इस आर्टिकल में Desi Kahani देसी कहानी लिखीं गई है। हमारे द्वारा बताई गई। आज की Desi Kahani बच्चों तथा बड़े लोगों दोनों के लिए बहुत ही प्रेणादायक रहेगी

आप लोग इस आर्टिकल में दी गई Desi Kahani को पढ़ करके बहुत ही मनोरंजन के साथ – साथ अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। ये सब Desi Kahani हम सब  लोग के दादी या अपनी मां के द्वारा सुनाई गई हैं।

Desi Kahani – 10+ देसी कहानी जरूर पढ़ें {Part 2}}
Desi Kahani 2– 10+  कहानी इन हिंदी जरूर पढ़ें {Part 2}}

इस आर्टिकल की {Desi Kahani 2} को पढ़ कर आप इस दुनिया में बहुत ही चतुराई के साथ जिंदगी बीता सकते है और आप को यह Desi Kahani 2 इस भीड़ वाली दुनिया में जीना सिखाएगा। पूरी कहानी पढ़कर कॉमेंट्स में यह जरुर बताइएगा। की कौन सी कहानी अच्छी लगी।

Most Readable Desi Kahani 2 Part 1— ClickHere

देसी कहानी {Desi Kahani 2}

बात करने वाली 🚗 कार 

एक समय की बात है। जब थोड़ी – थोड़ी सी ठंड चालू हो चूका था। और साथ ही इस महीने का अंत होने के कारण स्कूल की भी छुट्टी हो चुकी थी। सभी बच्चे, मोहन, सुरेश, विराट, रोहित, अनुष्का, SANDYMARIO,और भी बहुत सारे बच्चे सुबह की धूप में खेल रहे थे।

वे सभी बच्चे छुपन – छुपाई वाला खेल को खेलने के बाद से वे अब कालोनी की पूरी भाग – दौड़ करने के बाद उसी गली में बैठ गए और आपस मे बातचीत करने लगें।

तभी धोनी भी वहां पर साइकिल चलाते हुए आ गए। लेकीन धोनी उन सभी बच्चों में थोड़ा बड़ा सा था। इसलिए सब धोनी की बात को मानते थे। आते ही धोनी ने अपनी साइकिल को साइड में स्टैंड पर खड़ी कर दिया। और सामने वाले घर में रहने वाले अंकल की नई गाड़ी को पूरी तरह से आगे पीछे देखने लगा।

Desi Kahani – 10+ देसी कहानी जरूर पढ़ें {Part 2}}
Desi Kahani 2 – 10+ कहानी इन हिंदी जरूर पढ़ें {Part 2}}

तभी बाकी बच्चे भी उसके पास हल्ला करते हुए आकर गए खड़े हो गए। और फिर सभी उस गाड़ी के शीशे में देखने लगे। वह गाड़ी बाकी सभी गाड़ियों का अपेक्षा थोड़ी बड़ी थी। और बच्चों को उसकी सीटें स्टेरिंग और भी बहुत सारी पार्ट देखने में बहुत ही अच्छे लग रहे थे।

फिर धोनी को इस बात से एहसास हुआ कि वह वहां पर उपस्थित सभी बच्चों से बड़ी कक्षा में है। इसलिए वह उन सभी लोगों को बताता जा रहा था कि इस गाड़ी का कौन – सा मॉडल है। क्योंकि धोनी के चाचा के पास भी वैसे ही गाड़ी थी।

धोनी ने गाड़ी की बोनट के तरफ इशारा करते हुए बताया कि इसके आगे इस तरफ कैमरा भी लगा हुआ है……… तो भी बच्चों को वहां पर ऐसा विश्वास नहीं हुआ। तब धोनी ने उन्हें एक ओर इशारा करते हुए कहा कि देखो यहां पर लगा है एक कैमरा।

बच्चों को यह सब करते हुए वहीं पड़ोसी में रहने वाली मोली सब देख रही थी। बोनट को दिखाते हुए धोनी ने सबसे बोला:– तुम लोगों को पता है कि यह गाड़ी बोलती भी है ? इस बात को सुनते ही सभी बच्चे हंसने लगे और सभी बच्चों ने कहा कि धोनी भैया हमें बेवकूफ मत बनाओ, ऐसा नहीं होता है ? लेकिन धोनी ने ” कसम “खाते हुए कहा कि – मैं सच कह रहा हूं।

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धोनी ने कहा:–  कि जब हम इसकी चाबी लगाते हैं तो यह हमसे बातें करती है। और वहां पर उपस्थित सभी बच्चों को बिल्कुल ही विश्वास नहीं हो रहा था। अभी सभी बच्चे इसी में उलझे हुए थे तभी अचानक आवाज आई :— ” हां धोनी सही कह रहा है।, मैं बात कर सकती हूं यह जाकर ने बोली, जैसे ही बच्चों ने इस बात को सुना वह सभी घबराकर कार से दूर हो गए।

गाड़ी ने फिर से कहा कि तुम लोग ” डरो मत। मैं किसी का नुकसान नहीं पहुंचाती। मैं तो सिर्फ वैसे ही बात करता हूं। जैसे कि तुम्हारी फोन मैं उपस्थित असिस्टेंट से बात करती है।

गाड़ी के इस बात को सुनते ही धोनी और सभी बच्चों का डर खत्म हुआ। फिर सभी बच्चे वहां पर गाड़ी के नजदीक आ गए। आप तो बच्चों को मजाक आने लगा था। फिर भी एक-एक करके सभी गाड़ी से बातें करने लगे।

लेकिन तभी वहां पर मोही ने कहा कि यह आवाज तो हमें जानी पहचानी – सी लग रही है। फिर सभी बच्चों ने जोर से चिल्लाए: :— अरे भाई ! आवाज तो रुचि दीदी की लग रही है। जैसे ही मोही ने यह कहा:— उस गाड़ी के पीछे छुपी रूचि दीदी बाहर आ गई। इस बात पर सभी बच्चे और रूचि दीदी बहुत ही जोर से हंसने लगे।

