Bhoot Ki Kahani ~ Best 5 Bhoot ki Kahani (Desi Kahani)
Bhoot Ki Kahani ~ Best 5 Bhoot ki Kahani (Desi Kahani)

हर कोई चाहता है कि उनके बेटे साहसी और एक ईमानदार आदमी बने, इस Chudail Ki Kahani In Hindi की कहानी के माध्यम से आपके बच्चों के लिए लाया हूं।

हर माता-पिता और दादा-दादी का यह सपना होता है कि वह अपने बच्चे को अपने काबू में कैसे करें बच्चे बहुत ही ज्यादा नटखट होते हैं इसलिए उन पर काबू पाना बहुत ही कठिन होता है।

Chudail Ki Kahani In Hindi
Chudail Ki Kahani In Hindi

इसलिए हम इसमें Chudail Ki Kahani In Hindi की कहानी लाया हूं जिसे सुनकर के आपके बच्चे थोड़ा  डर जाएंगे, जिससे आप लोग उन्हें आसानी से अपने द्वारा कही हुई सभी बातों को मनवा सकते हैं तो चलिए शुरू करते हैं—>

Chudail Ki Kahani In Hindi

रोटी चुराने वाली Chudail Ki Kahani In Hindi

चक धर्मनाथ नामक गांव में एक घर था। जिस घर में वहां पर कोई नहीं रहता था। लेकिन उस घर के सामने गांव के सभी लोग अपने घर की बची हुई रोटियों को लाकर के वहां पर रखते थे।

गांव वालों के देखते ही देखते थोड़ी देर में वह रोटियां गायब होती जाती थी। सब को यह बात पता था कि उस घर में एक चुड़ैल है ,जो रोटियां खाती है। अगर जिस दिन भी किसी घर से उस घर के सामने अगर रोटियां नहीं आती थी।

तो चुड़ैल उस घर में अगले दिन खाना नहीं बनने देती थी । और उस घर में अजीबो अजीबोगरीब की आवाज सुनाई पड़ती थी।

तभी एक समय की बात है ,कि उस गांव में एक नया परिवार रहने के लिए आता है। उस परिवार में उनकी अम्मा और उनका एक बेटा मोहन रहता था।

अम्मा ने कहा: बेटा तुम जाकर के बाजार से खाना बनाने की सामान लेकर के आ जाओ।

मोहन ने कहा: ठीक है मैं अभी जाता हूं  मां।

फिर मोहन जैसे तैसे करके मार्केट से सामान ले करके आता है ,और उसकी मां खाना बनाने में जुट जाती है। यह लोग इस गांव में नहीं थे और उन्हें चुड़ैल के बारे में कोई बताता भी नहीं था। कि उनको उस घर के सामने रोटी रखनी है।

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अब धीरे-धीरे अम्मा खाना भी बना देती है। और मोहन और अम्मा दोनों खाना खाकर के आराम करने लगते हैं। लेकिन अगले ही दिन जब अम्मा खाना बनाने जाती है। तो वह जैसे ही रोटी बनाती है वह रोटी गायब हो जाती है और उनके घर में अजीबो सी आवाज आने लगती है।

फिर अम्मा बोलती है””: मोहन – मोहन

मोहन ने बोला: क्या हुआ मां ,इतना घबराई क्यों हो।

अम्मा ने बोली: बेटा मैं रोटियां बना रही हूं और रोटियां गायब होती जा रही है। और इधर कुछ अजीब सी आवाजें आ रही है जैसे कोई हंस रहा हो।

मोहन: ऐसा कैसे हो सकता है मां तुम मेरे सामने रोटी बनाओ मैं देखता हूं।

जैसे ही अम्मा ने रोटी बनाई वह रोटी गायब हो गया। फिर दूसरे कमरे में हंसने की आवाज आती है तब मोहन चौक जाता है।

मोहन: अरे अम्मा,यह कैसे हो सकता हैं । कहीं इस घर में कोई तो है तो नहीं।

फिर दोनों बहुत ही घबरा जाते हैं, और गांव के पास मंदिर में जाते हैं। फिर वहां पर उपस्थित पंडित से अपनी सभी समस्याओं को बता देते हैं।

