के घरों के खाने को गंदा कर देती थी।

उन सभी खाने को लोग खा करके बहुत ही ज्यादा बीमार हो रहे थे उस समय सुरेश पांच क्लास में पढ़ रहा था।

दूसरे दिन उसकी मैडम ने मक्खियों से फैलने वाली बीमारियों के बारे में बताया। अब सुरेश ने वहां से मक्खियों को भगाने का अपने मन में ठान लिया।

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सुरेश अपने घर गया और मैडम के द्वारा बताई हुई मक्खियों के बारे में जो बीमारी है और उन्हें कैसे दूर किया जाए इसके बारे में पूरी विस्तार से बताया। और कहा कि यह हमारे घर को गंदा कर देती है जिसके कारण हमारे गांव में लोग बहुत ही ज्यादा बीमार हो रहे हैं।

यह हमारे घर में गंदगी फैलाता है।इसलिए इसे हमारे घर से भागना चाहिए। उसी दिन सुरेश ने बाजार से फिनायल लेकर के आया।

फेनाइल की पानी से अपने घर को बहुत ही अच्छी तरह से साफ किया। अपनी रसोई घर के खाने को ढकवा दिया था।

आप सुरेश के घर में मक्खियों को खाना नहीं मिल पाया जिसके कारण दो-तीन दिन में वहां से सभी मक्खी चली गई। उसके बाद से कभी भी मक्खियां उसके घर नहीं आई।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें स्वयं की स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए तात्पर्य रहना चाहिए और अपने आसपास सफाई पर पूरी तरह से ध्यान देनी चाहिए।

बलशाली कछुए की मूर्खता


एक सोमवती नाम के सरोवर में नील मदन नाम का एक बड़ा कछुआ रहता था। उस कछुए का कवच बहुत ही मजबूत था। उसकी यह कवच उसके शत्रुओं से बचाता था। बहुत ही बार उसकी जान उसे कवच के कारण बचा था।

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बलशाली कछुआ की कहानी

एक दिन की बात है। एक भैंस उस तालाब में पानी पीने के लिए आई थी। उस भैंस का पैर कछुआ पर पड़ गया। उसके बावजूद भी उसे कछुए को कुछ नहीं हुआ।

उस कछुए की जान उसकी अपनी कवच से बच गई। उसे इस बात की काफी खुशी हुई। क्योंकि बार-बार उस कवच की वजह से उसकी जान बच रही थी।

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लेकिन यह कवच कछुआ को कुछ दिनों बाद भारी लगने लगा। उसने सोचा कि अब हमें इस कवच से बाहर निकाल करके जिंदगी जीना चाहिए।

वह कछुआ ने अपने मन में सोचा कि अब मैं बलवान हो गया हूं। और मुझे शायद इस कवच की जरूरत नहीं है।

वह कछुआ अगले ही दिन अपनी कवच को नदी में छोड़कर के आसपास घूमने लगा।

तभी अचानक एक हिरण का झुंड उसे तालाब में पानी पीने के लिए आया था। और उन सभी हिरन के साथ उनके छोटे-छोटे बच्चे भी सरोवर में पानी पीने के लिए आए थे।

उन हिरण के बच्चे के पैरों से उस कछुए को चोट लग गई और वह रोने लगा। वह कछुआ आज अपनी कवच को नहीं पहना था। जिसकी वजह से उसे चोट काफी जोर से लग गई थी।

वह कछुआ रोता – रोता अपनी तालाब में गया ।और अपनी कवच को फिर से पहन लिया। कछुआ ने सोचा कि कम से कम कवच से हमारी जान तो सुरक्षित रहती है।

इसLatest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि प्रकृति से मिली हुई हमें सभी चीजों को बहुत ही ध्यान पूर्वक उसे धारण करना चाहिए और उसके नियमों के अनुसार चलना चाहिए।

नहीं तो हमारी जान खतरे में पड़ सकती है। या फिर उसकी वजह से हम अपनी जान गवा भी सकते हैं

इसलिए हमें प्रकृति की नियमों का पालन करना चाहिए।

सोनू का मित्र


सोनू मुख्यता 5 क्लास में पढ़ता था। वह अपने साथ स्कूल हमेशा दो रोटी लेकर के जाता था। सोनू के स्कूल के रास्ते में मंदिर के पास एक छोटी सी गाय रहती थी। सोनू वह दोनों रोटी को उसे गाय को खिलाया करता था।

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सोनू का मित्र प्यारी गाय

सोनू कभी भी गाय को रोटी खिलाना नहीं भूलता था। कभी-कभी तो उसके स्कूल की लेट हो जाती थी लेकिन फिर भी वह उस गाय के लिए दो रोटी ले जाना नहीं बोलता था।

सोनू के स्कूल में लेट पहुंचने पर कभी-कभी उसकी मैडम उसको बहुत ज्यादा डराती भी थी। इसके लिए मैं तुम्हें कड़ी से कड़ी सजा दूंगी।

वह गए इतनी प्यारी थी। कि सोनू को देखकर के वह बहुत ही ज्यादा खुश हो जाती थी।

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सोनू भी अपने हाथों से उसे रोज रोटियां खिलाया करता था। जिसके कारण वे दोनों एक बहुत ही अच्छे दोस्त भी बन गए थे।

एक दिन की बात है। कि सोनू बाजार से सामान ले कर के लौट रहा था। तभी उसी मंदिर के सामने कुछ लड़कों ने उसे पकड़ लिया।

वह सभी बच्चे सोनू से उसके सामान को छीन रहे थे। यह सब वह गाय देखकर उन सभी बच्चों को मारने के लिए दौड़ी।

वह गाय को अपनी ओर आता देख सोनू को परेशान करने वाले सभी लड़के बहुत ही तेजी से वहां से भाग गए।

सोनू ने उस गाय को गले लगाया और बचाने के लिए धन्यवाद कहा और बाजार से लाए हुए कुछ खीरा को उस गाय को खिलाया।

शिक्षा:

  •               सच्ची मित्रता सदैव वही सुखद होती है।
  •              निस्वार्थ भाव से हर व्यक्ति को किसी से मित्रता करनी चाहिए क्योंकि वही मित्र संकट में आपका काम आता है

मोनी की शक्ति


मोनी एक चिट्ठी का नाम है। वह अपने दिल से बिछड़ गई थी। रास्ता नहीं मिलने के कारण, वह काफी देर से परेशान हो रही थी।

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मोनी को सक्ति

मोनी के घर वाले एक जगह से दूसरी जगह भोजन की तलाश करने के लिए जा रहे थे। लेकिन तभी अचानक तेजी से हवा बही और वे सभी हवा में उड़ कर के बिखर गए।

इसी वजह से मोहनी भी अपने घर से दूर हो गई थी और वह अपने घर का रास्ता ढूंढने में पूरी परेशान थी।

काफी देर से वह भटक चुकी थी। और ज्यादा घूमने के कारण उसे भूख तथा प्यास भी लग गई। अब मनी बहुत ही जोर से रोती हुई जा रही थी।

रास्ते में उसे मोनू की जेब से घिरी हुई टॉफी अचानक मिल गए। अब मोनी के भाग्य खुल गए। उसे बहुत ही जोर से भूख लग रही थी और खाने के लिए उसे चॉकलेट मिल गया। मोनी ने पूरे जी भर के उसे चॉकलेट को खाया । फिर उसका पेट भर गया।

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तभी मोनी को ख्याल आया कि मैं इस टॉफी को अपने घर ले चलता हूं जिससे मेरे घर वाले भी खाएंगे।

वह चॉकलेट काफी बड़ी थी। मोनी उठाने की कोशिश करती लेकिन गिर जाती थी। फिर भी मोनी ने हिम्मत नहीं हारा। वह अपने दोनों हाथ और मुंह से पूरी मजबूती के साथ उसे पकड़ लेती है।

उसे चॉकलेट को घसीटते – घसीटते हुए लेकर के अपने घर पहुंच गई। उसके मम्मी – पापा तथा भाई – बहनों ने देखा। तो वे लोग भी दौड़ कर आ गए। उसे पूरी चॉकलेट को उठाकर के अपने घर ले गए।

फिर क्या था ? सभी की पार्टी शुरू हो गई सभी ने जी भर के पार्टी किया।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमारी लक्ष्य कितना भी बड़ा हो। लेकिन हमें निरंतर प्रयास करने से सफलता जरूर मिलती है।

   मां की ममता


सोनपुर गांव के एक बगीचे में जामुन के पेड़ पर सुशीला नाम की एक पक्षी ने अपना घोंसला बनाया हुआ था वह घोंसले बहुत ही सुंदर था।

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चिड़िया मां की ममता

कुछ प्यारी सी सुंदर घोंसले में वह चिड़िया अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहती थी । उसे प्यारी सी चिड़िया के बच्चे अभी उड़ाना नहीं जानते थे इसलिए वह चिड़िया रोज उन लोगों के लिए खाना लाकर के खिलाती थी।