क्या आपको यह बोलने वाली गाड़ी की Desi Kahani 2 पढ़कर के हंसी आई अगर आई तो नीचे कमेंट के बसन में कमेंट स्कर्ट जरूर बताएं कैसी लगी।

शिक्षा:– (Desi Kahani 2)

इस Desi Kahani 2 से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी तरह सभी इंसान को हंसी खुशी के साथ रहना चाहिए और एक दूसरे को अच्छे जीवन बिताने में साथ देना चाहिए। जैसे कि इस Desi Kahani 2 में रूचि दीदी ने सभी बच्चों के लिए हंसाने का एक पात्र काम किया।

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कहानी इन हिंदी{Desi Kahani 2}

स्मार्ट वॉच की चाह {Desi Kahani 2}

एक समय की बात है सुरभि स्कूल गई हुई थी। स्कूल बस से उतरते ही जैसे ही सुरभि ने अपनी मम्मी को देखा: तो सुरभि ने चहककर बोली;”अरे मम्मी आप ? नानी नहीं आई क्या ? मां ने बड़े ही प्यार से मुस्कुराते हुए कहा :”

आज मैंने अपने कॉलेज से छुट्टी ली और मैंने सोचा कि आज मैं ही आपको लेने के लिए आ जाऊं। अचानक मम्मी को आता हुआ देख सुरभि ने बोली:”मम्मी, मम्मी आपको मुझे एक प्यारी–  सी स्मार्ट वॉच दिलानी होगी।

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सुरभि की मां ने बड़े ही प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि बेटा:”तुम थोड़ा बड़ी हो जाओ ”  उसके बाद से मैं तुम्हें दिला दूंगा। लेकिन सुरभि को ऐसा लग रहा था कि जैसे कि वह पूरी स्कूल से तैयारी करके आई हो स्मार्ट वॉच के लिए।

सुरभि ने कहा ;”मम्मी मैंने अपने आज एक फ्रेंड के पास एक बहुत ही सुन्दर स्मार्ट वॉच देखा है। और मुझे भी वैसे ही प्यारी स्मार्ट वॉच चाहिए।

अब मैं बड़ी हो रही हूं ,, और मुझे स्कूल में समय का पता करने में परेशानी होता है। वैसे तो नानी भी मुझे एक स्मार्ट वॉच दिला सकती है। लेकिन उनसे पहले आज आप आ गए ,,इसलिए आप ही दिला दीजिए। सुरभि की मम्मी समझ गई” कि आज यह बातों से नहीं मानने वाली है।

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सुरभि की मम्मी” ने बात टालने वाली अंदाज में कहा :”अभी नहीं बाद में ” और फिर पूछने लगी, ” च्छा यह बताओ ” आज स्कूल में तुमने क्या-क्या किया ? सुरभि पूरी रास्ते भर मम्मी को अपनी स्कूल की पूरी गतिविधियां बताते हुए घर पर आ गई। मां बोली “तुम हाथ मुंह धो लो ,,मैं तुम्हारे लिए खाना लगाती हूं…।

जी मम्मी “आप और नानी ! रोज तो नानी मेरे ही साथ खाना खाती है ! हां ” बेटा, “मैं आपका ही इंतजार कर रही हूं। अब तुम जल्दी आ जाओ “आज हम सभी लोग साथ में भोजन करेंगे। तभी नानी बोली ” लेकिन उनसे पहले सुरभि ने स्मार्ट वॉच लेने के लिए आग्रह लगाने लगी।

‘ मम्मी” स्मार्ट वॉच” मैंने नानी की तरफ देखा और कुछ करते हुए बोलिए :”कहा न बेटा: अभी नहीं ? मैं तुम्हें बाद में दिला दूंगी। लेकिन सुरभि इतनी आसानी से उनका कहना मानने वाली नहीं थी।

वह उदास होकर बोली ” पापा” होते तो वह मुझे तुरंत स्मार्ट वॉच दिला देते “सुरभि की इस बात को सुनकर के मां और नानी थोड़ी देर के लिए जैसे खामोशी ( इमोशन हो गए क्योंकि उसके पापा इस दुनिया में नहीं थे) ओढ़ ली हो।

पापा की बात सुनते ही मम्मी भावुक हो गई  “और कुछ बोलती लेकिन उससे पहले ही नानी ने कहा “, शाम को बाजार चलेंगे तो दिला देंगे। तुम अभी थोड़ा आराम कर लो , “ठीक है।

आराम करने के बाद शाम को सुरभि ने देखा कि मम्मी और नानी दोनों मिलकर के सामान की सूची बना रहे थे। सुरभि उनके पास जाकर के बोली “, नानी” मम्मी क्या आप लोगों ने मेरी स्मार्ट वाच लिखी कि नहीं ।

मम्मी ने सुरभि को दिलासा देते हुए कहा :– “मार्केट में देखेंगे,” अगर पसन्द आई तो ही लेंगे। सुरभी ने बड़े ही प्यार से मुस्कुराते हुए कहा:”मार्केट में तो बहुत सारी घड़ियां होती हैं कोई न कोई पसन्द तो ज़रूर ही आ जाएगी।

तभी नानी ने समझाते हुए कहा कि बेटा  “पसंद का मतलब यह होता है कि अपने पास पैसे उठना है भी कि नहीं यह भी देखना होता है। सुरभि ने कहा क्या नानी आप भी इतने सारे पैसे तो सबके पास भी होते हैं। फिर सुरभि की नानी ने उसे समझाते हुए कहा कि हमें अपने आय में से बचत भी करनी होती है। फिर शाम को तीनों सुपर मॉल पहुंचे।

