Bhoot Ki Kahani ~ Best 5 Bhoot ki Kahani (Desi Kahani)Bhoot Ki Kahani ~ Best 5 Bhoot ki Kahani (Desi Kahani)

इस लेख में हम bhoot ki Kahani के बारे में पढ़ेंगे, एक बात हर कोई जानता है कि जब बच्चे ज्यादा नटखट हो तो उस पर काबू पाना माता – पिता और दादा – दादी को किसी जंग जीतने से कम नहीं होता है।

ऐसे बच्चों को अपने मे काबू करने के लिए Bhoot ki Kahani सुना कर काफ़ी हद तक अपने बस में कर सकते हैं। और ,bhoot ki Kahani किसी भी डरपोक बच्चों को साहस भरने का काम करता है।

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Bhoot Ki Kahani ~ Best 10+ Short Story Bhoot ki Kahani

आप इस bhoot Ki Kahani में आप भूतनी के घर , आत्मा की कहानी सुनकर आप मनोरंजन के साथ कुछ शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

Bhoot ki Short Story in Hindi (Bhoot ki Kahani)

1. bloody Mary real story in hindi( ब्लडी मैरी की Bhoot ki Kahani )

इस bhoot ki Kahani में बहुत समय पहले की बात है। यूएस की राजगद्दी पर सन, 1508 से लेकर,1547 तक शासन हेनरी के हाथों में हुआ करती थी। राजा हेनरी की बहुत सारी पत्नी और एलिजाबेथ और दो मैरी नाम की बेटी भी थी।

बच्चों के लिए सबसे अच्छा कहानी 

इनकी बेटियां में से पहली रानी की बेटी का नाम मैरी था। राजा हेनरी को उसकी बेटी मैरी उसे ज्यादा पसन्द नहीं करती थीं। इसलिए ओ उसके साथ बुरा व्यवहार करते थे। मैरी महल के नौकर के साथ महल का काम करती थीं। अगर मैरी कुछ कह भी देती थी, तो राजा उसकी बातों को नही मानते थे।

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बात बीतने लगा सन, 1547 जब हेनरी का मृत्यु हों गया था। तब प्रजा के मत अनुसार वह 16वीं शताब्दी के दौरान हेनरी की पहली पत्नी के बेटी मैरी को यूएस की राजगद्दी दे दिया गया और वह यूएस की रानी बन गई। उस समय यूएस की हालात उतने अच्छे नहीं थे।

यूएस उस समय कैथोलिक ईसाई और प्रोटेस्टेंट इन दोनों धर्मों के बीच में बंट गया था। और साथ ही दोनों धर्मों के लोग आपस में लड़ाई करते रहते थे।

रानी मैरी चाहती थी कि पूरी यूएस में केवल एक ही धर्म हों। लेकीन लोगों ने रानी की यह बात मानने से साफ इंकार कर दिया था। तब रानी को क्रोध आया और वह मैरी की बात को न मानने वाले लोग को मौत की सजा सुना दिया।

बात को नहीं मानने वाले को वह मैरी रानी उन्हें जिंदा भी जला दिया करती थी। रानी मैरी की इस क्रूरता की वजह से यूएस के लोग उससे नफरत करने लगे थे।

और राज्य में ऐसा भी कहा जाने लगा कि मैरी कुंवारी जवान लड़कियों के खून से नहाती थी। और उसका मानना था कि उनके खून से नहाने से मैरी ज्यादा दिनों तक जवान रह सकती हैं। और कुछ सालों बाद रानी मैरी ने शादी कर लिया।

बच्चे जरूर पढ़ें

कुछ समय बीतने के बाद यूएस में खबर आई कि रानी मैरी गर्भवती हैं। और जल्द ही उनके राज्य को उनका राजा मिल जायेगा।

इस बात को सुन यूएस के सभी लोग बहुत खुश हुए। लेकीन उस समय रानी मैरी के साथ बहुत ही अजीब घटना हुआ। उनके गर्भ से किसी भी बच्चे का जन्म नहीं हुआ, लेकीन कुछ ही महीनों के बाद रानी मैरी की पेट फिर से सामान्य हो गया।