एक दिन की बात है बरसात बहुत ही जोर से हो रही थी और सुशीला के बच्चों को बहुत ही जोर से भूख भी लग रहा था। उसके बच्चे बहुत ही जोर से रोने लगे।

इतना जोर से रो रहे थे । कि देखते ही देखते उसके सभी बच्चे जोर — जोर से रोने लगे। सुशील को अपने बच्चों का देख रोना अच्छा नहीं लग रहा था। सुशीला उन्हें चुप कराने की कोशिश कर रही थी। लेकिन उसके बच्चे भूख से तड़प रहे थे इसलिए वे चुप नहीं हो रहे थे।

अब सुशीला दुविधा में पहुंच गई ।कि आप इतनी तेज बारिश में मैं खाना कहां से लाऊंगा। अगर मैं जाकर के खाना नहीं लाया । तो अपने बच्चों का भूख कैसे शांत करूंगा।

काफी देर सोचने के बाद से सुशीला ने एक लंबी उड़ान भरी और जाकर के शर्मा जी के घर पर बैठी। शर्मा जी को प्रसाद में मिले हुए चावल और दाल तथा फलों को अपने आंगन में रखे हुए थे।

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चिड़िया ने देखा और अपने पुरी मुंह भर के अपने बच्चों के लिए दाने ले लिया। और फिर वहां से तुरंत उड़ गई।

वह चिड़िया घोंसला में पहुंचकर अपने सभी बच्चे को चावल के दाना खिलाया। उसके सभी बच्चों का पेट भर गया वह सभी चुप हो गए। और फिर आपस में सभी खेलने लगे।

शिक्षा :

यह Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि संसार में मां की ममता का कोई हिसाब नहीं है वह अपनी जान जोखी में डालकर भी अपने बच्चों का ख्याल और उसकी पेट भरने में पूरी कोशिश करती है इसलिए मन की ममता को महान बताया गया है।

मित्र का महत्व


एक बार मोहन गर्मी की छुट्टियों में अपने नानी के घर जाता हैं। वहा पर मोहन को खूब खेलने को मिलता था। उसे यहां पर खूब मजा आता था।

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मित्र का महत्व

मोहन के नानी के यहां एक बहुत ही प्यारी आम के बगीचे का पेड़ था। वहा पर मोहन बहुत सारी आम खाता था। और फिर वही पर खेलता भी है। उसके पांच मित्र भी है। लेकीन मोहन उन्हें आम नहीं खिलाता था।

एक दिन की बात है। मोहन को खेलते – खेलते चोट लग गई। फिर मोहन के दोस्तों ने मोहन को उसके घर पहुंचाया। और फिर उसे उसके मम्मी से चोट लगने की बात बताई।

उसकी मां ने सभी को सहायता करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद दिया। और फ़िर मोहन की अच्छी से चोट की जगह पर मालिश हुआ।

फिर मोहन की मां ने खुश होकर उन सभी बच्चों को जी भर आम खिलाया। फिर मोहन की सहायता के लिए धन्यवाद दिया।

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फिर मोहन जब ठीक हुआ तक उसे मित्र का महत्व के बारे में आभास हुआ। अब वह अपने सभी मित्रों के साथ खेलता था और उन्हें बहुत सारे आम भी खिलाता था।

शिक्षा :Latest Desi Kahani

इस Latest Desi Kahani कहानी में हमें यह शिक्षा मिलती है कि मित्र हमारी सुख और दुःख में सच्ची साथी होते हैं। उनसे प्यार करना चाहिए। उनसे कोई भी बात छुपाना नहीं चाहिए।

सोहन प्यारे खरगोश


सोनवर नाम के गांव में सोहन नाम का एक बहुत ही प्यारा लड़का रहता था वह पांचवी कक्षा में पढ़ता था। उसके पास बहुत ही प्यारे-प्यारे तीन खरगोश थे। सोहन अपने खरगोश से बहुत ही ज्यादा प्यार करता था।

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सोहन और प्यारे कछुआ

सोहन स्कूल जाने से पहले हमेशा अपने कॉलोनी के पार्क से हरि हरि डुब नरम – नरम पतियों को ला करके अपने प्यारे खरगोशों को दे देता था। वे सभी इन हरी हरी पत्तियों को खाकर खुश हो जाते थे।

उसके बाद से फिर सोहन स्कूल जाता था। वह स्कूल से आते वक्त भी अपने प्यारे खरगोश के लिए हरि हरि बहुत ही सुंदर घास की नरम – नरम पत्तियों को लाता था।

एक दिन की बात है। सोहन को स्कूल के लिए लेट हो रही थी इसलिए वह घास नहीं ला सका ,, और वह स्कूल चला गया।

जब सोहन स्कूल से घर आया तो खरगोश उसके अपने घर में नहीं थे। सोहन परेशान होकर उन सभी खरगोश को खूब ढूंढा अपने आसपास के सभी लोगों से वह पूछा लेकिन फिर भी नहीं मिले।

अब सोहन उदास हो गया रो-रो करके उसकी आंखें लाल हो गई थी। फिर वह अपने कॉलोनी के पार्क में बैठकर के रोने लगा। तभी देखा है कि उसके तीनों खरगोश पार्क के दूसरी साइड जाकर के नरम – नरम घास की पत्तियों का रहे थे। और सभी आपस में खेल रहे थे।

सोहन इस बात को समझ गया कि इन सभी को भूख लगी थी। इसलिए यह इस पार्क में आए हुए थे । अपनी भूख को शांत करने के लिए।

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मुझे तो भूख लगती है । तो मैं मां से खाना मांग लेता हूं। लेकिन इन प्यारे मेरे सभी खरगोशों के अभी मां तो भी नहीं है। इस बात पर सोहन बहुत ही ज्यादा दु:खी भी हुआ लेकिन खुशी इस बात की थी कि उसके सभी प्यारे खरगोश मिल चुके थे।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जो लोग दूसरों की दर्द को समझते हैं उन्हें किसी भी प्रकार की दुख छू नहीं सकता है और वह हमेशा सदैव शांत स्वभाव के होते हैं।

बिल्ली की जान बच गया


गोलू और सोनू दोनों भाई थे। वे दोनों पढ़ाई करते थे । और आपस में बहुत ही ज्यादा लड़ाई भी करते थे। 1 दिन की बात है दोनों अपने घर के बाहर खेल रहे थे तभी उनके घर के सामने वाले घर में बिल्ली के 2 बच्चे छोटे-छोटे थे।

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बिल्ली की बच्चा बच जाए

उन दोनों बिल्लियों की मां कहीं पर गई हुई थी। और वह दोनों बिल्ली के बच्चे बहुत ही भूखे थे। वे दोनों बिल्ली के बच्चे भूख लगने की वजह से रो रहे थे।

उन दोनों बच्चे की रोने की आवाज गोलू तथा सोनू को सुनाई पड़ा। फिर वे दोनों अपने दादी जी को बुला करके लाए

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उनकी दादी ने देखा कि बिल्ली की दोनों बच्चे बहुत ही ज्यादा भूखे हैं । इसलिए वे दोनों बच्चों को बहुत ही प्यार से खाना खिलाया। और एक कटोरी से दूध भी पिलाई।

अब उन दोनों बिल्ली के बच्चों की भूख शांत हो गई थी। वह आपस में खेल रहे थे। इसे देख करके सोनू और मोनू ने कहा इन दोनों बिल्ली की बच्चों की जान बच गई। इस प्यारी सी काम के लिए दादी जी ने सोनू तथा गोलू को शाबाशी दिया।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी दूसरे की भलाई करने से जो खुशी मिलती है ना वह बहुत ही आनंदपूर्ण होती है इसलिए हमें सदैव किसी दूसरे की सहायता करनी चाहिए दयालु स्वभाव का होना चाहिए।

बदमाश चूहा


श्याम के घर में कहीं से बाहर से एक बदमाश चूहा आ गया था। वह बदमाश चूहा बहुत छोटा सा था लेकिन पूरे घर में इधर-उधर भागता रहता था। उसने श्याम की किताब भी कुतर – कुतर के बर्बाद कर दिया था।

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बदमाश चूहा की कहानी

वह चूहा श्याम के किताब के साथ-साथ उसके कुछ कपड़े भी काट दिए थे। श्याम की मम्मी रोज खाना बनाती थी । तो वह बिना ढके हुए रख देती थी। वह चूहा उसे भी खा लिया करता था।

अब वह चूहा खा – पी करके धीरे-धीरे बड़ा हो चुका था। एक दिन की बात है। श्याम की मम्मी ने एक बोतल में शरबत बना करके रखा हुआ था। तभी उसे बदमाश चूहे की नजर उस पर पड़ गई। हुआ चूहा बहुत प्रकार की कोशिश करते हुए थक गया। उसे वह शरबत पीना था।