फिर पंडित ने कहा : मोहन बेटा तुम गांव के बीचो-बीच घर है वहां पर तुम दो चार रोटी सुबह और शाम ले जा कर के रख दिया करो। फिर तुम उस घर के सामने जाकर के कहना कि मुझे माफ कर दो मैं अपने घर में रोटी बनते ही सबसे पहला रोटी आपको यहां पर लाकर करके दे दूंगा।

मोहन ने बहुत ही आश्चर्य से कहा लेकिन पंडित जी ऐसा क्यों।

जब मोहन ने इस बात को पूछा तो पंडित जी ने कहा कि बहुत समय पहले की बात है उस घर में एक औरत रहती थी। उस घर में खाने के लिए कुछ नहीं था,, तथा उसके पास कोई काम भी नहीं था। तो वह रोज लोगों के घर से रोटियां चुरा लिया करती थी।

एक दिन की बात है, वह औरत सरपंच के घर में रोटी चुरा रही थी ,तभी सरपंच ने उसे देख लिया। और फिर सरपंच ने गुस्सा होकर उसे यह सजा दी कि उसे अब से कोई खाना नहीं देगा। और फिर उसी घर में उसे बंद करवा दिया गया।

और उस औरत की मृत्यु उसी घर में हो गई। और फिर वह चुड़ैल बन गई और फिर सभी लोग उस घर के समा सामने अपने – अपने घर से रोटी ला करके रख देते हैं। ऐसा जो नहीं करता है, वह चुड़ैल उसे बहुत ज्यादा परेशान करती है।

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मोहन: फिर आप लोगों ने कुछ किया नहीं की जिससे उसको इस योनि से मुक्ति मिल जाए।

पंडित जी ने कहा हमने बहुत प्रयास किया लेकिन वह इस गांव से जाने का नाम नहीं ले रही है।

मोहन ने पंडित जी से कहा इतना कुछ बताने के लिए धन्यवाद ठीक है मैं चलता हूं।।

फिर मोहन अपनी अम्मा को लेकर के घर आ जाते हैं और पंडित जी के द्वारा बताए गए नियम को पालन करने की कोशिश करते हैं।

मोहन ने अपनी अम्मा से कहा अम्मा आज कुछ अच्छा सा खाना बनाओ जैसे हलवा, पूरी, खीर, और भी कुछ।

फिर अमर ने आश्चर्य से कहा कि आज कुछ है क्या बेटा।

मोहन: नहीं अम्मा,, अब बस आप रोज रोज अच्छा अच्छा खाना बनाइए , कुछ दिन और मुझे एक और अलग ही थाली परोस दीजिए।

अम्मा: ठीक है मोहन ? अम्मा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मोहन यह सब क्या कर रहा है।

मोहन: अम्मा आप परेशान मत होइए ,मैं यह खाना इसलिए बनवा रहा हूं कि जब मैं रोटी वाली चुड़ैल को यह खाना दूंगा ,तो वह कितना खुश हो जाएगी।

अम्मा: हा,,बिल्कुल , फिर मोहन थाली लेकर के जाता है और उस घर के सामने बैठ जाता है और फिर कहता है कि………

मोहन: चुड़ैल अम्मा आप बाहर आ जाओ मैं तुम्हारे लिए अच्छा अच्छा पकवान लाया हूं। मैं तुमको अपने हाथों से खिलाऊंगा अम्मा।

इतने में चुड़ैल मोहन के सामने आती है और मोहन उसको अपने हाथों से खाना खिलाता है। और फिर सारा गांव उसको देखता है। फिर मोहन रोज चुड़ैल को पूछता है कि आज उसे खाने में क्या खाना है और उसे अच्छा अच्छा खाना खिलाता है।

मोहन: चुड़ैल अम्मा तुम यह बताओ कि यहां तुम अकेले– अकेले कैसे रह लेती हो। तुमको यह बुरा नहीं लगता है।

चुडैल अम्मा: लगता तो है पर मेरे साथ कौन रहेगा बेटा ?