राज्य में उपस्थित सभी ओझा और जादूगरों ने अपनी तंत्र विद्या से बताया कि उनके पेट में कोई बच्चा नहीं है बल्कि एक भूत आकार निवास करता है।

कुछ समय बीतने के बाद फिर से वहीं भूत रानी मैरी के गर्भ में आकर रहने लगा। और रानी मैरी फिर से गर्भवती हो गई। और इस बार भी रानी को कोई बच्चा नहीं हुआ। और उस घटना के कुछ ही दिनों के बाद रानी मैरी की मृत्यु हो गई।

इसके बाद यूएस की राजगद्दी पर रानी मैरी की छोटी बहन एलिजाबेथ को यूएस के राज्यगद्दी पर बैठाया गया। और फिर एलिजाबेथ यूएस की नई रानी बन गई।

रानी मैरी की क्रूरता की वजह से उसे लोग एक निर्दय औरत मानते थे। वही जब मैरी के गर्भ में बच्चे की जगह भूत का निवास होने लगा था। तो लोगों ने उसे शापित भी करार दे दिया था। और यही कारण है कि लोगों ने उसे ब्लडी मैरी का नाम दिया था।

Bhoot Ki Kahani से सीख: – ब्लडी मैरी की कहानी से हमें यह सीख मिलता है कि अपनी निजी विचारों और सोच को लेकर दूसरे लोगों पर दबाव नहीं डालना चाहिए। और शांति और करुणा के साथ लोगों का ख्याल रखना ही एक राजा और मनुष्य का धर्म है।

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हथुआ नामक एक शहर में एक राजा रोनकसिंह का राज्य हुआ करता था। वे हमेशा अपने राज्य के हित में कार्य करते रहें थे। और साथ ही उनके प्रजा हमेशा खुश रहती थी।

एक दिन की बात है एक गिद्ध आकाश में एक भूतिया पेड़ के बीज लेकर उड़ रहा था। और जैसे ही गिद्ध हथुआ में पहुंचा , तो उसके मुंह में से बीज एक दम से हथुआ नामक शहर के बीचों बीच गिर गया।

वह बीज भूतिया था। इसलिए वह दूसरे ही दिन वह पौधा बन गया। वहा पर रहने वाले निवाशियो न देखा तो हैरान रह गए। बल्कि पौधे का रंग काला था। फिर लोगों ने आपस में चर्चा किया और यह समझा की खेत में उगने वाले कोई घास और वनस्पति होगा।

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लेकीन दूसरे दिन वह भूतिया पौधा बड़ा हो गया। फिर लोगों को और ज्यादा दुविधा हुए की ये पौधा एक ही दिनों में इतना बड़ा कैसे हो गया। फिर देखते देखते दूसरे दिन वह पौधा पेड़ बन गया।

समय बीतने लगा और लोग भी तेजी से बढ़ने वाले पौधे के बारे में सोच – सोचकर परेशान हो गए थे। वो इस मामले को राजा के पास ले कर गए। इस पौधे के बारे में सुनते ही तुरंत उस पेड़ के पास पहुंचे।

राजा को जैसे ही पता चला कि एक काले रंग का पौधा मात्र तीन दिन में पेड़ बन गया। तो वो भी इस अजीब पेड़ को देखने चले आए।

लेकीन राजाउस पेड़ के पास चौथे दिन पहुंचे थे। तब तक पेड़ पौधे से और बड़ा हो चुका था। वह इतनी तेजी से फैला था कि किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था।

राजा को यह बात समझ आ चुकी थी कि इस काला पेड़ में जरूर कोई कुछ जादू टोना – टोटका किया होगा। ऐसी सोच के साथ राजा ने घोषणा कर दिया था कि जो भी इस पेड़ को खत्म करेगा, राजा उसे 1000 सोने के सिक्के उपहार के रुप में देंगे।