वह चूहा धीरे से बोतल पर चढ़ा और ढक्कन को खोलते – खोलते,खोलने में सफल हो गया। अब चूहा उसे बोतल में अपना मुंह डालने का प्रयास कर रहा। उसे बोतल का मुंह छोटा होने की वजह से उसमें उसका मुंह नहीं गया।

लेकिन तब भी चूहे को एक आइडिया आया उसने तुरंत अपनी पूछ को उस बोतल में डाल दिया। जब उसकी पूंछ शरबत से गीली हो जाती तब उसे वह चाट चाट करके चूहा अपना पेट भर लिया। अब वह चूहा श्याम के तकिए के नीचे बना हुआ अपने घर के पास जाकर के आराम करने लगा।

इस छोटी सी चूहे की Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें बार-बार कोशिश करने से कोई भी कठिन कार्य जरूर सफल होता है इसलिए हमें निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

रेलगाड़ी


सुनिधि बहुत ही प्यारी लड़की थी वह कक्षा चार में पढ़ती थी। सुनिधि को अपनी किताब पढ़ते वक्त उस किताब में रेलगाड़ी का चित्र दिखा।

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रेलगाड़ी का चित्र

अब सुनिधि को अपनी रेल यात्रा याद आ गई। जो कुछ ही दिन पहले वह अपने मम्मी-पापा के साथ वह प्यारी सी यात्रा किया था।

सुनिधि ने अपनी चौंक उठाया।फिर क्या बात था। उसने बहुत ही प्यारी दीवार पर रेलगाड़ी का इंजन बना दिया। और फिर सुनिधि धीरे-धीरे, पहले डब्बा बनाया। फिर दूसरा डब्बा बनाया। और बनाते बनाते बहुत सारे डब्बे उसे बना करके तैयार कर दी।

जब सुनिधि की चौक खत्म हुई तब वह उठी और देखा कि पूरी आधी दीवार पर रेलगाड़ी का चित्र बना दिया था। और वह चित्र बहुत ही सुंदर लग रहे थे। फिर क्या हुआ।

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वह अपने रेलगाड़ी की चित्र में यह दर्शाया कि मेरी रेलगाड़ी पटना गई, मुंबई गई ,दिल्ली गई ,पूना गई ,बेंगलुरु गई जापान गई, और वह ट्रेन उसके नानी के घर भी गई वहां से उसके दादी के घर भी गई और भी बहुत सारे वह उसमें दर्शा दिए।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आप अपने बच्चों के मनोबल को बधाई कल के भविष्य की शुरुआत उनके मनोबल बढ़कर के आज से ही कर सकते हैं।

शेर का सिंहासन


एक समय की बात है पुरान नाम का एक जंगल था। इस जंगल का शेर जंगल का राजा था। वह अक्सर अपनी जंगल में सभी जानवरों को डराता रहता था। वह शेर बहुत ही भयंकर और शक्तिशाली था।

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शेर का सिघासन

एक दिन की बात है।जंगल के पास के नगर के राजा बाहर घूमने के लिए निकला था। और वह हाथी पर अपनी आसन लगाए हुए यात्रा कर रहा था। आप शेर के भी मन में हाथी पर आसन लगाकर के बैठने की बात दिमाग में आया।

फिर क्या बात हुआ । शेर ने तुरंत जंगल के सभी जानवरों को आदेश दिया कि उसके लिए एक सुंदर हाथी पर आसन की व्यवस्था किया जाए। शेर तुरंत झट से छलांग लगाया और उसे हाथी के आसन पर जाकर के बैठ गया।

अब जैसे ही वह हाथी आगे चलती है। आसान हिल जाता है। और उस समय शेर नीचे बहुत ही तेजी से गिर पड़ा।

गिरने की वजह से शेर की टांग टूट गई और वह शेर धीरे से खड़ा हुआ और कहने लगा। मेरे सभी प्यारे मित्रों हमें पैदल चलना ही अच्छा रहता है।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जो जिसका काम होता है उसी को करना चाहिए अगर हम उसकी नकल करते हैं तो उसका परिणाम गलत होता है और बहुत बुरा परिणाम निकलता है।

  मुर्गा की अक्कल ठिकाने लगी


सोमवती गांव में एक समय की बात है । बहुत सारे वहां पर मुर्गा रहते थे। उसे गांव की किसी एक बच्चे ने उन सभी मुर्गों में से एक को बहुत ही ज्यादा परेशान कर दिया था। उन सभी मुर्गों ने यह तय किया कि अगले दिन हम आवाज नहीं निकलेंगे।

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मुर्गा का घमंड

जब सब सोते रहेंगे,” तब उनकी या बात समझ में आएगी । कि मेरी अहमियत क्या है। फिर उसके बाद वे लोग मुझे तंग नहीं करेंगे। वह मुर्गा अगले दिन सुबह नहीं बोला ” लेकिन फिर भी सभी लोग सुबह

सुबह उठकर अपने – अपने काम में लग गए।

फिर मुर्गा को यह बात समझ में आया कि किसी के बिना कोई भी काम नहीं रुकता है। सबका काम समय आने पर बरोबर चलता ही रहता है।

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी अपने आप पर घमंड नहीं करना चाहिए। हमारी अहमियत कभी भी लोगों को बिना बताए समझ में आती है।

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अपने गलती का एहसास


चक्धर्मनाथ नामक गांव में एक संजय नाम का व्यक्ती रहता था। उसके पास उसके पास पांच गाय, एक भैंस तथा दो बकरिया थी। वह अपनी भैंस का दिनभर देखभाल करता था। उस भैंस के लिए वह दूर – दूर से नरम – नरम हरी घास लाया करता था। संजय के गाय और भैंस उसके सेवा से पुरी तरह खुश रहते थे।

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अपने गलती का एहसास होना

सुबह और शाम इतना दूध हो जाया करता था। की संजय का परिवार उस दूध को बेचने के लिए मजबूर हो जाया करते थे।

अब धीरे – धीरे पुरे गांव में संजय के घर का दुध बिकने लगा।

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अब धीरे – धीरे संजय को काम करने में और भी अच्छा लगने लगा। बल्कि दूध को बेच कर उसके घर की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही थी।

लेकीन कुछ समय बाद संजय थोड़ा बहुत परेशान होने लगा। क्योंकि संजय के घर में एक बड़ी सी बिल्ली ने उनके घर में नजर रखने लगी। संजय जब भी दुध को अपने रसोई घर में रख कर जाता था। वह बिल्ली उस दुध को पी जाती थीं। नहीं तो वह उसे झूठा कर देती थी।

संजय ने बहुत ही बार उस बिल्ली को भगाने की कोशिश किया। और उसे मारने के लिए भी दौड़ाया, लेकीन वह बिल्ली तुंरत वहा से दीवार टप कर भाग जाती थीं।

एक दिन संजय ने बहुत परेशान होने के बाद उस बिल्ली को सबक सिखाने की बात सोची। संजय ने अपने रसोई घर में जुट की जाल को लगा दिया। बिल्ली उस में आसानी से आकर फस गई।

अब क्या था। बिल्ली के इतना परेशान करने के लिए सबसे पहले उसने उसकी पिटाई करने की बात सोचा। इधर वह बिल्ली इतना जोर – जोर से झपट रही थी कि संजय उसके पास नहीं जा सका।

लेकीन संजय ने आज उस बिल्ली को सबक सिखाने का निर्णय ले लिया था। तभी संजय ने एक माचिस की तिल्ली जलाया। और उस बिल्ली के उपर लगे हुए बोरे पर फेक दिया।

अब देखते ही देखते वह बोरा बहुत ही तेजी से जलने लगा। अब बिल्ली को गरमाहट महसूस हुआ। इसलिए बिल्ली अब अपनी जान बचाने के लिए पुरी सक्ति के साथ भागने लगी।

अब वह बिल्ली जिधर – जिधर भागती थी। वह आग लगा बोरा भी उसके पीछे – पीछे जाता था। देखते ही देखते वह बिल्ली पुरा गांव में भागने लगी अपनी जान बचाने के लिए।

लेकीन इधर अब पूरे गांव में आग लग गई। अब सभी लोग आग लगा……… आग लगा…. कहते हुए उसने अपनी अपनी घर के आग बुझाने में लग गए। इस तरह लोग कहने लगे कि वह बिल्ली ने पुरे गांव को जला दिया।

अब आग लगने के कारण संजय की सभी गाय तथा भैंस और बकरिया जल कर भस्म हो गई। और उसका भी घर पूरी तरह जल गया।

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आवेग और स्वंय गलती का फल हमें खुद तो भोगना ही पड़ता है। लेकिन उसके साथ-साथ दूसरे लोगों को भी उसकी सजा भुगतना पड़ती है।

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मनु की चोट पर हुई किसका पिटाई