घड़ी के शोरूम की तरफ इशारा करते हुए सुरभि ने बोली ” मम्मी” मम्मी ,स्मार्ट वॉच और वह वहीं पर रुक गई। कुछ और सामान खरीदते हैं , लेकिन इससे पहले ही वह शोरूम की तरफ बढ़ गई। ” चलो, भाई पहले स्मार्ट वॉच ही देख लेते हैं। पर अभी दिलायेगे नहीं…? शॉरूप में एक _ दो  स्मार्ट वॉच देखते ही, सुरभि बहुत खुश हो गई।

मम्मी “ये वाली” ये वाली “,, तभी नानी ने घड़ी का मूल्य पूछा और वह बाहर निकलने लगी। सुरभि ने कहा :–  नानी क्या हुआ ? फिर मम्मी ने समझाया कि शोरूम में अभी अच्छी घड़ी नहीं है हम लोग बाद में ले लेंगे।

यदि हम अभी यह घड़ी ले लेंगे तो किराना का सामान नहीं ले पाएंगे। सुरभी रुआशी होकर बोली ” आपके पास तो कभी भी पैसे नहीं रहते हैं। ऐसा तुम हमेशा कहती रहती हो। काम की चीज है जो फालतू पैसे खर्च मत करो”और अब घड़ी भी नहीं लेने दे रही हो। तभी “नानी” बोली चलो अभी आगे और भी दुकानें है उधर देखते हैं।

शायद वहां पर कुछ दम कम दाम में मिल जाए। सुरभि ने खिलखिलाते हुए कहा ” सभी जगहों पर एक ही दाम रहता है। अभी उसका दाम 1200 सो  ही बता रहे हैं। तभी नानी बोली अब यहां तक आए हैं ” तो और जगह भी देख लेते हैं। और नानी के कहानी पर सुरभि अगली दुकान पर स्मार्ट वॉच देखने लगती है।

“यहां तो और भी महंगी है। सुरभि ने दुकान में नजर दौड़ाई तो वह अचंभा में पड़ गई। की कौन सी घड़ी लू। कौन सी लू। आप ही बताइए कौन सी लूं। जब दुकानदार ने पूछा तो सुरभि अपने मम्मी और नानी की तरफ देखने लगी। नानी ने पूछा बताओ  “बेटा “तुम को कौन – सा पसंद है।

सुरभी दो अलग – अलग घड़ियों में समझ ही नहीं कर पा रही थी कि मुझे कौन सी घड़ी लेनी चाहिए। सुरभि बोली”  मुझे तो यह दोनों घड़ियां ही बहुत पसंद है । क्या मैं इन दोनों गाड़ियों को ले सकती हूं। दुकानदार मुस्कुराकर कहा: नहीं बेटा,, ज्यादा लालच नहीं करना चाहिए। आपको तो अपने हाथ में घड़ी एक ही तो पहनना है।

यह बहुत ही बड़ी बात है । कि आपको आपकी मम्मी इतनी छोटी उम्र में स्मार्ट वॉच दिला रही है। ताकि तुम समय का महत्व को समझो। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि” हम “अपनी मम्मी की उदारता का गलत फायदा उठाया। बस इतना सुनते ही नानी ने घड़ी का दाम पूछा” और उन दोनों में से कोई एक स्मार्ट वॉच को अपने हाथों में बांध लेने के लिए कहा।

सुरभि ने झट से अपनी पसंद की घड़ी को अपने कलाई में पहन लिया। पर सुरभि को एक बात समझ में नहीं आ रही थी कि मम्मी और नानी पर्याप्त पैसे ना होने की वजह से पिछली दुकान में उस घड़ी को नहीं खरीदी ।लेकिन इस दुकान पर उससे अधिक ज्यादा दाम की घड़ी को खरीद दिया।

सुरभि इसी बात को सोचने में अपने दिमाग लगा रही थी “लेकिन तभी उसकी मम्मी ने कहा क्या हुआ ? घड़ी मिल गई तो चुप हो गई। आप संभाल करके रखना नहीं तो एक-दो दिन में ही तुम बिगाड़ देना उसे और फिर से इतनी जल्दी तुम्हें यह घड़ी नहीं मिलेगी।

इधर मम्मी की छुपी तोड़ते हैं सुरभि के मन में चल रहे सवाल उसके जीभ पर आ गया। तभी सुरभि ने कहा कि मम्मी आप तो कह रहे थे कि कम कीमत की घड़ी लेना है लेकिन फिर भी आप ₹100 ज्यादा महंगी घड़ी क्यों खरीद दिया।

पहले वाली दूकान पर तो ऐसे ही घड़ी 1200में मिल रही थी। और यह 1300 में हैं। फिर भी आपने खरीद दिया। क्या यह घड़ी उससे भी अच्छी क्वालिटी की है क्या ?

सुरभि की मम्मी कुछ कहती “लेकिन उससे पहले ही उसकी नानी उस घड़ी की प्रशंसा करते हुए बोली: या आपने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया बेटा :”हमेशा बाजार के मूल्य भी दो तरह के होते हैं। एक वह हैं।जो हमें रुपए वैसे के रूप में दिखाई देते हैं। और दूसरे वे जो हमारे चरित्र गुण और लक्षणों पर आधारित होते हैं। हिंदी हम अपने नैतिक मूल्य भी कहते हैं।

सुरभि तुम्हें दूसरे शोरूम वाले दुकानदार ने कितनी बढ़िया सलाह दी, कि हमें ज्यादा लालच नहीं करनी चाहिए। हमें जो मिल रहे हैं। उस में खुश रहना चाहिए। देखा देखी करने के लिए भी अपने विवेक बुद्धि का अपने जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना चाहिए।