मोहन ने कहा आप वहां क्यों नहीं चली जाती जहां आपके जैसे ही लोग रहते हैं। फिर चुड़ैल ने कहा कि हां बेटा तुम बात तो सही कह रहे हो। और आपको वहां अच्छा  भी लगेगा।

चुड़ैल अम्मा: एक काम करो बेटा,, वह सामने जो लोटा है उसे लेकर के तुम नदी में बहा दो। जिससे मुझे मुक्ति मिल जाएगी। अब मुझे इस गांव से तथा इस गांव वालों से कोई परेशानी नहीं है।

मोहन ने कहा: ठीक है अम्मा।

फिर मोहन चुड़ैल के द्वारा बताए गए काम को वैसे ही सेम करता है और चुड़ैल को मुक्ति मिल जाती है और गांव वालों को रोज रोटी देने से भी जान बचती है।

शिक्षा —(Chudail Ki Kahani In Hindi )

इस Chudail Ki Kahani In Hindi की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि क्रोध के कारण हर समय नुकसान ही होता है अगर प्यार से कोई काम किया जाए तो अवश्य ही वह पूरा होता है।

hindi chudail ki kahani

बच्ची बनी चुड़ैल Chudail Ki Kahani In Hindi

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में सोहन नाम का एक आदमी रहता था। और वह खिलौने बनाया करता था। तथा एक पुराने शहर में बहुत से लोग रहते थे और वहीं पर एक घर था। और उस घर में कोई नहीं रहता था। और वहां के बड़े बुजुर्ग लोग कहते थे कि उस घर में एक चुड़ैल रहती है।

लेकिन बहुत दिनों के बाद आज उस घर में एक परिवार रहने के लिए आया है। और उस परिवार में तीन ही लोग थे ।सोहन, सुमिता और सोनाली। और उन लोगों को इस घर के बारे में मालूम नहीं था।

Chudail ki Kahani
Chudail Ki Kahani In Hindi

सोहन – देखो कितना सस्ता और कितना बड़ा घर मिला है हमें। बताओ तुम इतना  भीड़-भाड़ इलाके वह में कोई देता है इतना सस्ता घर।

सुमिता: सच में हमने इसके बारे में कभी नहीं सोचा था कि आप इतना बड़ा घर की तलाश कर रहे हैं। हमको तो लगा था कि मानो कोई छोटा-मोटा आप घर ढूंढ रहे होंगे।

सोहन: हां हां हा ह तुम भी न बस, अरे मैंने तो तुमको भी ढूंढा है।

सुमिता (शरमाते हुए)– अजी, अब बस भी करो।

सोनाली:– और मुझे किसने ढूंढा है पापा ?

सोहन: आपको आपके पापा और मम्मी दोनों ने हा हा हा हा……

सोनाली: मुआआह आप मेरे सबसे अच्छे पापा हों।

सोहन ने अपनी पत्नी से कहा सुनती हो जी सुमिता बोली हां जी बोलिए। फिर सोहन ने मजा किए कि घर तो इतना बड़ा है लेकिन परिवार तो थोड़ा तो सुष्मिता बोली आप भी ना ।

हर किसी मध्य वर्गीय  परिवार की तरह इस परिवार की खुशियां छोटी-छोटी बातों में मिल जाया करती थी। लेकिन शायद उस घर के पंखे पर बैठी उस चुड़ैल को वह अच्छा नहीं लग रहा था।

वह चुड़ैल जोर से हंसते हुए हा हा हा हा हा हा आज के बाद से या खुशियां तुमको नहीं मिलने वाली है हा हा हा हा हा हा।

ऐसा कहते ही वह चुड़ैल सोनाली के शरीर में घुस जाती है। और कुछ देकर बात सोनाली के चिल्लाने की आवाज आती है।

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फिर सोहन घबरा गए और वे सोनाली सोनाली तुम कहां हो या कहते हुए उसे खोजने लगे। और उसके साथ में सुष्मिता भी सोनाली को ढूंढ रही थी।

सोनाली ने रोते हुए कहा….. कि पापा पापा मुझे बचा लो मुझे यहां पर बहुत ज्यादा डर लग रहा है। कुछ देर बाद सोहन को एहसास हुआ कि यह आवाज अलमारी के पीछे से आ रही है।

सोहन ने जैसे ही उस अलमारी के दरवाजे को खोला और कहा कि बेटी सुना ली तुमने तो मुझे डरा ही दिया था। फिर सोनाली ने उन्हें गुड नाईट कहा।(Chudail Ki Kahani In Hindi )

फिर सुनीता ने गुस्से से कहा इसने तो मुझे डरा ही दिया था एक तो या नया घर है और फिर यह नाटक।

सोहन ने कहा अरे आज तो बहुत ही ज्यादा थक गए हैं हो सकता है कि यह नींद में चिल्लाई हो सुमिता चलो अब तुम भी सो जाओ।