रामपुर गांव में मोनू और सोनू नाम के दोनों भाई थे। सोनू मोनू से ढाई साल बाद था। वे दोनों भाई एक ही स्कूल में पढ़ते थे। वे दोनों रोज के दिन एक ही साथ स्कूल जाते थे और एक ही साथ वापस अपने घर आते थे।

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मनु की चोट पर हुई पिटाई

एक दिन की बात है मोनू अपने दोस्तों के साथ – साथ अपनी तेज कदमों के साथ घर को लौट रहा था। तभी अचानक मोनू का पैर एक पत्थर से टकरा गया। मोनू के कंधे पर किताब और काफी का बोझ लदा था। जिसकी वजह से वह अपने आप को संभाल नहीं पाया और गिर गया।

मोनू को गिरने के बाद से चोट लग गई थी। और उसका घटना पूरी तरह से छिल गया …….. जिसकी वजह से मोनू जोर – जोर से रोने लगा।

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पीछे से सोनू आ रहा था। उसने तुरंत दौड़ा, और अपने भाई को झट से उठाया। सोनू समझदार था उसने मोनू को समझने की कोशिश किया । लेकिन वह नहीं समझ रहा था और वह रो रहा था।

तभी तुरंत सोनू को एक ख्याल आया। और उसने जहां पर मा गिरा था । वहां पर चार पांच लाख जोर-जोर से मारा। और फिर मोनू को कहा को देख लो इसने तुम्हें चोट लगाया था। मैंने भी इसे बहुत चोट लगा दिया। मोनू अब सोच में पड़ गया और उसने भी 1012 लात उस जगह पर मारी।

उसके और दोस्त से वह भी उस सड़क पर वही उछलने लगे। जिसकी वजह से सड़क को और ज्यादा चोट लग गई।

बस क्या था ” आप धीरे-धीरे या सभी लड़कों के लिए मनोरंजन का साधन हो गया। कुछ देर बाद सभी लड़के वहां से जा चुके थे और जब भी आते थे। उसे जगह पर हमेशा उछलते थे और कूदते थे। और मनोरंजन करते थे जिस मा बहुत ही ज्यादा हंसना था। कि इसकी पिटाई रोज-रोज हो रही है।

घर पहुंच करके सोनू ने मोनू के घुटने में लगी चोट को दिखाया। व्हाट डिटॉल तथा साफ पानी से उसे घाव को अच्छी तरह साफ किया।

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि समय-समय पर लिया गया निर्णय ही सर्वदा सत्य होता है और सही भी होता है।

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नन्ही चिड़िया


बहुत समय पहले की बात है कड़ी नामक एक बहुत घना जंगल हुआ करता था।एक बार किसी वजह से उस जंगल में बहुत ही भीषण आग लग गई। जंगल में इतनी भीषण आग लगा देखकर के सभी जानवर इधर-उधर भागने लगे। सभी सोचने लगे कि अब क्या होगा।

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प्यारी नन्ही चिड़िया की कहानी

थोड़े ही देर में आज और ही तेज होने लगी। यह देखकर के फिर सभी जानवरों में भगदड़ मच गई वह सब फिर से इधर-उधर भागने लगे। जंगल में उपस्थित जानवर सभी अपनी अपनी जान को बचाने में लगे हुए थे।

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उस जंगल में मधु नाम की एक बहुत ही प्यारी नन्ही चिड़िया रहती थी। उसने देखा कि सभी जानवर भयभीत है जंगल में आज भी लगी है। तो इसलिए मुझे इन लोगों की सहायता करनी चाहिए।

इस बात को सोच कर के वह नन्ही सी चिड़िया पास के नदी में गई और अपनी सोच में पानी भरकर के लाई और उसे आग में डालने लगी। वह नन्ही सी चिड़िया बार-बार नदी जा कर के अपने जोर से पानी लाती थी और आग पर डालती थी।

तभी उसके पास से ही एक कबूतर गुजर रहा था। उसने नन्ही सी चिड़िया की इस हरकत को देखा और मन ही मन सोचने लगा कि यह नन्ही सी चिड़िया कितनी मुर्ख है। जंगल की इतनी भीषण आग को यह अपनी सोच के पानी से कैसे बुझा सकती है।

यही सोच कर वह चिड़िया के पास गया और कहा ”  अरे तुम मूर्ख हो इस तरह से आज नहीं बुझाई जा सकती है।

वह नन्ही सी चिड़िया ने बहुत ही विनम्रता से जवाब दिया ” मुझे यह पता है कि मेरे इस प्रयास से कुछ नहीं होने वाला है। लेकिन मुझे अपनी तरह से आग बुझाने की कोशिश करना है ।भले ही यह आज कितना भी भयंकर क्यों ना हो मैं इसे बुझाने की कोशिश करती रहूंगी।

नन्ही चिड़िया की यह बात सुनकर के वह उल्लू बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुआ।

तो दोस्तों यही बात हमारे जीवन में भी लागू होता है। जब इंसान पर कोई परेशानी आती है तो वह हार मान करके बैठ जाता है। लेकिन इस कहानी की शिक्षा के अनुसार हमें हार नहीं मानना चाहिए हमें उसे डेट कर सामना करना चाहिए शायद हो सकता है कि हमारी विजय हो सके।

बहुत ही कठिन रास्ता


सुमावली में दो मित्र रहते थे दोनों में बहुत ही गहरी मित्रता थी फिर जो दोनों कहीं पर भी जाते थे तो साथ ही जाते थे वह अपनी सभी कम को साथ ही करते थे किसी भी कंपनी में जॉब के लिए जाते तो साथ ही जाते थे।

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बहुत ही कठीन रास्ता

वे दोनों इतनी अच्छे मित्र थे कि उन्हें अगर कोई समस्या होती थी तो एक दूसरे को साझा करके उसका खोज निकाल लेते थे।

लेकिन एक दिन की बात है वह कहीं गए हुए थे। और उन्हें पता था कि हमें जाने में रात हो जाएगी। इसलिए वे एक छोटी सी टॉर्च को अपने साथ लिया था।

वे लोग जहां पर जा रहे थे वहां पहुंचने से पहले ही धीरे-धीरे अंधेरा होने लगा। वह काली रात थी और अब कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता था। इसलिए उन्होंने टॉर्च जलाया उससे ज्यादा दूर तक दिखाई नहीं पड़ता था।

तब एक दोस्त ने निश्चय किया कि मैं पास के गांव में ही रुक जाऊंगा आज कल फिर अपनी यात्रा जारी करेंगे। लेकिन दूसरा दोस्त नहीं माना वह बहुत ही जिद्दी था इसलिए वह अपनी लक्ष्य को पाने के लिए अकेले ही निकल पड़ा।

वह अपनी टॉर्च को लेकर के जलाया और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा मंजिल अभी 2 किलोमीटर दूर था और टॉर्च का प्रकाश 200 मीटर ही दूर जाता था। इसलिए वह दोस्त धीरे-धीरे बढ़ता गया और टच 203 मीटर से 400 किलोमीटर 400 से 600 किलोमीटर तक पहुंच गया।

और धीरे-धीरे करते-करते वह अपनी लक्ष्य को हासिल करने में सफल हुआ और फिर उसे वहां पर बहुत ही प्रोत्साहन दिया गया

  • अगर आपको लक्ष्य की प्राप्ति करनी है तो आप को जितना दिखाई देता है।
  • आप पहले इतनी डरी तो तय कीजिए उसके बाद आपको और भी दिखाई देने लगेगा
  • फिर आप धीरे-धीरे उसको भी पर कर लीजिए धीरे-धीरे कोशिश करने के बाद से आपको सफलता जरूर मिलेगी

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हमें 1000 किलोमीटर जाना है और 200 किलोमीटर दिखाई दे रहा है तो हमें पहले 200 किलोमीटर जाना चाहिए फिर हमें आगे 200 किलोमीटर और दिखाई देगा।

इस तरह करके हम अपनी 1000 किलोमीटर की दूरी आसानी से तय कर सकते हैं अगर हम या तय कर ले कि नहीं किसी दूसरे दिन कर लेंगे तो आप कभी भी जीवन में सफल नहीं होंगे आप बहुत ही आलसी किस्म के हो जाएंगे।

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धोबी और गधा 


राधा गंज नामक गांव में सुरेश नाम का एक धोबी रहता था । वह एक निर्धन धोबी था और उसके पास एक कमजोर गधा था। निधन होने के कारण वह अपने गधे को कम खाना पानी देता था जिसके चलते वह कमजोर था।

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धोबी और गदहा

एक दिन की बात है वह अधूरी अपने गद्दे पर नमक लड़ करके गांव से होते हुए शहर बचने के लिए जा रहा था तभी रास्ते में उसे एक बाघ मरा हुआ मिला। तभी उसे धोबी के दिमाग में अचानक एक ख्याल आया कि मैं अपने गधे के ऊपर उसे बाघ के खाल को डाल दूंगा।