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राजा यही नहीं माने उन्होंने यह एलान कर दिया की जो भी इस पेड़ को खत्म कर देगा मेरे मृत्यु के बाद राजा बनने का हकदार भी होगा।

राजा के इतनी बड़ी घोषण सुनने के बाद हर कोई पेड़ खत्म करने के लिए अपना दिमाग लगाने लगा।

फिर राजा के सभी चतुर मंत्रियों ने एक उपाय सोचा, लेकीन पेड़ को कोई भी नष्ट नही कर पाए। कोई मंत्री ने पेड़ के निचे आग लगा दिए, तो किसी ने उस पेड़ को हाथियों से खिंचवाया। लेकीन पेड़ को कुछ भी नहीं हुआ।

अब लोगों के बीच दहसत और डर बैठ गया, की यह कोई मामूली पेड़ नही है। यह एक भूतिया पेड़ हैं। तभी उस गांव की एक समझदार व्यक्ति को उस राजा के घोषणा का पता चला।

पेड़ की जानकारी मिलते ही वह आदमी अपने गुरु के पास भूतिया पेड़ के रहस्य को जानने के लिए पहुंच गया।

गुरु जी ने अपनी सभी ध्यान की शक्ति को एकत्रित करके देखा और कहा “, क्या तुम उस पेड़ को खत्म करना चाहते हों”।

तभी वह समझदार व्यक्ति ने जवाब दिया”जी गुरु जी “, सब उससे परेशान हैं?

तब उस समझदार व्यक्ति को गुरु जी ने बताया “की इस पेड़ को खत्म करने का एक ही तरीका है। इसके लिए तुम्हे उस पेड़ के आसपास नमक डालना होगा।

इस आइडिया को जानते ही वह आदमी तेजी से राजा के पास गया,” और कहा कि इस पेड़ के आसपास चारों तरफ तुमको नमक डलवाना होगा। ऐसा करने पर ही यह पेड़ खत्म होगा।

राजा ने भी अपने सैनिकों से ठीक वैसा ही करने को कहा। सैनिकों ने मिल कर पेड़ के आसपास चारों तरफ बहुत सारी नमक डाल दिया।

नमक डालने के बाद ही एक दिन बाद पेड़ का आकार कुछ कम हुआ। और होते – होते पेड़ पांचवे दिन एक दम छोटे से हो गया। और फिर उसके बाद गल कर गायब ही हो गया।

उस समझदार व्यक्ति की तरकीब काम कर गई। फिर राजा ने अपने घोषणा  किए हुए अनुसार राजा ने खुश होकर उसे 1000 सोने के सिक्के उपहार के रुप में उस व्यक्ति को दे दिया।

राजा की तरफ से एक पत्र मिला”, जिसमे लिखा था कि राजा के मरने के बाद वह इस राज्य का राजा बन जायेगा। और वह समझदार व्यक्ति खुश होकर घर लौट आया।

शिक्षा: –इस bhoot ki Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि ऐसा कोई मुसीबत नहीं है जिसका समाधान नहीं किया जा सकता है। जरूरत है तो बस धैर्य और समझदारी की यही है।

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4.भूत का डर (bhoot Ki Kahani)

इस bhoot ki Kahani में एक बिहार के पंडित टोला नामक गांव में एक संदीप और वह अपने दोस्तो के साथ रहते थे। और एक दिन बहस करते हुए  ही भूत की बात होने लगी।

बातचीत के दौरान संदीप ने बिना डरे कह दिया कि भूत – ओत जैसा कोई चीज नहीं होती है। तब संदीप के सभी दोस्तों ने कहा कि ऐसा हैं तो क्या तुम इस बात को साबित कर सकते हो,”की तुम्हें भूत से डर नहीं लगता है।”हा बिल्कुल ”

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गांव में इस समय ऐसा बात चल रहा है कि गांव के पास के शमशान घाट में लोगों को भूत नजर आते हैं। और उसी में से एक दोस्त ने कहा ठीक है, तो आज रात को शमशान घाट जाओ और वहां पहुंचकर कील गाड़कर आ जाना।