लेकिन कुछ देर के बाद ही सोनाली उठ जाती है ,और फिर वह उस घर में चलना शुरू कर देती है। अगले दिन जब सोहन और सुमिता उठते हैं तो देखते हैं कि उनका सारा राशन पानी फर्श पर गिरा पड़ा है।

सुमिता ने गुस्सा में कहा कि सोनाली ने तो दिमाग ही खराब कर दिया है बताइए यह रात में क्या किया है।

सोहन ने कहा अरे रहने दो अब मैं जाता हूं बाजार से और सभी राशन पानी को लेकर के फिर से आता हूं। और तुम इसको डांटना मत ,फिर दूसरे दिन रात हो जाती है और सभी लोग सो जाते हैं।

चुड़ैल ने हा हा हा हा करते हुए कहा कि कल तो इन लोगों की शक्ल देखने जैसा था। वह तो अभी शुरुआत थी और आज मैं दिखाता हूं कि मैं कौन हूं हा हा हा हा।

ऐसा कह कर के फिर चुड़ैल सोनाली के शरीर में घुस जाती है।

तभी सुमिता चिल्लाने लगती है सोहन सोहन मुझे बचाओ मुझे बहुत ज्यादा डर लग रहा है।

फिर सोहन ने कहा तुम कहां हो फिर उसने जैसे ही अलमारी खोला वहां पर कोई नहीं था और वह परेशान हो जाता है। और कहता है कि ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा है अभी।

लेकिन सोहन जैसे ही बेड के नीचे देखता है तो वहां पर सुमिता सोई हुई थी। राजेश सुनीता को बेड पर लेट देता है और सारी रात अपनी बच्ची को देखता रहता है।

सोहन को लग रहा था कि अगर मैं सो गया तो पता नहीं आगे क्या देखने को मिलेगा।

फिर अगले दिन सोहन ने कहा कि मैं जाड़ा बाजार से सामान ले करके आता हूं। सुमिता ने कहा ठीक है जी। फिर सोहन ने कहा क्या हुआ तबीयत ठीक है तुम्हारी तो सुमिता ने बोला कि पता नहीं रात से पूरे शरीर में दर्द हो रहा है।

तो फिर उधर से सोनाली बोलती है कि पापा मेरे भी शरीर में परसों से बहुत ही ज्यादा दर्द हो रहा है।

अब सोहन पूरी तरह से परेशान हो गया था और उस रात वह पूरी तरह जाग करके निकाला। और अगले दिन वह काम पर जाता है तो उसके दोस्त सलीम उससे पूछता है।

सलीम ने कहा क्या बात है सो हम तुम्हारी नींद पूरी नहीं हुई क्या रात को तुमको अभी झपकी आ रही है और शरीर में थोड़ा थकावट महसूस कर रहे हो।

फिर सोहन ने बताया क्या करूं दोस्त,, ऐसा कहते ही सोहन के आंखों में आंसू आ जाता है और वह अपनी पूरी बात सलीम को बता देता है।

फिर सलीम ने सोहन से कहा कि तुम मुझे अपने घर ले चलो। और सोहन सलीम को लेकर क अपने घर पर आता है। और सलीम जैसे ही घर में प्रवेश करता है कि अचानक वहां तेज हवा शुरू हो जाती है। और फिर सारे घर का सामान गिरना शुरू हो जाता है।

सोहन ने कहा यह सब क्या हो रहा है दोस्त तो फिर सलीम ने कहा कि तुम चिंता ना करो मैं हूं ना तभी घर के कोने से आवाज आती है। वह चुड़ैल बोलती है तुम क्यों आए हो यहां फिर सलीम ने कहा कि अपने भाई की मदद करने के लिए।

चुड़ैल (Chudail Ki Kahani In Hindi )ने गृहस्ती हुए कहा कि यह घर मेरा है और मैं यहां वर्षों से रह रहा हूं और मैं यहां पर किसी को भी नहीं रहने दूंगी।

फिर सलीम ने कहा कि तुम्हें कौन मना करता है ।तुम यहां पर रहो लेकिन इतने बड़े घर में अकेले कैसे रहोगी। फिर चुड़ैल ने कहा कि हां मैं इसी घर में अपनी जान दी थी। और वह जो सामने दीवार है मैं उसके पीछे रहती हूं।

चुड़ैल के ऐसा कहते ही सलीम ने सोहन को बोल कर के उस दीवार को तोड़वा दिया। तभी उस दीवार के पीछे एक पिजड़ा मिलता है।