और मैं उसे रात के समय अपने पड़ोसियों के खेत में चलने के लिए छोड़ दूंगा। सभी किसान समझेंगे कि वह गधा सचमुच का बाघ है। इसलिए वह हमेशा डर के मारे उससे दूर रहेंगे और हमारा गद्दा आराम से पूरी चारा खा सकता है।

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धोबी ने तुरंत अपनी योजना पर काम करना शुरू कर दिया और उसे अपने यह योजना कम करने भी लगी।

एक दिन की बात है वह गधा रात के समय खेत में चल रहा था तभी अचानक किसी गधा ने रात को  रैंगने लगे। वह आवाज इस गधा के कानों में पड़ा। उस आवाज को सुनकर के या गधा पूरी जोश में आ गया। फिर जोर – जोर से रेंगने लगा।

उसी रात एक आदमी सोच रहा था बाघ तो मांस खाता है लेकिन हमारे खेत में क्या कर रहे हैं। तभी अचानक उसे गधा की आवाज सुनकर के सभी किसानों को उसकी असलियत का पता चल गया। और उन्होंने उस गधे को खूब मारा।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें किसी दूसरे का नकल नहीं करना चाहिए हमें सच्चाई के साथ रहनी चाहिए।

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अध्यापक की सीख


एक बार की बात है एक शिक्षक अपनी क्लास में सभी छात्रों को समझ रहे थे। कि सभी इंसान का भाग्य स्वयं उसके हाथों में ही होता है। आप जैसे विचार रखोगे या फिर जैसे कर्म करोगे।

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शिक्षक की शिक्षा

आप उसी तरह बन जाओगे। भगवान हमें सभी को एक समान और अवसर प्रदान करते हैं। लेकिन यह बात आप पर निर्भर करता है कि आप अपने और सर को किस तरह उपयोग करते हैं।

उदाहरण के लिए शिक्षक ने सभी को बच्चो प्रयोगशाला में ले गए। और वहां पर तीन कटोरी लिया और तीनों में अलग-अलग प्रकार की जैसे एक में आलू एक में अंडा और एक में चाय पत्ती डाल दिया फिर तीनों में पानी भर दिया।

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आप तीनों कटोरी को गैस जलाकर उसके ऊपर रख दिए यह सब देख सभी बच्चे हैरान हो गए उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या होने वाला है।

15 मिनट ही बात जब तीनों बर्तनों में उबाल आने लगा तो तो शिक्षक ने सभी तीनों कटोरा को नीचे उतार दिया। और आलू अंडा और चाय को बाहर निकाला।

तब शिक्षक ने अपने सभी छात्रों को उसे गौर से देखने के लिए कहा ” लेकिन उनमें से कोई भी छात्र इस बात को समझ में नहीं आ रहे थे एक ने बोला कि मां से इसमें चाय पत्ती दिखाई नहीं दे रहा है।

तभी शिक्षक ने उसे बच्चों को उठाया और तीनों को (अंडा, आलू और चयपति)छूने करने के लिए कहा ” जब वह छात्र ने आलू को हाथ लगाया तो पाया कि जो आलू पहले कठोर था वह अब नरम हो गया है। और जो अंडा पहले हिल मिल सा था वह अब कठोर हो गया है। और चाय पत्ती पानी में पूरी तरह से घुल चुकी थी।

तब शिक्षक ने अपने सभी छात्रों को समझाते हुए कहा कि मैंने तीनों चीजों को निश्चित समय पर एक ही विपत्ति से गुजारा “अर्थात मैं तीनों वस्तु को निश्चित तापमान पर निश्चित समय पर पानी में उबाल लेकिन बाहर आने के बाद से तीनों में अलग-अलग परिवर्तन हो गया।

आलू जो पहले कठोर था वह नरम हो गया अंडा जो थोड़ा नरम था वह पूरी कठोर हो गया और चाय पानी में जाते ही अपना रंग बदल दिया। यही नियम भी इंसानों पर ही लागू होता है।

जब एक इंसान विपत्ति में अपना धैर्य खो देता है। लेकिन वही दूसरा बुद्धिमान आदमी अपना विपत्ति में उसका सामना करते हुए अपने लक्ष्य की प्राप्ति करता है।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भगवान सभी को समान अवसर देते हैं और विपत्ति भी प्रदान करते हैं। लेकिन यह आप पूरी तरह आप पर निर्भर करता है कि आप कैसा बनना चाहते हैं। और उस परिस्थिति में आप किस प्रकार अपने जीवन को ढालते हैं।

ईश्वर कण कण में है


नंदकिशोर अपने लड़के को श्याम किशोर को रात को सोने से पहले रोज कहानियां सुनाते थे। एक दिन उन्होंने श्याम किशोर से कहा  ” तुम इस बात को कभी मत भूलना कि भगवान सब जगह है।

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ईश्वर कण कण में विराजमान हैं

तभी श्याम किशोर ने इधर-उधर देखा और पूछा ” भगवान सब कहीं है लेकिन मुझे तो कहीं भी दिखाई नहीं देते।

फिर नंदकिशोर ने हंसते हुए जवाब दिया। हम भगवान को देख नहीं सकते लेकिन वे सभी जगह हैं। वे  हमारे सभी बुरे और अच्छे कामों को देखते हैं।

फिर श्याम किशोर ने अपने पिता की बात को याद कर लिया। लेकिन कुछ दिन बाद वहां अकाल पड़ गया। उस समय नंदकिशोर के खेतों में कुछ नहीं हुआ।

एक दिन श्याम किशोर को रात के अंधेरे में लेकर के वह उसे गांव से बाहर गया। वह किसी दूसरे किसान की खेत में से एक गठ्ठा अनाज कट करके लाना चाहता था। श्याम किशोर को टेबल पर खड़ा करके उसने कहा : “तुम यहां से चारों ओर देखते रहो अगर कोई आए तो चुपके से हमें बता देना।

जैसे ही नंदकिशोर ने दूसरे किसान के खेत में अनाज काटने के लिए बैठा तभी श्याम किशोर ने कहा  ” पिताजी रोकिए।

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तभी नंदकिशोर ने पूछा ” ? क्या हुआ कोई देख रहा है क्या ” तब श्याम किशोर ने जवाब दिया ”  हां देख रहा है। तभी नंदकिशोर खेत से निकलकर मेड पर आ गया। उसने अपने चारों तरफ बड़े ही ध्यान से देखा जब उसे कोई नहीं देखा तो वह श्याम किशोर से बोला ” कहां पर और कौन देख रहा है।

श्याम किशोर ने कहा  :”अपने ही तो मुझे सिखाया था कि ईश्वर सब जगह है और वह सब जगह देखता रहता है। इसलिए वह आपको इस तरह खेत में अनाज काटते हुए नहीं देखेगा क्या  ? नंदकिशोर अपनी पुत्र की बात सुनकर के लज्जित हो गए।

वे चोरी का विचार छोड़ कर अपने घर वापस लौट आया।

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एकाग्रता से सफलता जरूर मिलती है


बहुत समय पहले की बात है सुंदरवन का नामक एक जंगल था। उसे जंगल में बहुत सारे मेंढक रहते थे। उस जंगल में एक बहुत बड़ा और ऊंचा पेड़ था। उस जंगल के सभी मंडलों ने एक बार एक सभा आयोजित किया और उसमें एक पर योगिता प्रस्ताव किया।

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एकाग्रता से सफलता जरूर मिलती है

जिसमें नियम यह था कि जो मेंढक सबसे पहले पेड़ पर चढ़कर चोटी पर पहुंचेगा। वह उसे जंगल के सभी  मेंढकों का राजा बन जाएगा।

अगले दिन उसे जंगल के सभी मेंढक एक जगह पर उपस्थित हुए। और सभी बारी-बारी से उसे पेड़ पर चढ़ने की कोशिश करने लगे। लेकिन वह पेड़ इतना बड़ा था कि सब भी मेंढक उसे पर चढ़ने से घबरा रहे थे।

बारी-बारी से सभी बंधक ऊपर चढ़ने लगे थे। लेकिन धीरे-धीरे सभी मेंढक थक करके हार मानने की कोशिश करने लगे। लेकिन उसमें से कुछ मेंढक हर करके वापस नीचे भी आ गए।

तभी कुछ मेंढक नीचे आकर ऊपर वाले में मेंढकों को आवाज लगाते हैं कि आप सभी लोग वापस आ जाओ उस पेड़ की चोटी पर पहुंचना नामुमकिन है।

अपने आप को बलशाली समझने वाले सभी मेंडक नीचे आ जाते हैं लेकिन उनमें से एक छोटा सा मेंढक धीरे-धीरे करके ऊपर चढ़ने लगा था। सारे मेंढक अपने हाथ ऊपर करके उसे भी नीचे उतर आने को कहने लगे। लेकिन वह ऊपर चढ़ता गया और उस पेड़ की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंच गया।