सुरुचि तुम अपने स्कूल में ही देख सकती होगी ।कि बहुत सारे बच्चों के पास ए स्मार्ट वॉच नहीं होंगे। परंतु आपको देखी आपकी वह एकमात्र सहेली जिसके पास ए स्मार्ट वॉच था।

सुरभि तुमने एक बात देखा होगा। कि तुम्हारे स्कूल में बहुत सारे  बच्चे होंगे ” जिनके पास साधारण घड़ी भी नहीं होगा “यहां तक कि उनके खिलौने वाले घड़ी भी उनके पास नहीं होगा।

और वहीं पर शोरूम वाले भैया ने कितनी अच्छी बात कही कि जो आपके जिंदगी भर काम वाले चीजें होती है उन्हें खरीदनी चाहिए और फालतू में अपनी पैसे को बर्बादी नहीं करनी चाहिए और ना ही हमें किसी की देखा – देखी करनी चाहिए।

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अभी यह बात पूरी तरह से सुरभि को समझ में आ गई थी । कि हमें पैसों को बचा करके रखना चाहिए हमें सबसे ज्यादा बचत और मूल्य पर ध्यान देना चाहिए। और अपनी जरूरत के अनुसार जरूरी चीजों को ही खरीदना चाहिए। सुरभि की आवाज सुनकर के उसकी मम्मी ने पीठ थपथपाई और फिर उसकी नानी भी मुस्कुराए कि अब तुम समझदार हो गई हो।

शिक्षा: {Desi Kahani 2}

इस Desi Kahani2  से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें व्यर्थ की कामों पर ज्यादा पैसे नहीं बर्बाद करना चाहिए और हमें अपनी फैमिली के अनुसार अपने Worth पर बैलेंस बना करके चलना चाहिए सभी परिस्थितियों को समझते हुए पैसों को बचाकर उसे कहीं पर इन्वेस्ट करके एक अदर इनकम बनाना चाहिए।

जिससे कि हमें पैसे की समस्या से छुटकारा मिल सके और हम अपनी निजी जीवन में यूज होने वाली सभी चीजों को आसानी से उस पैसे की माध्यम से खरीद सकें और विकट परिस्थिति में वह जमा पूंजी हमारी सहायता कर सकें।

हमारे माता पिता द्वारा कही हुई बातों को और पैसे को कब कहां कितना खर्च करना है इसकी हमें पूरी तरह से जानकारी होनी चाहिए अगर आप कोई नौकरी कर रहे हो और आपकी वहां से नौकरी छूट जाए।

तो उसके लिए आपको लगभग 6 महीने की जमा पूंजी होना जरूरी होता है इस बातों को ध्यान में रखकर के आप अपने खर्चे को अपने अनुसार कर सकते हैं और बाकी बचे हुए पैसे को आप आगे अब भविष्य के लिए उसे फिर से इन्वेस्ट कर सकते हैं।

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हिंदी कहानी इन हिंदी {Desi Kahani}

कंजूस सेठ की Desi Kahani

एक समय की बात है एक नगर में बहुत ही धनवान सेट रहता था। सेठ के पास जितना ही ज्यादा धंधा वह उतना ही ज्यादा कंजूस भी था। वह कंजूस सेठ ₹1 खर्चा पहल करने से पहले भी यह सोचता था कि इसकी भरपाई कैसे करना पड़ेगा।

अगर कभी गलती से उसे ज्यादा पैसे खर्च हो जाते थे तो उसको रात में अच्छी नींद नहीं आती थी और और रात में भी सपने में भी पैसे के बारे में सोचते रहता था और बढ़ बढ़ाते भी रहता था कहां से किस से कितना पैसा लेना है और किसको कितना देना है हमें कितना मुनाफा होगा या सपने में वह बोलता रहता था और उसकी या प्रतिदिन की आदत हो चुकी थी।

उसके दोस्त तथा रिश्तेदार हमेशा उससे दावत की पार्टी मांगा करते थे लेकिन वह कंजूस सेठ कोई ना कोई बहाना करके हमेशा उसे डाल दिया करता था।

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एक बार की बात है एक व्यापार में सेठ को बहुत ही ज्यादा मुनाफा हुआ। यह जानकर के उनके दोस्त और रिश्तेदार सेठ के पीछे पड़ गए कि आप तो उन्हें दावत देना ही पड़ेगा। और सेठ भी पूरी प्रयास किया कि उन्हें किसी भी तरह की टाल दिया जाए लेकिन वह असफल रहा। आखिर कैसे भी हो बे मन से ही उसे दावत के लिए हां करना ही पड़ा।

सेठ ने सब को दावत के लिए बिना मन से बोल तो दिया था लेकिन वह हमेशा इस चिंता में पड़ा रहता था कि इसके खर्चों को हम कैसे भरपाई करेंगे। तथा इसी चिंता में उसे 2 दिन रात को नींद भी नहीं आती थे।

एक तरफ जहां सभी लोग दावत के पकवानों की खुशबू में खोए हुए थे। लेकिन यही सेठ दूसरी तरफ सभी के जुटा हुआ चप्पल को एक बोरा में भरवा दिया। और शहर में एक बड़े व्यापारी के पास उसे गिरवी रखने का फैसला लिया।

वह कंजूस ने कहा कि तुम वहां पर उस व्यापारी से कह देना कि इन चप्पलों के मालिक छुड़ाने के लिए आएंगे तो तुम उनसे उचित पैसा लेकर के उन्हें चप्पल वापस दे देना। और उनके बदले में जो भी पैसे होंगे वह उचित पैसे काट कर के बाकी सब मुझे रिटर्न कर देंगे।

व्यापारी ने सेठ का बात मानते हुए सभी जूते चप्पल को अपने पास गिरवी रख लिया। और उसके बदले में अच्छी रकम भिजवा दिया सेठ को जो उनके दावत से कुछ ज्यादा ही पैसे मिले थे।