सोहन और सलीम उस दूसरे पिजड़े को लेकर के जंगल में जाकर उसे जला देते हैं। और फिर उस दिन के बाद से उस घर में चुड़ैल का साया हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।

और फिर कुछ दिन के बाद सोनाली के एक भाई का जन्म होता है। और अब पूरा परिवार खुशी खुशी के साथ रहता है लेकिन एक रात।

चुड़ैल ने हा हा हा हा करते हुए कहा तुम्हें क्या लगा मैं चली गई हूं। यह अभी सो रहे हैं,, सोने दो बेचारे को। मैं फिर से आऊंगी और जो मेरे रास्ते में आएगा उसे मै परेशान करूंगी। यह का करके हुआ चुड़ैल हा हा हा करते हुए चली जाती है

शिक्षा — (Chudail Ki Kahani In Hindi)

इस Chudail Ki Kahani In Hindi की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि परिस्थिति कितनी भी बड़ी क्यों ना हो उसकी समस्या का हल जरूर निकलता है बस आपको धैर्य के साथ विश्वास करना होता है।

Chudail ki kahaniyan(Chudail Ki Kahani In Hindi )

Chudail Ki Kahani In Hindi in ट्रैन में चुड़ैल

एक समय की बात है एक आदमी ट्रेन में बैठ कर अपने किसी का इंतजार कर रहा था।

मोहन:– पता नहीं यह कहां रह गई।

तभी उनके फोन पर मैसेज आता है मुझे माफ कर दो मोहन। पापा की अचानक सी तबीयत खराब हो गई है जिसके कारण उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा है। मैं आपसे इस समय मिलने नहीं आ सकती कॉल करती हूं।

मोहन:–अरे यार अब तो अकेले ही इस ट्रेन में सफर करना पड़ेगा।

तभी उसने देखा कि उसके सामने वाली सीट जो अभी तक खाली पड़ी है। उस पर एक बहुत ही खूबसूरत औरत आकर बैठ जाती है। और उसने काले रंग की साड़ी पहनी हुई है। और माथे पर एक काले रंग की बिंदिया भी लगाई हुई है।

Bhoot Ki Kahani ~ Best 5 Bhoot ki Kahani (Desi Kahani)
Bhoot Ki Kahani ~ Best 5 Bhoot ki Kahani (Desi Kahani)

मोहन:– मौसम कितना बढ़िया है, अब तो थोड़ा-थोड़ा बारिश भी चालू हो गई है। अगर इससे बातें शुरू हो जाए तो सफर अच्छे से कट जाएगी।

तभी वह औरत अपनी बाइक की जीत खोलने की कोशिश कर रही थी। लेकिन उससे जीप नहीं खुलती। तब मोहन ने कहा लाइए मैं आपकी हेल्प कर देता हूं। तब वह औरत मोहन को बैग दे देती है और मोहन उसका जीप खोल देता है।

फिर औरत ने बड़े ही प्यार से कहा“” धन्यवाद पता नहीं यह जीप कैसे जमा हो गई थी।

फिर मोहन ने बड़े ही प्यार से बोला आप कहां जा रही हो ? तब वह औरत बोलती है कि मैं अपने दोस्त से की शादी में जा रही हूं आगरा के पास।

तभी मोहन मुस्कुरा करके बोलता है। अरे वाह मैं भी अपने ही दोस्त के शादी में जा रहा हूं और मैं दिल्ली तक जाऊंगा।

औरत ने कहा चलो ठीक है दिल्ली तक तो कोई मिल गया,, जिससे बात करते सफर कट जाएगी।

मोहन:– मोहन ने बड़े ही प्यार से कहा मेरा नाम मोहन है और आपका ?