अनमोल वचन जरुर पढें 

लेकिन जब वह छोटा सा मेंढक वापस आया। तो सभी उसे उसकी सफलता का मूल मंत्र जानने की कोशिश किया। वह मेंढक किसी ने जवाब नहीं दिया और चुपचाप वहां से जाने लगा। तभी पीछे से उसका एक दोस्त ने जवाब दिया कि वह मेंढक बहरा है।

तब वह मेंढक ने बताया कि मुझे लग रहा था कि आप लोग मेरी उत्साह बढ़ाने के लिए हाथ को ऊपर करके और ऊपर जाओ और ऊपर चढ़ कि नारे लगा रहे थे। इसलिए मैं अपनी इस प्रयोग का को पाने में सफल हुआ।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि यह नियम भी हमारे ही जीवन पर लागू होता है। जब भी आप कुछ अच्छा काम करने के लिए जाते हैं। तो कुछ लोग पीठ पीछे आपकी पैर खींचने में कोशिश करते हैं।

इसलिए हम में से बहुत सारे लोग धैर्य छोड़ देते हैं। लेकिन जो बिना रुके हुए एकाग्रता के साथ नियमित रूप से आगे बढ़ते रहता है। वह अंत में जरूर सफल होता है। इसलिए हमें बुरे लोगों की बातों को नजर अंदाज करके अच्छे कर्मों की तरफ ध्यान देना चाहिए।

परिवार का महत्व


हमारे जीवन में कुछ बातें इस तरह की होती है। जो हमें करने या सुनने में बहुत अच्छी तो नहीं लगती है। लेकिन हमारे आगे बढ़ाने के लिए इनका योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

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जैसे उदाहरण के लिए ” जब एक पिता अपने बच्चों को डांटता है या उसके शिक्षक विद्यालय में उसकी पिटाई करता है। या फिर उसकी मां हर बात पर पूछती और बोलती तथा उसे समझ आती रहती है।

यह बात सभी बच्चों को बहुत ही बुरा लगता है। लेकिन कहीं ना कहीं यह सभी चीज एक बच्चे की अच्छी प्रगति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान निभाता है।

एक दिन की बात है शाम के समय एक पिता अपने सात साल के बच्चे को पतंग उड़ाना सिखा रहे थे। अब धीरे-धीरे करके पतंग ऊंची उड़ने लगी थी। और वह लड़का इसको बहुत ही ध्यान से देख रहा था। आकाश में उड़ता हुआ पतंग देख उसे काफी मजेदार लग रहा था।

कुछ देर ऐसे ही देखते वह लड़का अचानक जोर से बोला “– पापा जी यह हमारी पतंग ज्यादा ऊपर नहीं जा रहा है। आप इस पतंग के धागे के डोर को तोड़ दीजिए। तब यह पतंग बहुत ही ऊंचा उड़ने लगेगी।

उसे लड़के के पापा हंसते हुए उसे पतंग के डोर को तोड़ देते हैं। लेकिन उसकी उल्टा हुआ। वह पतंग ऊपर और आकाश में जाने की अपेक्षा धीरे-धीरे करके नीचे गिरने लगी।

वह लड़का इस बात पर बहुत ही आश्चर्यचकित होकर के देख रहा था। उसके पापा ने हंसते हुए समझाया कि बेटा यही हमारे जीवन का सार है। हम अपनी जिंदगी में जिस ऊंचाई पर होते हैं हमें लगता है कि हमें और अधिक ऊंचाई पर जाने के लिए कोई चीज बाधा बन रही है।

जैसे कि हमारे घर ,परिवार ,दोस्त ,रिश्तेदार ,माता-पिता और हम पतंग की डोर की तरह इन सभी चीजों से आजाद होना चाहते हैं। लेकिन कहीं ना कहीं यह सभी चीज हमारी प्रगति का जिम्मेदार होते हैं।

अगर तुम इन सभी चीजों से दूर भागोगे तो तुम इस पतंग की तरह ही फस करके रह जाओगे इसलिए तुम अपनी सफलता पर ध्यान दो।

मां की ममता


यह बात उसे समय की है जब हमारे गुरु विवेकानंद जी महाराज की प्रसिद्धि , उनके ज्ञान और उनके अच्छे आचरण के कारण उनकी प्रशंसा पूरे विश्व में हो रही थी।

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गुरु स्वामी विवेकानंद जी महाराज जहां कहीं पर भी जाते थे। वहां के लोग उनके अनुयायी बन जाते थे। और उनकी ज्ञान भरी बातों से मंत्रमुग्ध हो जाते थे।

एक बार की बात है। स्वामी विवेकानंद जी महाराज एक नगर में पहुंचे। जब वहां के लोगों को इस बात का पता चला तो वहां के सभी लोग स्वामी विवेकानंद जी महाराज से मिलने के लिए उनके पास पहुंचे। उसे नगर के अमीर से अमीर लोग स्वामी विवेकानंद जी महाराज के लिए कीमती– कीमती चीज उपहार के लिए लाए थे।

अकबर बीरबल की कहानी

कोई अमीर आदमी सोने की अंगूठी लाया था तो कोई हीरो से जड़ा हुआ स्वामी विवेकानंद जी महाराज के लिए हार लाया था। स्वामी विवेकानंद जी महाराज उन सभी से भेंट स्वीकार करते हैं और उसे एक अलग जगह रख देते हैं।

उसी समय एक बुड्ढी महिला चलते हुए स्वामी विवेकानंद जी महाराज के पास आई और बोली ” महाराज आपकी आने की सूचना मिला तो मैं भी आपसे मिलने के लिए व्याकुल हो गई।

मैं बहुत गरीब हूं। और कर्ज से दबी हुई हूं ,इसलिए मुझे आपको उपहार देने के लिए कोई भी वस्तु नहीं है। उस समय मैं खाना खा रही थी इसलिए उसमें से कुछ रोटियां बचाकर आपके लिए लाया हूं। अगर आप इस गरीब बुढ़िया की रोटी को स्वीकार करते हैं तो मुझे बहुत ही खुशी मिलेगी।

वहां आसपास के बैठे सभी लोग उस बूढ़ी महिला को देखकर घृणा करने लगे। और कहने लगे यह औरत बहुत ही बेवकूफ हैं। जो ऐसी सूखी हुई और खराब सी रोटी लेकर स्वामी जी के लिए पहुंची है।

यह देखते हैं उसी समय स्वामी जी की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने उसे महिला से वह रोटी लिया और वहीं पर खाने लगे। वहां पर बैठे कुछ लोगों को यह बात अच्छी नहीं लग रही थी इसलिए उन्होंने स्वामी जी से पूछा  ” स्वामी जी हमारे द्वारा दिए हुए बहुत ही कीमती उपहार को आपने तो अलग ही रख दिया है।

आप इस गंदे कपड़े पहने बुड्ढी औरत के दी हुई सूखी रोटी बड़े ही स्वाद के साथ खा रहे हैं आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। महात्मा ?

स्वामी विवेकानंद जी महाराज बड़े ही सुंदरता से मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि देखिए आप लोगों ने अपनी पूरी धन से कुछ मात्र धन निकाल कर ही मुझे यह कीमती सोने की हार या फिर हीरे की हार प्रदान किया है।

लेकिन इस बुड्ढी मां के पास इस रोटी के सिवाय और कुछ नहीं है। फिर भी इन्होंने अपने मुंह का निवाला मुझे उपहार के रूप में प्रदान किया है। इससे बड़ा त्याग और क्या हो सकता है ?