वहां पर आए हुए रिश्तेदार और उनके दोस्त इस बात से अनभिज्ञ थे वे लोग पूरी तरह से स्वादिष्ट पकवान खाने में मग्न थे। जब कोई भी खाने की तारीफ करता तो सेठ मन ही मन मुस्कुरा करके कहता था यह तो आपके चरणों का ही प्रसाद है।🤣

खाना समाप्त होने के बाद जो सभी लोग अपने अपने घर जाने के लिए सब ने सब बाहर आकर देखा तो सब के सब आश्चर्यचकित रह गए। क्योंकि किसी की भी चप्पल या जूते वहां पर नहीं थे। वे सभी इस सोच में पड़ गए कि इतने सारे चप्पल जूते एक साथ कहां पर गायब हो गए।

सभी को परेशान देखकर के सेठ ने उन्हें पूरी सच्चाई बता दिया। और फिर सेठ ने कहा कि जो भी अपने चप्पल और जूता वापस पाना चाहते हैं। वह शहर में जाकर के चंपक नामक व्यापारिक से अपने चप्पल और जूते छुड़वा सकता है।

सेठ के सभी दोस्तों और रिश्तेदारों उस समय को कोसने लगे जब उन्होंने दावत की मांग की थी। सभी लोग सीट को भरा बुरा कहते हुए। वहां से वापस चले गए। और फिर सेठ अपनी बुद्धिमानी पर इतराते हुए मुस्कुराने लगा।

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तो दोस्तों कैसे लगी आपको यह सेठ की मजेदार कहानी। तो क्या आप भी अपने आसपास किसी ऐसे दोस्त या रिश्तेदार को जानते हैं जो इस सेठ के जैसे कंजूस था। जो अपने बचे पैसे बचाने के लिए कुछ भी कर सकता था।

अगर उसका जवाब हां है तो उसे यह कहानी जरूर भेजें और एक कमेंट करें उसका नाम तथा अगर कोई आपके पैसे वापस नहीं करता है तो आप उसे या कहानी दे सकते हैं जैसे उसे शर्मिंदगी महसूस होगी और वह आपके जो भी पैसे होगा उसे रिटर्न कर देगा।

शिक्षा :– {Desi Kahani}

इस Desi Kahani कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने पैसे को कैसे खर्च करना है और अपने पैसे के खर्च को कैसे मेंटेनेंस करना चाहिए यह बात आप इस कंजूस सेठ से समझ सकते हैं माना कि वह सेट गलत किया है लेकिन यह हमें एक उचित शिक्षा प्रदान करती है।

रोचक कहानी इन हिंदी {Desi Kahani}

भारत और पाकिस्तान के दो जोड़ों की कहानी {Desi Kahani}

यह बात हम लोगों को पूरी तरह से जानकारी है कि 1947 से पहले भारत और पाकिस्तान दोनों एक ही मातृभूमि के हिस्सा थे। और वे दोनों एक ही संस्कृति भाषा और इतिहास से जुड़े हुए थे।

धीरे-धीरे सामाजिक और राजनीतिक कारणों से भारत की पृष्ठभूमि में तनाव होने लगा। ओरिया तनाव केवल राजनीतिक और सामाजिक ओ तक नहीं दिया एक व्यक्तिगत स्तर पर भी पहुंच गया। और 1947 में भारत और पाकिस्तान के रूप में 2 देशों में विभाजित हो गया और एक देश से दूसरे देश में आना जाना पूरी तरह से बैन हो गया।

Desi Kahani – 10+ देसी कहानी जरूर पढ़ें {Part 2}}
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लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण एक बात है कि भारत से पाकिस्तान एक युवक पहुंचा। उसका उद्देश्य था भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच समझौते को प्रोत्साहित करना। लेकिन दुर्भाग्य की बात है उस युवक के पाकिस्तान पहुंचते हैं उसकी नजर एक सुंदर लड़की पर पहुंचती है।

जो पाकिस्तान के आज स्थानीय बाजार में कुछ कपड़े खरीदने आई हुई थी। फिर उन दोनों के बीच वार्तालाप होता है और फिर उन दोनों के बीच एक अलग ही संबंध स्थापित हो जाता है।

वे दोनों विभिन्न प्रकार की संस्कृति और समृद्धि तथा साधारण वेशभूषा से भी भिन्न होते हैं। लेकिन उनके बीच की तारीख है कुछ बातें और भी कुछ बहुत सी चीज संभावनाएं जो एक समान होती है।

लोकप्रिय Desi Kahani Part 6 — Click Here 

अब धीरे-धीरे उनकी मुलाकात और बातें प्यार में तब्दील हो जाता है। और वे एक दूसरे के साथ अपने स्मृतियां सपने और अपनी इच्छाएं साझा करते हैं। अब उनकी यात्रा भारत और पाकिस्तान के बीच सख्त संबंधों को ध्यान में रखते हुए चालू होती है।

वक्त बीतता जाता है और उनकी मिलकर के बातें करना धीरे-धीरे प्यार में तब्दील होता गया और वह एक दूसरे देश को नजर अंदाज करते हुए अपने में संबंध स्थापित कर लिए।

फिर उन्हें एक दिन यह समझ आता है कि अब हम दोनों को मिलकर के अपनी पीढ़ी को आगे बढ़ाना चाहिए। और उन्होंने अपने प्रेम को अपने देशों के बीच बांध बनाने का निर्णय लिया।

उन्होंने लगातार कोशिश करने के बाद वह दोनों भारत आने में सक्षम हुए। और वे दोनों भारत और पाकिस्तान के बीच सशक्त नियमों और कानूनों के विरुद्ध एक मिसाल बनते हैं। और इन दोनों का नाम सीमा हैदर जो कि एक पाकिस्तानी महिला है और भारत के युवा बिरजू सिंह जो एक दूसरे से संबंध स्थापित किए थे।