तब वह औरत बोली मैं एक डायन हूं। यह सुनते ही मोहन अचानक से डर गया।

मोहन:– आ ओ आ ओ डायन(Chudail Ki Kahani In Hindi )

औरत ने बोली आप तो डर ही गए थे मैं तो आपसे मजाक कर रही थी। मेरा नाम असल में सुनीता है। यह सुनकर के मोहन अपने मुंह से सांस को छोड़ता है और चैन की सांस लेता है।

फिर मोहन ने कहा आपने तो मुझे डरा ही दिया था। लेकिन ट्रेन अब चलने ही वाली होती है लेकिन तभी उसी समय सुनैना आ जाती है। और अचानक से उस औरत के बराबर जाकर बैठ जाती है। जिसे देख कर के मोहन चौक जाता है और खुश भी हो जाता है।

फिर मोहन ने कहा कि तुमने तो मैसेज किया था कि मैं नहीं आ सकती तो फिर सुनैना ने कहा अरे मैं तो एक छोटा –  सा मजाक किया था। फिर मोहन ने कहा अरे तुम भी मजाक में ना कुछ भी बोल देती हो।

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फ्री ट्रेन तेजी से चलने लगती है और मोहन ने उन दोनों को एक दूसरे से परिचित कराया। और तीनों मिलकर के बातें करने लगे। तभी एक अधेड़ उम्र का आदमी आता है और वह चिल्ला करके कहता है।

अधेड़ आदमी कहता है कि आज अमावस्या है और इस अमावस्या की रात इस ट्रेन में एक डायन ढूंढती है। तुम सब अपना ध्यान रखना यह का करके वह आगे चला जाता है। तभी ट्रेन में बैठे लोग एक दूसरे से कुछ ना कुछ बोलने लगते हैं।

मोहन ने कहा: ये आदमी ऐसा कोई कॉमेंट करता है।

तभी सुशीला बोली: मुझे तो बस वह पागल बूढ़ा लग रहा था।

सुनैना ने कहा: आज के समय में डायन यह कितना ही अजीब बात है।

एक आदमी सामने वाले सीट पर बहुत देर से बैठा था वह बोर होने की वजह से सिगरेट पीने लगा । जिसका धुआं सुशीला के नाकों तक आ रहा था।

तभी सुनैना बोली भाई साहब ये आदमी कितना बतमिक्ज हैं। ऐसे आदमी को तो गला काट कर मार देना चाहिए।

तभी उसी समय सुशीला अपने बैग से कुछ निकालने के लिए जीप के अंदर हाथ डालती हैं तभी अचानक उनके बैग से एक काले रंग की एक बोलत निचे गिर जाती हैं।

मोहन अपने मन में सोचा की इसके बैग से यह काले रंग की जादू बोतल निकला है। और इसकी बाते भी ठीक नहीं लग रही थीं। और अभी यह उस आदमी को मारने की बात भी कर रही थी। कही यह सुशीला ही तो डायन नहीं है।

अब सुशीला उस बैग को तुरंत अपने बैग में रख दिया। तभी वहां सिगरेट पीने वाला व्याक्ति आगे बढ़ जाता हैं।

अब सुशीला ने कहा माफ कीजिए मैं अभी आता हूं। तभी सुनैना मैं भी चलती हूं,, मुझे भी टॉयलेट जाना है।

वो दोनों वहा से चली गई,, कुछ देर में सुनैना वापस लौट आई लेकीन सुशीला अभी तक नहीं आई थी। सुशीला कहा गई।

तब सुनैना ने बताया कि वह बोली मैं अभी आ रही हूं। थोड़ी देर बाद वह भी वापस लौट आई लेकीन वह आदमी अभी तक वापस नहीं आया था।

अब मोहन को चिंता होने लगी। वह वहा से उठता है। तो वह पीछे टॉयलेट की तरफ़ जाता हैं तो वह देखता है कि सिगरेट पीने वाला व्यक्ति गेट के पास मरा हुआ है।

मोहन चुपचाप टीटीटी के पास जाकर सब कुछ बता देता है। तभी सामने के दरवाजे से सुशीला आती हुई नजर आती हैं।

सुशीला: क्या बात है मोहन आप यहां कैसे रुक गए । तभी उसकी नज़र उस दरवाजे के की तरफ देखती है कि वह सिगरेट पीने वाला आदमी गेट के पास मरा पड़ा हुआ है।

तभी अचानक मोहन टीटी से कहता है कि यही है डायन इस ने ही उस आदमी को मारा है।

सुशीला: यह क्या कर रहे हैं आप लोग मेरे साथ  मोहन और टीटी दोनों उसको पकड़ते हैं। और उसके हाथ पैर को बांध कर वही टॉयलेट में बंद कर देते हैं।

टीटी: इसके बारे में किसी को मत बताना नहीं तो भगदड़ मच जाएगी पुरी ट्रेन में अगले स्टेशन पर हम इसे पुलिस के हवाले कर देगें।(Chudail Ki Kahani In Hindi )