एक माही ऐसा काम कर सकती है। मां खुद भूखे रह करके अपने बच्चे को खाना खिलाती है। यह मेरे हाथ में एक सूखी रोटी नहीं ” यह एक मां की ममता है। और मैं इस ममतामई मां को बड़े ही आदर के साथ शत-शत नमन करता हूं।

स्वामी विवेकानंद जी की यह बात सुनकर के वहां पर उपस्थित सभी लोग बिना कुछ बोले हुए ही अपने सिर को नीचे कर लिया। वाह ! उन सभी लोगों के मन में एक ही विचार थे की आप कितनी उच्च विचार के हैं। यह हमें आज पता चला।

मैं अपने सभी दोस्तों से बस यही कहना चाहूंगा कि मां एक भगवान के द्वारा दिए हुए वरदान के समान है। जो हम लोगों को मिला है।

कहा जाता है कि हमारी मां के ममता के आगे स्वर्ग का सुख भी फीका पड़ता है। क्योंकि माही वह इंसान है जो खुद की कष्ट को सहकर वह अपने बच्चे को बड़े ही प्यार से पालती है।

इसलिए मैं अपने सभी दोस्तों से यही आग्रह करूंगा कि आप लोग अपने माता-पिता की सेवा कीजिए। आप कभी भी ऐसा कोई काम ना करें जिससे उन्हें कोई दुख पहुंचे और सर्वदा उनका ख्याल रखें।


हमारी प्यारी मां 🙏


स्वामी विवेकानंद जी और विदेशी औरत


यह बात तो हम लोगों को पता ही होगा। स्वामी विवेकानंद जी महाराज हमारे भारत के सर्वश्रेष्ठ पुरुषों में से एक है । एक बार की बात है जब स्वामी विवेकानंद जी की प्रसिद्धि पूरी दुनिया में फैल गई थी।

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स्वामी विवेकानंद जी महाराज और औरत

भारत के अलावा विदेशो में भी स्वामी विवेकानंद जी के लाखों में अनुयायि बन गया थे। विदेशों में भी उनकी बुद्धिमानी की चर्चे होते रहते थे।

एक बार स्वामी विवेकानंद जी महाराज अमेरिका गए हुए थे। वे अपनी सभा में सभी लोग को शिक्षा प्रदान कर रहे थे।

तभी उसमे से एक विदेशी महिला ने स्वामी विवेकानंद जी महाराज से प्रभावित होकर उनकी तरफ आकर्षित हो गई। और वह स्वामी विवेकानंद जी महाराज से मिलने पहुंची। स्वामी जी के चेहरे पर सूर्य के सामान तेज था।

वह विदेशी महिला स्वामी जी से बोली – स्वामी जी मैं आपसे विवाह करना चाहती हूं।

स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने कहा – क्यों ? हे लक्ष्मी मैं तो ठहरा बाल ब्रह्मचारी पुरुष हूं।

तब वह विदेशी महिला ने कहा ” स्वामी जी मुझे आपके जैसी ही तेजस्वी पुत्र चाहिए। ताकि वह बड़ा होकर इस पुरी दुनिया को ज्ञान बांटे और मेरी नाम रौशन करें की मैं अपनी उस प्यारी मां की बेटी हूं।

फिर स्वामी विवेकानंद जी महाराज उस महिला के आगे हाथ जोड़ा …… मां…. लीजिए देवी मैं आज से आपको अपना मां मानता हूं। अब तो आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल गया। और इस प्रकार मेरा ब्रह्मचर्य भी नहीं टूटेगी।

बस इतना सुनते ही वह विदेशी महिला उसी वक्त स्वामी विवेकानन्द जी महाराज के चरणों में गिर पड़ी। और कहने लगी। धन्य है आप महात्मा स्वामी जी,, आप सभी युवाओं के लिए सचमुच प्रेरणा के स्त्रोत हैं।

भला आदमी Latest Desi Kahani


एक बार की बात है। सिंगपुर नाम का एक गांव था। उस गांव में एक बार एक धनी आदमी ने एक मंदिर का निर्माण कराया। और उस मंदिर में भगवान की पूजा करने करने के लिए एक पुजारी उस मंदिर में रखा। इस मंदिर की खर्चे के लिए बहुत सी भूमि, खेत और बगीचे मंदिर के नाम किए।

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भला आदमी

वह अमीर आदमी ने ऐसा सुविधा प्रदान किया था। की जो उस मंदिरों में भूखे आदमी, दीन दुखी और साधु – संत आए। वे लोग आराम से एक सप्ताह तक वहा पर ठहर सकता था। और उन्हें भोजन के लिए भगवान का प्रसाद मिल जाए।

अब उस अमीर आदमी को ऐसे मनुष्य की आवश्यक्ता था। जो वहा पर उस मंदिर परिसर के पुरी संपति का प्रबंधन करें। जो उस मंदिर के सभी काम सही तरीके से चलाना जानता हों।

यह बात सुनकर बहुत से लोग उस अमीर आदमी के पास गए। वे सभी लोगों को पता था। की यदि मंदिर का संचालन मिल जाए। तो हमें वेतन बहुत ही अच्छी मिलेंगी। लेकीन वह अमीर आदमी इनलोगो के बारे में सब जानता था। की कौन सा आदमी कैसा है। इसलिए सभी लोग को आने के लिए धन्यवाद् दिया और उनमें से किसी को वह कार्य प्रदान नहीं किया।

वह अमीर आदमी सबको लोटते समय कहता था : मुझे एक भला आदमी चाहिए। मैं उस आदमी को अपने आप चुन लूंगा।

उस गांव के बहुत से लोग उसे मन ही मन गालियां देते थे। बहुत सारे लोग तो उसे मूर्ख तथा पागल इंसान भी कहते थे। लेकीन वह अमीर आदमी किसी की भी बात पर उतना ध्यान नहीं देता था।

जब मंदिर के पट खुलते थे। और लोग वहा भगवान की दर्शन के लिए आने लगते थे। तब वह अमीर आदमी अपने मकान के उपर से बैठ कर मंदिर में आने वाले लोगों को चुपचाप देखता रहता था।

एक दिन एक आदमी उस मंदिर में दर्शन के लिए आया था। उसके कपड़े मैले और फटे हुए थे। लेकीन वह आदमी पढ़ा लिखा आदमी लग रहा था। जब वह आदमी भगवान के दर्शन कर जानें लगा। तब वह अमीर आदमी उस पुरुष को अपने पास बुलाया और बड़े ही प्यार से कहा: ” क्या आप इस मंदिर के कार्य व्यवस्था संभालने का कार्य करेगें।

वह मनुष्य बड़े ही आश्चर्य में पड़ गया। उसने कहा :” महाशय मैं तो बहुत अच्छा पढ़ा लिखा नहीं हूं। मैं इतने बड़े मंदिर का प्रबंधन कैसे कर सकता हूं ?

वह अमीर आदमी हंसते हुए कहा :” लेकीन मुझे बहुत विद्वान आदमी की जरूरत नहीं है। बस मैं तो एक भले आदमी को इस मंदिर का संचालन करने के लिए बनाना चाहता हूं।

उस मनुष्य ने जवाब दिया “: आप इतने आदमी में मुझे ही क्यो भला आदमी समझा।

अमीर आदमी ने कहा :” मैं जानता हूं कि आप भला आदमी हैं। मंदिर के रास्ते में एक ईट का टुकड़ा गड़ा हुआ था। और उस ईट के एक कोने उपर निकला था।

मैं अपने छत से बहुत दिनों से देख रहा था। उस मंदिर के टुकड़े की नोक से लोगों को ठोकर लगती थीं। लोग गिरते हैं, लुढ़कते है, लेकीन फिर से उठ कर चले जाते थे।

आप को उस टुकड़े से ठोकर तो नहीं लगा। लेकीन जब आपने उसे देखा तो उखाड़ कर फेंकने की कोशिश किया। लेकीन नहीं हुआ। तब आप ने मेरे मजदूर को ले जाकर फावड़ा से उसे निकाल कर फेकवा दिया। और फिर वहा की भूमि को समतल करवाया।

फिर वह आफमी ने कहा :” यह तो कोई बात नहीं हुआ, की कोई आदमी रास्ते में पड़े हुए, कांटे, कंकड़, और पत्थर हानि पहुंचाने वाले को हटा दिया। यह तो सभी मनुष्य का कर्तव्य बनता है।

वह अमीर आदमी ने जवाब दिया :” अपने कर्तव्यों को जानने और उसे पालन करने वाले लोग ही भले आदमी हों सकते हैं।

फिर वह आदमी उस मंदिर का प्रबंधन बनकर संभालने लगा। वह आदमी बहुत ही सुन्दर तरीके से उस मंदिर का प्रबंधन कर रहा था।

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सभी इंसान को अपने कर्तव्य का पालन सही ढंग से करना चाहिए। तभी वह एक सफल व्यक्ति बन पाता है।

        स्वर्ग के दर्शन Latest Desi Kahani


सुरेश नाम का एक बहुत ही भोला लड़का था। वह हमेशा सदैव अपनी विस्तर पर सोने से पहले अपने दादी जी से एक कहानी सुनकर ही सोता था।

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स्वर्ग के दर्शन

उसकी प्यारी दादी हमेशा उसे नागलोक, स्वर्गलोक, भूतलोक, सूर्य लोक, नारक लोक, बस इसी तरह की कहानियां सुनाती थी।

उसकी दादी ने एक दिन स्वर्ग लोक की कहानी सुनाया। दादी जी स्वर्ग लोक का सुंदरता का इतना चर्चा किया कि उसे सुन करके सुरेश स्वर्ग लोक को देखने की जिद्द करने लगा।

उसकी दादी ने उसे बहुत समझाया कि मनुष्य कभी भी स्वर्ग को नहीं देख सकता है। लेकिन सुरेश रोने लगा और रोते-रोते ही वह सो गया। उसने सपने में देखा कि एक चमचमाते हुए देवता उसके पास खड़े होकर कह रहे थे कि ” बच्चे ” तुम्हें स्वर्ग देखने के लिए पैसा देना पड़ेगा।