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इतना बात तय होने के बाद संदीप रात को शमशान घाट के लिए निकल पड़ा। और रात काफी काली और डरावना जैसी थी। और उस रात को अमावस्या भी था।

तभी रास्ते में चलते हुए संदीप के दिमाग में भूतों वाली बातें चलने लगी। और साथ ही अब उसे डर भी थोड़ा बहुत लगने लगा।

लेकीन दोस्तों के सामने हंसी होगी ऐसा सोच कर वह आगे बढ़ते गया और शमशान घाट पहुंच गया। और वहा पहुंचते ही संदीप ने किल को गाड़ने के लिए हथौड़ा निकाली और धीरे धीरे धरती में धसने लगा।

संदीप ने शोर ज्यादा न करने के चक्कर में वह काफी आराम से कील को गाड़ रहा था। लेकीन कुछ देर बाद उसने महसूस किया की कोई उसके कपड़े पीछे से खींच रहा हो।

और डर के मारे उसकी पुरी शरीर ठंडा होने लगा और और वह डर के मारे वहीं पर बेहोश हो गया। और नीचे गिर गया।

तब संदीप का पीछा करते हुए उसके दोस्तों ने उसे उठाया और गांव लेकर आ गए। लेकीन काफी देर बीतने के बाद संदीप को होश आया। तो उस पर पानी के छीटें मारे। उतने में ही संदीप को होश आ गया।

तब संदीप ने अपनें दोस्तों से बताया कि, वह कील को शमशान घाट में गाड़ चुका था। लेकीन तभी वहां कोई उसका कुर्ता खींचने लगा और वह डर गया।

तब सभी दोस्तों ने संदीप को बताया कि कोई तुम्हारे कुर्ता नहीं खींच रहा था संदीप ने आश्चय होकर पुछा,”तो क्या हुआ था वहा पर।

तब उसके दोस्तों ने कहा की तुम जिस कील को जमीन पर गाड़ रहे थे। और उसी के नीचे तुम्हारी कुर्ता भी फस गया था। यहीं कारण है कि तुम्हे लगा कि कोई तुम्हारे कुर्ता खींच रहा हो।

संदीप ने अपनें डर की वजह से शर्मिंदा होते हुए कहा अपने दोस्तों से की मुझे माफ कर दो। लेकीन सभी दोस्तों ने माफी करके उसकी हिम्मत की बहुत ही प्रशंसा किए।

शिक्षा : – इस bhoot Ki Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर आप जितना डरोगे डर तुमको उतना ही डराएगा।

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5.औरत और लङकी की (Bhoot ki Kahani)

Note:- इस कहानी को कृपया कर अकेले नहीं बल्कि किसी के साथ जरूर पढ़ें बहुत ही डराने वाली है।👋🙏

बहुत समय पहले की बात है। सन 1952 की यह एक चौकाने वाली किस्सा चकाधर्मनाथ नामक बाजार का हैं। कन्हैया रहता था। जिसकी बेटी को पांच साल की उम्र में ही कैंसर हो गया।

कन्हैया के कई डॉक्टरों को दिखाने और ईलाज कराने पर भी उसमें कोई सुधार नहीं हो रहा था। और कैंसर बढ़ने लगा और एक दिन उस छोटी सी बच्ची की जान ले लिया।

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जब उस बच्ची की जान गई तो उस समय करीब एक बज गए थे। उसी दिन को पास के ही गांव में महिला मोहिनी को एक ट्रक ने टक्कर मारी थी। मोहिनी के परिवार वालों ने पुरी विधि के साथ उसकी अंतिम बिदाई दिया।

अब बच्ची के परिवार वालों ने उसे दफनाने का प्लान किया और जंगल की तरफ निकल पड़े।

लेकीन जंगल जाते समय अचानक उस लड़की के शरीर में हलचल हुई। वहा पर उपस्थित सभी लोग हैरान हो गए को लड़की की मृत शरीर कैसे हिलने लगा।

कुछ ही समय में लड़की जिंदा हो गई, और उसके परिवार वालों ने खुशी – खुशी उसे अपने घर उस लङकी को लेकर चले आए।