शिक्षा:–{Desi Kahani}

इस Desi Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भारत और पाकिस्तान के कितना अभी कठोर और नियम कानून मजबूत होने के बावजूद भी कोई भी अपने दोस्त या अपनी प्रेम को जरूर पा सकता है उसके लिए कोई भी निश्चित सीमा जरूरी नहीं होती।

छोटी नैतिक कहानी {Desi Kahani}

भावुक कर देने वाली पिता जी की  Desi Kahani

एक समय की बात है एक दुष्ट बेटा अपने आप को अनाथ आश्रम में छोड़ आया था। और साथ में अपने बाप के सभी कपड़े तथा उनके लिए जरूरी कुछ सामान भी लाया था। फिर बेटे ने अनाथ आश्रम के मैनेजर से सारी बातें कर लिया। और वह अपने बाप को वहीं पर छोड़ कर के चला जाने लगा।

उसका बेटा अभी अनाथ आश्रम के बाहर निकला ही था कि उसका फोन बजा। वह फोन उसकी पत्नी का था जो दूसरी तरफ से उसको कह रही थी…… वापस आने से पहले कह देना ससुर जी से की किसी छुट्टी या त्योहार में घर आने की जरूरत नहीं है। अगर वह नहीं आएंगे तब भी चलेगा। और आप वहीं पर खुशी से रहिए और हमें यहां पर सुखी रहने दीजिए।

Desi Kahani – 10+ देसी कहानी जरूर पढ़ें {Part 2}}
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अपने फोन को रख कर वह वापस अनाथ आश्रम में जाता है। तभी बेटे की नजर उसके बुड्ढे पिता पर पड़ती है। जो अनाथ आश्रम के मैनेजर से हंस-हंसकर के बातें कर रहे थे। और वे काफी खुश भी लग रहे थे। उसके पिता यह सोच में पड़ गए कि वह इस मैनेजर को कैसे जानते हैं।

थोड़ी देर इंतजार करने के बाद जब उसके पिता मैनेजर से दूर जाते हैं। तब उनके बेटा मैनेजर के पास पहुंच जाता है। और वह मैनेजर से पूछता है कि आप मेरे पिताजी को कैसे और कब से जानते हैं। तभी मैनेजर बेटे को बताता है कि मैं तुम्हारे पिता को कई सालों पहले से जानता हूं। जब वे अनाथ आश्रम में एक अनाथ बच्चों को गोद लेने आए थे।

बच्चों के लिए Desi Kahani Part 7 — Click here 

दोस्तों कुछ समझ में आया। अब आप ही बताइए सच में अनाथ कौन था। वह बेटा जो अपने बाप द्वारा बीना उसके बताए। किए गए उपकार के बदले उनके आखिरी समय में इस तरह का ठोकर मारते हैं। या वह पिता जो एक अनाथ आश्रम के बच्चे को बीना निस्वार्थ भाव से इतना प्यार दिया जितना की दूसरा कोई नहीं।

फिर वह यह सच्चाई जानकर आश्चर्य हुआ। और अपने पिता जी के लिए एक बहुत ही अच्छा खासा रहने का व्यवस्था किया और उनकी देखभाल करना प्रारभ कर दिया और अपनी पत्नी को पूरी खयाल रखें यह बोला।

शिक्षा:  {Desi Kahani}

इस Desi Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने माता – पिता की सेवा करनी चाहिए। क्युकी आपको यह बात नहीं पता होगा कि वह तुम्हारे लिए क्या –क्या छुपा कर तुम्हें इतना बड़ा किया।

उन्होने कितने बलिदान और कितने त्याग किया होगा। उन्होने आपके लिए जो आप लोगों को नहीं मालूम होगा। इस लिए बूढ़ा होने पर अपने पिता का ध्यान रखें तभी आपके बच्चे भी आपके खयाल रखेंगे। और कॉमेंट्स में बताए कि यह कहानी आपको कैसी लगी। जो भी अपने पिता का ध्यान नही रखता है उसे यह आर्टिकल्स ज़रूर भेजे ताकि वह भी ध्यान रखें और आप भी पुण्य कमा सकते हो ।

शिक्षाप्रद कहानियां {Desi Kahani}

लालची किसान (Greedy Farmer){Desi Kahani}

यह कहानी पूर्वी भारत के एक किसान की हैं। वह किसान अपनी पत्नी के साथ एक गांव में रहता था। तथा उस किसान के पास एक खेत का छोटा टुकड़ा लगभग 1.5 बीघा भूमि थी। और उस पर वह मेहनत के साथ सब्जियां को उगाया करता था। और फ़िर उस सब्जियों को पास के बाजार में बेच देता था।

उसी गांव में एक छोटा सा तालाब था। जिनके पास एक सुंदर मंदिर बना हुआ था। और उस गांव के लोग उस तालाब को पूजते थे। सभी इस गांव के लोग उस तालाब में मछ्ली और फिर उसके किनारे लगे हुए पेड़ों के फल को चढ़ाया करते थे। इसलिए सभी लोग को अपने निजी स्वार्थ के लिए उस तालाब और फल का उपयोग करना अच्छा नहीं समझते थे।

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एक दिन की बात है किसान मंदिर को पार कर रहा था ही तभी उसने देखा कि तालाब के किनारे आम के पेड़ पर बहुत ज्यादा ही सुंदर – सुंदर आम के रसीले फल लटके हुए हैं। फिर किसान ने अपने चारों ओर देखा तो उसे कोई वहा दिखाई नहीं पड़ रहा था।