जिस तरह तुम सर्कस देखने जाते हो तो पैसा देते हो इस प्रकार तुम्हें स्वर्ग देखने के लिए रुपया देना पड़ेगा।

सुरेश आप सपना में ही सोचने लगा कि मैं अपने दादी से ₹100 मांग लूंगा। लेकिन इस समय देवता ने कहा कि स्वर्ग में तुम्हारा रूपया नहीं चलता है। यहां पर तो भलाई और पुण्य के कामों का रुपया चलता है।

” ठीक है ” हेलो डब्बा तुम अपने पास रखो जब भी तुम एक पुण्य काम करोगे तो इसमें ₹1 आ जाएगा। लेकिन जब भी तुम कोई बुरा काम करोगे तो इसमें से ₹1 उड़ जाएगा। जब वो डिबिया पूरी तरह से भर जाएगी तो तुम आराम से स्वर्ग को देख सकते हो।

सुबह में जब सुरेश की नींद खुली तो उसने सचमुच में अपने सिर के पास एक डिबिया पाया। वह उस डिब्बा को लेकर के बहुत ही प्रसन्न हुआ। उस दिन दादी ने उसे ₹1 दिया। वह अपना पैसा लेकर के घर से निकला तभी कुछ दूर बाद एक रोगी भिखारी उससे पैसा मांगने लगा।

सुरेश वहां से उसे भिखारी को बिना पैसे दिए हैं नौ दो ग्यारह होना चाहता था। तभी अचानक उसने अपने शिक्षक को अपनी तरफ आता देख लिया। उसके वह शिक्षक उदार लड़कों की बहुत ही ज्यादा प्रशंसा करते थे। उसे शिक्षक को देखकर के सुरेश ने उसे रोगी भिखारी को पैसा दे दिया। शिक्षक ने सुरेश की पीठ थपथपा आया और उसकी प्रशंसा किया।

घर लौटकर सुरेश ने तुरंत वह डिबिया खोली ,लेकिन उसमें कोई भी पैसा नहीं था। इस बात से सुरेश को बहुत ही दु:ख हुआ। और रात को रोते रोते सो गया। लेकिन फिर से सपने में उसे वही देवता दिखाई दिया। वे देवता बड़े ही विनम्र भाव से बोले ”

तुमने अपने अध्यापक से प्रशंसा पाने के लिए उस रोगी भिखारी को पैसा दिया था। और तुम्हें प्रशंसा मिल गई थी। तो किस लिए तुम रो रहे हो। अगर हम किसी लाभ की इच्छा से कोई काम करते हैं तो वह एक व्यापार माना जाता है। वह पुण्य की श्रेणी में नहीं आता है।

दूसरे दिन सुरेश को उसके दादी ने दो आने पैसा दिया। वह पैसा लेकर के सुरेश बाजार गया और वहां से दो संतरा खरीद लाया। सुरेश का साथी गोलू बीमार था। इसलिए वह बाजार से लौटते समय वह अपने मित्र को देखने के लिए चला गया।

गोलू को देखने के लिए उसके घर डॉक्टर साहब आए हुए थे। डॉक्टर ने गोलू को दवा देकर के कहा कि गोलू की मां से की आज आप इसे केवल संतरे का जूस पीला दीजिए।

लेकिन गोलू की माता बहुत गरीब थी। वह रोने लगी और बोली मैं तो मजदूरी करके अपनी पेट पालती हूं। बेटे की बीमा की स्थिति में मैं कई दिनों से काम करने भी नहीं गई हूं। अब तो मेरे पास संतरे खरीदने के लिए ₹1 भी नहीं है।

सुरेश ने अपने दोनों संतरे गोलू की मां को दे दिया। गोलू की मां सुरेश को आशीर्वाद देने लगी। जब घर आकर के सुरेश ने अपनी डिब्बा खोला । तो उसमें देख की ₹2 चमक रहे थे।

एक दिन की बात है। सुरेश खेल में लगा था। तभी उसकी छोटी बहन वहां पर पहुंच गई। और उसके सभी खिलौने को उठाने लगी। सुरेश ने अपनी बहन को रोका। लेकिन जब उसकी बहन नहीं मानी तो उसे दो थप्पड़ मार दिया।

बेचारी अब सुरेश की बहन रोने लगी। इस बार जब वह अपना डब्बा खोलना है तो देखा है कि पहले से किए हुए रूपए में से कई रुपए उड़ गए होते हैं। उसे इस बात का बहुत ही बड़ा पछतावा होता है। आगे से वह कभी भी बुरा काम नहीं करने का दृढ़ संकल्प कर लिया।

सुरेश पहले रूपए की लालच से अच्छा काम करता था। लेकिन अब धीरे-धीरे सुरेश का स्वभाव ही अच्छा काम करने के लिए हो गया। अच्छा काम करते-करते सुरेश की डिबिया रुपयों से भर गई। वर्ष वर्ग देखने की इच्छा करने लगा और बहुत खुश हुआ ।वह अपने डिब्बा को लेकर बगीचे में पहुंचा।

सुरेश ने देखा ” कि बगीचे में आम के पेड़ के नीचे एक साधु बैठकर रो रहा था। सुरेश दौड़ता हुआ उस साधु के पास गया और बोला ” साधु महाराज ” आप क्यों रो रहे हो ?

साधु बोला ”  बेटा ” तुम्हारे जैसा ही डिबिया एक मेरे पास भी थे। मैंने बहुत परिश्रम करके उसे रुपयों से भरा था। मुझे बड़ी आशा थी कि मैं उस रुपयों से स्वर्ग को देखूंगा। लेकिन आज गंगा जी में स्नान करते वक्त अचानक हुआ डिब्बा पानी में चली गई।

सुरेश ने कहा ” साधु महाराज ” आप मत रोइए। मेरी डीप अभी पूरी भरी हुई है । आप इसे ले लो। वह साधु ने कहा कि तुमने इस डिब्बे को बहुत ही परिश्रम से भरा हुआ है। अगर तुम मुझे या डब्बा दे दोगे तो तुम्हें बहुत ही दु:ख होगा।

सुरेश ने जवाब दिया मुझे किसी भी बात का दु:ख नहीं होगा साधु महाराज” मैं तो अभी बच्चा हूं और शायद मुझे अभी बहुत ही दिन जीना है। मैं तो ऐसा कई डिब्बा रुपया इकट्ठा कर सकता हूं।

लेकिन आप अब वृद्ध हो चले हैं। लेकिन मुझे लगता है कि अब आप इस उम्र के बाद अपना कोई दूसरा डिबिया भर पाएंगे। इसलिए आप बिना संकोच के मेरा यह डब्बा ले लीजिए।

साधु महाराज ने सुरेश से वर्ड डिब्बा लेकर उसकी आंखों पर हाथ फेरा। उसके नेत्र आँख हो गए । और उसे स्वर्ग दिखाई देने लगा। दादी जी ने जैसा वर्णन किया था वैसा ही स्वर्ग दिखाई दे रहा था। उसके दादी ने जो स्वर्ग का वर्णन किया था उसके सामान एक कोने भी नहीं था।

थोड़ी देर बाद जब सुरेश ने अपनी आंख खोल।  तो साधु महाराज के बदले सपने में दिखाई देने वाले देवता उसके सामने प्रत्यक्ष खड़ा दिखे।

देवता ने बड़े ही विनम्रता पूर्वक जवाब दिया ” बेटा ” जो लोग अच्छे कर्म करते हैं । उनके लिए स्वर्ग ही घर बन जाता है। अगर तुम इसी तरह लोगों की भलाई करते रहोगे तो तुम भी एक दिन स्वर्ग में पहुंच जाओगे। वह देवता इतना बोल करके गायब हो गए।

फिर सुरेश उस देवता के द्वारा कहे हुई बातों को अपने जीवन में अपना लिया और वह एक बहुत ही अच्छा दयालु और आदर्श पुरुष बना और उससे सभी लोग बहुत ही मिलजुलकर रहते थे और उसे लगने लगा कि हमारा घर ही स्वर्ग के समान है।

इस Latest Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जो मनुष्य जिस प्रकार का काम करता है उसका स्वभाव भी उसी प्रकार हो जाता हैं। जो आदमी बड़ा काम करता है उसका स्वभाव भी बुरा हो जाता है। उसके बाद फिर उसे बुरा काम करने में ही आनंद मिलता है।

लेकिन जो आदमी अच्छा काम करता है उसका स्वभाव के साथ-साथ उसका चरित्र भी अच्छा होता है वह बड़ा काम करने की बात तो दूर ,बुरा बात सोने पर भी उसे बुरा लगता है।

इसलिए आप लोग भी सदैव अच्छे काम कीजिए। लोगों की भलाई कीजिए जिससे लोगों के साथ-साथ आपका भी भलाई हो।

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