किसी भी लोगों को यह अभास नही हुआ कि उस रात ट्रैक की टकर से मरने वाली मोहिनी का भूत उस लङकी के अन्दर घुस गया है।

लड़की जब से मौत से लौटकर आई थी। तब से ही वह लड़की उदास और चुपचाप एक कोने में बैठी रहती थी। एक दिन उसकी मां ने खुद उसे अपने हाथ से खाना खिलाया। और उस लङकी को मामा के यहां जाने की बात कही।

लड़की को खाना खिलाते के बाद अच्छे से तैयार करके वे उसे अपने मायके ले गई। रास्ते में वह बच्ची जैसे ही उस घटना के ट्रक वाली जगह पर पहुंची । तो उसने अपनी मां को कहा कि मेरा गांव इधर हैं।

फिर लङकी की मां ने उसकी बातों पर तनिक भी गौर नहीं किया। और वह लङकी की बात को हंसी में टाल दिया। और कुछ ही देर में वह अपनी बेटी के मामा यानि कि वह अपने भाई के यहां पहुंच गई।

एक – दो दिन बाद मामा जी के घर के आस – पास ही उस बच्ची के अन्दर घुसी हुई मोहिनी को अपनी पड़ोसन सिमरन दिखी। उसने जोर से उसे सिमरन नाम से पुकारा।

सिमरन ने पलटकर देखा, तो एक छोटी सी बच्ची खड़ी हैं। फिर सिमरन को बड़ी हैरानी हुई कि इस छोटी सी बच्ची को मेरा नाम कैसे पता चला। तभी मोहिनी ने सिमरन को अपने साथ बीते हुए सारी बातें बता दिया।

उसने कहा कि मेरे परिवार वालों ने मुझे मौत से पहले ही जला दिया था। इसलिए मेरी आत्मा भटक रही हैं। और उसी दिन इस लङकी की भी मौत हो गई थी। तो इसलिए मैं इसके शरीर में घुस गई।

फिर सिमरन ने यह बात जाकर अपने गांव सभी को बता दिया। पूरे गांव वाले और मोहिनी के रिश्तेदार मिलने के लिए उसी बच्ची के मामा के यहां पहुंच गए।

उस लड़की के अन्दर रह रही मोहिनी की आत्मा ने सबको एक एक करके पहचान लिया। कुछ देर बातें करने के बाद वो अपने परिवार वालों के साथ घर चली गई।

अब उस लड़की की मां बच्ची को घर में न देखकर बहुत परेशान थी। और जब उसे पता चला कि वह लड़की कुछ लोगों के साथ दूसरे गांव चली गई है। तो वह उसे बुलाने चली गई।

अपने परिवार वालों के साथ खुश वह मोहिनी ने साथ आने के लिए मना कर दिया। और पास के लोगों ने ही उसे समझाया कि तुम्हे दोनों परिवार के साथ रहना चाहिए। इससे सभी को खुशी मिलेगी। और अब तुम किसी एक परिवार को दुखी नही कर सकती हो।

इस बात को सुनने के बाद लड़की के शरीर में रह रही मोहिनी ने अपनी मां के साथ वापस आने के लिए राजी हो गई। और अब वह दोनो परिवारों के साथ खुशी – खुशी रहने लगीं।

शिक्षा:– इस bhoot Ki Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जल्दी मे किया गया कार्य में कुछ अधूरा रह जाता हैं। इसलिए कोई भी कार्य करने से पहले अच्छे से देख और परख जरूर लेना चाहिए।

Conclusion: इस bhoot ki Kahani से यह निर्णय निकालता हूं कि हमें हमेशा साहसी बनना चाहिए। कोई भी भूत नहीं होती है यह सब आपके अन्दर चल रहे डर के कारण होता है। अगर इस bhoot Ki Kahani में कोई पार्ट आपको सबसे ज्यादा पसन्द आया हो तो आप उस पार्ट को कॉमेंट्स में जरूर लिखें

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