फिर मोहन वापस सुनैना के पास जाकर उसे पुरी बात को बता देता है।

सुनैना: अच्छा हुआ तुम लोग उसे बांध कर टॉयलेट में बंद कर दिया। वरना पता नहीं आज वह किस किस लोगों की जान ले लिया होता।

तभी सुनैना सामने देखती है तो टीटी आता हुआ नजर आता है। वह उसे देख कर पता नहीं क्यों चली जाती हैं।

सुनैना: ओह जरा मैं थोड़ा अभी आती हूं। तभी मोहन सोचने लगा अचानक इसको कहा जानें की जरुरत पड़ गया।

टीटी: वह लड़की जो आपके सामने बैठी थीं वह आपके साथ है मोहन ने कहा : जी हां

टीटी: आप दोनों लोगों की टिकट दिखाए। तभी मोहन अपनी टिकट 🎟️ दिखाते हुए कहा कि उसका टिकट उसी के पास होगा।

टीटी वहा से चला जाता हैं तभी मोहन के मोबाइल पर सुनैना का कॉल आता है और मोहन उसे रिसीव कर अपने कान पर लेता है।

मोहन ने कहा: क्या हुआ सुनैना तुम कहा रुक गई हों।

सुनैना: sorry 😔 मोहन मैं नहीं आ सकी। पापा की तबीयत अगर ठीक होती,,तो मैं जरुर आती तुमको बुरा तो नहीं लग रहा है।(Chudail Ki Kahani In Hindi )

यह बात सुनकर मोहन डर गया और उसकी मोबाइल फोन नीचे गिर पड़ा।

मोहन:ही अगर सुनैना घर पर हैं तो मेरे साथ कौन है।

और वह सामने देखता है तो टीटी भी दिखाई नहीं देता है। और मोहन जल्दी से फोन को उठाकर टॉयलेट की तरफ भागता है। और फिर सुशीला के हाथ पैर खोलकर जल्दी से मुक्त कर देता हैं।(Chudail Ki Kahani In Hindi )

सुशीला: जो लड़की तुम्हारे साथ सफर कर रही है। वही असली डायन हैं। मैने इस ट्रैन के बारे में बहुत पहले से ही जानती हूं। इसलिए मैं उसको मारने के लिए यहां पर आई थी।

मोहन : मुझसे गलती हो गई वह मेरे दोस्त के रुप में आई थी इसलिए मैंने उसको पहचान नहीं पाया।

सुशीला मोहन के साथ सीट पर जाती हैं। और अपने बैग से वहीं काला वाला बोतल निकाल कर उसमें एक लाल धागा बांध दिया। और फ़िर वे दूसरे दरवाजे के तरफ जाते है। जहा पर उसको दिखाई देता है कि टीटी की गर्दन पर सुनैना दांत गड़ाए हुए खड़ी है।

सुनैना उस टीटी का खून पी रही थी। और उसने वह बहुत ही डरावनी लग रही थी । तभी वह अपने असली रूप में आ जाती हैं। और टीटी भी मर चुका था। मोहन टीटी को छुड़ाने की कोशिश करता है। फिर डायन मोहन के साथ उलझ जाती है।

तभी मौका देख कर के सुशीला ने डायन के बाल खींच कर जितने भी उसके हाथ में आता है वह बोतल में बांधे देती है। और वो फिर से कोई मंत्र पड़ती है।

सुशीला: सुशीला ने मंत्र पढ़कर एक आदमी से लाइटर लिया और उस बोतल में आग लगा दिया। और उसके साथ डायन में भी आग लग जाती है और वह टीटी तथा तथा मोहन को छोड़ देती हैं।

डायन के शरीर में आग लग चुका था और वह दरवाजे के रास्ते गिरकर के फ्लाईओवर से गिर जाती है नीचे। और वह जलती हुई बोतल भी सुशीला ट्रेन से बाहर फेंक देती है नदी में और फिर यात्रा करने लगते हैं।

मोहन ने कहा: तो तो तुम तुम

सुशीला: सुशीला बोलती है कि हां मैं ठीक हूं अब आप दोनों लोगों के डरने की जरूरत नहीं है अब आप लोग इस ट्रेन में आराम से यात्रा कर सकते हैं अब वह जिंदगी में कभी भी वह चुड़ैल इस ट्रेन में नहीं आएगी।

धन्यवाद , नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर दें।

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