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इस समय का फायदा उठाते हुए वह किसान जल्दी से उस आम के पेड़ पर चढ़ गया। और जल्दी से पेड़ से एक आम को तोड़ लिया । और फ़िर उसे धोने के लिए सरोवर के किनारे चला गया। वह किसान जैसे ही उस सरोवर में गया।

तो किसान ने देखा कि बहुत सारी मछलियां इस तालाब में तैर रही है। और वह किसान इस खुशी से पागल होकर 10 मछलियों को पकड़ कर वह अपने घर खुशी – खुशी वापस चला गया।

बड़े ही उत्साह के साथ घर पहुंचने पर उसने सभी मछलियों को तुंरत अपनी पत्नी को दिया। और उसे बोला कि इसे तुम बहुत ही स्वादिष्ट खाना तैयार करो। लेकीन जब किसान की पत्नी ने पहला टुकड़ा खाया तो वह तुरन्त वहीं पर बेहोश हो गई। किसान की पत्नी जैसे ही बेहोश हुए थे। की पीछे से एक आवाज आई।

वह आवाज पता नहीं किसकी थी। तो आवाज ने कहा कि आज तुम्हारी लालच की सजा मिल गया। किसान ने अपनी गलती के लिए उस आवाज से माफी मांगने लगा। और फिर उनसे अपनी पत्नी को बचाने का अनुरोध भी किया। फिर वह आवाज ने उस किसान को आवाज आदेश दिया कि मछली बनाने के लिए इस्तेमाल किए हुए सभी बर्तन को तुम उसी तालाब में फेक कर आ जाओ।

फिर किसान ने आवाज की कही गई बातों को माना और सभी बर्तनों को उस तालाब में फेक दिया। और फ़िर इधर किसान की पत्नी सुनंदा बेहोश से होश आया और वह उठ कर खड़ी हो गई।

शिक्षा:– {Desi Kahani}

इस Desi Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी चोरी नहीं करनी चाहिए। और हमेशा नेक रास्ते पर चलते हुए अपनी जीवन यापन करना चाहिए।

प्रेरक कहानी छोटी सी {Desi Kahani}

दो मित्रो की सच्ची मित्रता {Desi Kahani}

इस कहानी को मुखायत: उत्तर भारत से लिया गया है जिसमे एक राजा था और वह अपने मंत्री के साथ उसकी बहुत ही गहरी दोस्ती थी। उनका कही भी आना जाना और कोई भी काम हो एक दूसरे से सलाह लेकर करना। बहुत ही घनिष्ट मित्र हो गए थे।

उन राजा और मंत्री के साथ साथ उनके बेटे भी एक साथ बड़े हुए और वे दोनों भी एक दूसरे के दोस्त बन गए। एक दिन की बात है राजा के बेटे और मंत्री के बेटे दोनों जांगल में शिकार करने गए हुए थे। और उन्हे रास्ते में बहुत जोर से प्यास लगी। और वे अभी कभी थक भी गए थे।

Desi Kahani – 10+ देसी कहानी जरूर पढ़ें {Part 2}}
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फिर उन दोनों ने एक पेड़ के नीचे आराम करने का फैसला किया। और फ़िर मंत्री का बेटा पानी की तलाश करते हुए एक गहरी जंगल में चला गया। तभी उसे एक झरने की गिरने की आवाज़ आ रही थीं। वह उस झरने के पास पहुंचा तो देखा कि एक बहुत ही सुन्दर सुशील इतनी सुन्दर की आप इस बात को समझ सकते है।

लेकीन समस्या यह थी कि वह सुन्दर परी के पास एक शेर बैठा था। वह बहुत ही सावधानी पूर्वक धीरे से उस झील से पानी लिया और फिर वह अपने दोस्त के पास वापस लौट आया। उसने यह पूरी घटना को राजा के बेटे को बताता है। और फिर उसे उस झरने के पास लेकर जाता हैं। वहा पर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि शेर उस परी की गोद में सो रहा था।

राजा के बेटे ने परी को महल ले जाने का फैसला किया। लेकीन मंत्री का बेटा शेर के साथ ही रहा। थोड़ा देर बाद जब शेर उठा तो देखा कि लडका है। तो वह शेर से कहा कि मेरा मित्र उस परी को अपने महल दिखाने के लिए ले गया है।

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शेर फिर हंसा और बोला कि उसका दोस्त परी को महल में ले गया है। लेकीन शेर फिर से जोर से हंसने लगा। और कहा कि अगर वह राजा के बेटा तुम्हारा सच्चा दोस्त होता तो तुम्हें यहां पर शेर के साथ अकेला क्यो छोड़ता। वह तुम्हारा सच्चा दोस्त नहीं है।

फिर शेर ने उसे तीन महान मित्रों की कहानी , एक राजा, और एक पुजारी तथा एक भवन निर्माता की कहानी सुनाना शुरू किया। जिन्होंने दोस्ती का सही अर्थ दिखाया और फिर बताया कि वो लोग अंत तक एक दूसरे के साथ कैसे रहे थे।

शिक्षा:{ Desi Kahani}

इस Desi Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी अपने दोस्त का चयन बहुत ही अच्छे से करना चाहिए। नहीं तो वे तुम्हारे लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है।

सफलता की प्रेरक कहानी {Desi Kahani}

चंद्र ग्रहण का रहस्य { Desi Kahani }

यह कहानी दक्षिण पूर्व भारत की लोककथा से ली गई है। बहुत समय पहले की बात है आदिवासी समूह में एक बहुत ही सुंदर सुविधा नाम की लड़की रहती थी। एक बार एक बाघ ने उस लड़की को पकड़ लिया और गुफा में ले गया। जब भूखे बात ने उस लड़की को देखा, तो उसे इस बात की एहसास हुआ कि वह लड़की बहुत छोटी है। जो उसकी भूख को संतुष्ट नहीं कर पाएगी। तब बाघ ने फैसला लिया कि मैं इस लड़की को बड़े होने तक का इंतजार करने के लिए अपने पास रख लेता हूं।

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अब बाघ उस लड़की को बहुत कुछ भोजन दे ताकि वह जल्दी जल्दी खा कर के वह बड़े हो जाए और उस लड़की को यह आभास नहीं था कि मुझे इसी के लिए इतना ज्यादा यह खिलाता पिलाता है। और फिर वह सुविधा लड़की धीरे-धीरे उस गुफा को ही अपना घर जैसा महसूस करने लगी।

उसी गुफा में एक बहुत ही चालाक चूहा भी रहा करता था। चूहे ने सुविधा को खाने की बात करने को वह सुन लिया था। और फिर तुरंत बाके नहीं रहने पर चूहा सुविधा के पास गया और उसकी पूरी सच्चाई बता दिया। अभी इधर चिंतित सुविधा ने चूहे से उसकी मदद की गुहार लगाई। चूहा ने उस गुफा से बाहर जाने और एक जादूगर मेंढक से मिलने का सुझाव दिया।

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और फिर उन्होंने काफी प्रयास के बाद वहां गुफा से बाहर निकले और फिर मेंढक के पास गए और अपनी समस्याओं को बताएं तो मैं मेंढ़क उनकी सहायता करने के लिए तैयार हो गया। लेकिन वह बदले में सुविधा को अपना सेवक बना लेता है उस जादूगर मेंढक के पास एक जादुई चादर थी।

आप सुविधा मेंढक के पास उसकी सेवक बन करके फस चुकी थी। तो फिर चूहा ने सुविधा को एक बार मेंढक से बचाया। और फिर सुविधा को एक जादुई पेड़ के पास ले गया। उस पेड़ की शाखाएं पूरे नीले आकाश तक पहुंचती थी। आप इधर बाघ वापस गुफा में आ चुका था। जब वहां बाघ ने देखा की सुविधा गायब है। तो फिर भाग बहुत ही ज्यादा क्रोधित हुआ। और जैसे ही सुविधा को वह जादुई पेड़ ने अपनी शाखा पर पहुंच कर नीले आकाश की तरफ किया।

तो नीले आकाश में त्रिपुरा नाम की एक देवी ने सुविधा को अपने यहां आश्रय दिया। जब सुविधा ने देवी त्रिपुरा को मेंढक के जादुई खाल के बारे में बताया। तो उसने उसके खाल को जला दिया। फिर जादुई मेंढक गुस्सा होकर त्रिपुरा देवी से लड़ने के लिए आकाश में आया। और उन दोनों में बहुत ही भयंकर युद्ध हुआ

लेकिन इस समय धरती वासियों ने बहुत ही तेज आवाज में बाल और नगाड़े बजाए जिसे सुनकर के मेंढक वहां से भाग गया। और फिर वहां पर त्रिपुरा देवी की जीत हो गई। इसलिए आज भी इस प्रजाति के लोग सूर्य ग्रहण के दिन ढोल और नगाड़े बजाकर के सूर्य भगवान की मदद करते हैं

शिक्षा:–{Desi Kahani}

इस Desi Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी संस्तुतियों पर कभी संदेह नहीं करनी चाहिए यह संस्कृति हमारे पूर्वजों के द्वारा घटित की गई घटना पर आधारित होती है और उनकी मान सम्मान करना हमारा धर्म होता है।

प्रेरक कहानी इन हिंदी {Desi Kahani}

Desikahani

एक ब्राह्मण और एक नागिन { Desi Kahani}

यह कहानी भारत के दक्षिण मध्य लोककथा से लिया गया है। चक धर्मनाथ नाम के एक गांव में नंद जी नाम के एक पुजारी अपनी धर्मपत्नी और अपने साथ बेटों के साथ रहते थे। वह पुजारी धनी – मनी व्यक्ति था। लेकिन कुछ दुर्भाग्य के कारण उसे पैसे की समस्या उत्पन्न हो गई। और उस पुजारी की स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें अपने जीवन यापन करने के लिए अतिरिक्त काम करने की आवश्यकता पड़ गई थी।

पुजारी जी “अपनी जीवन यापन करने के लिए जंगल से बांस की लकड़ी इकट्ठा करते थे और उसे बाजार में बेच करके जो भी पैसा मिलता था उससे अपनी जीवन –  यापन करते थे। एक दिन की बात है पुजारी जी जंगल में लकड़ी बिनने गए हुए थे । और उस जंगल में आग लगी हुई थी और फिर उस आकर बीच एक छोटा –  सा नाग फंसा हुआ था। और पुजारी ने सोचा कि मैं उस नाग को वहां से निकाल दो ताकि उसकी जान बच जाए।

फिर नाग ने यह महसूस किया कि पुजारी उसका मदद करने की कोशिश कर रहा है। और उसे काटना गलत बात होती है। नागिन ने पुजारी की इस दयालु भाव को देखते हुए अपने परिवार की रक्षा करने के उपहार में पुजारी को दो रत्न भेट दिया। फिर पुजारी ने उस नाग की सम्मान के लिए वहां पर एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया।

शिक्षा: {Desi Kahani}

इस Desi Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर आप किसी मजबूर व्यक्ति को उसकी रक्षा करेंगे तो उसका आपको उचित परिणाम मिलेगा इसलिए कभी भी आप किसी की बुरा व्यवहार न करें।

दोस्तों इस Desi Kahani में दी गई कहानी अगर आपको पसंद आती है तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट में करें कि इसमें से कौन सी कहानी आपको सबसे अच्छी लगी जिससे मुझे लगे कि मैं और भी इससे अच्छी अच्छी कहानियां लिख सकूं आपके लिए और आपकी शिक्षा अधिक बढ़ सके।

धन्यवाद,

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