बच्चों के सबसे प्रिय कहानी Akbar Birbal Stories जो सबसे ज्यादा उनको अच्छी लगती है, यह हमें पता है कि बीरबल की चतुराई और हाजिर जवाबी की बातें हमेशा आपने बहुत ही अच्छे से सुना होगा।

अकबर के दरबार में कोई भी अगर बुद्धिमानी की बात होती थी तो बीरबल का नाम जरूर आता था और अकबर को बीरबल के राज्य पुरुषों के नवरत्न के रूप में माना जाता था।

Akbar Birbal Stories
Akbar Birbal Stories – Best 110+ अकबर – बीरबल की कहानी

अकबर हमेशा बादशाह की ओर से दी गई चुनौतियों को संघर्ष पूर्वक स्वीकार करता था और उसका हल निकाल कर के राजा के पास प्रस्तुत करता था।

तो बच्चों में आप लोगों को अकबर और बीरबल की कहानी में बहुत कुछ सीखने को मिलेगी आप लोगों को इस दुनिया मे अच्छे से जिंदगी जी सकेंगे।

Akbar Birbal  Stories

1. सबसे बड़ी वस्तु

एक समय की बात है, बीरबल दरबार में मौजूद नहीं थे वह किसी काम की बस से बाहर गए हुए थे। बीरबल के गैरमौजूदगी का फायदा उठा कर के अकबर के मंत्रीगण ने बीरबल के खिलाफ राजा अकबर के कान भर दिए।

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“मंत्री में से एक कहने लगा “महाराज” आप केवल बीरबल को ही सबसे ज्यादा जिम्मेदारियां देते हैं। तथा सभी काम में बीरबल की ही सलाह ली जाती है। इसका तात्पर्य है कि आप हमें अयोग्य समझते हैं। मगर, ऐसा नहीं है, हम भी बीरबल के समान ही योग्य और सक्षम है।

महाराज को बीरबल बहुत ही ज्यादा प्रिय थे । और वह बीरबल के खिलाफ कुछ भी सुनना नहीं चाहते थे। लेकिन उन्होंने अपनी मंत्री गणों को निराश नहीं करने के लिए,, एक समाधान ढूंढ निकाला।,, उन्होंने अपने मंत्रियों से कहा,,”मैं तुम सभी से केवल एक प्रश्न का जवाब चाहता हूं।

मगर , मगर तुम्हें इस बात का ध्यान रहे कि अगर तुम इस सवाल का जवाब नहीं दे पाते हो, तो तुम सभी लोगों को फांसी की सजा सुना दी जाएगी।

अकबर के मंत्रियों ने झिझकते हुए महाराज से कहा :– ठीक,,,,,,, ठीक है,, महाराज,”हमें आपकी यह शर्त मंजूर है। लेकिन आप पहले प्रश्न तो पूछिए……….

महाराज ने कहा “.. दुनिया की सबसे बड़ी चीज क्या है ?

महाराज के इस बात को सुनकर के वहां पर उपस्थित सभी मंत्री गण एक-दूसरे के मुंह निहारने लगते हैं। “महाराज ने उनकी यह स्थिति देखकर कहा: “याद रहे कि इस प्रश्न का उत्तर पूरी तरह से सटीक होनी चाहिए। इसके लिए मुझे कोई भी अटपटा से इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए।

इस सवाल का जवाब देने के लिए मंत्री गणों ने राजा से कुछ दिनों की मोहलत मांगी। तब राजा भी तैयार हो गए और अपने मंत्री गणों को कुछ दिन इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए दे दिए ।

महल से बाहर निकल कर के सभी मंत्री गण इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने लगे। पहले ने कहा,,, कि मेरे हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी चीज भगवान है। तो फिर दूसरे ने कहा कि मेरे हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी चीज भूख है।

Akbar Birbal ki Kahani – Best 110+ अकबर – बीरबल की कहानी
Akbar Birbal Stories – Best 110+ अकबर – बीरबल की कहानी

फिर तीसरे ने दोनों की बातों को नकारते हुए कहा कि भगवान कोई चीज नहीं है। और भूख को भी बर्दाश्त किया जा सकता है। इसलिए राजा के द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर इन दोनों में से कोई नहीं है।

मंत्रियों के द्वारा इस सवाल का जवाब ढूंढने में महराज ” के द्वारा दिया गया सभी समय बीतने लगा। फिर भी राजा के द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब नहीं मिलने पर, सभी मंत्री गण को अपनी – अपनी जान बचाने की चिंता सताने लगी।

सभी मंत्रियों को कोई और उपाय नहीं मिलने पर वह सीधा बीरबल के पास पहुंचा, और अपनी पुरी बाते सुना दिए। बीरबल को पहले से ही इस बात की भनक लग गई थी। उन्होने उस सभी मंत्रियों से कहा,” मैं तुम सभी की जान बचा सकता हूं। लेकीन तुम्हे वही करना होगा जो मैं कहूंगा। सभी मंत्रीगण बीरबल की बातों पर राजी हो गए।

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फिर अगले ही दिन बीरबल ने एक पालकी का इंतजाम करवाया। उन्होंने दो मंत्रीगणों को पालकी उठाने का काम दिया। और फिर तीसरे से अपने हुक्का पकड़वाया। और चौथे से अपने जूते उठवाए वह स्वयं पालकी में बैठ गए। फिर सभी मंत्रीगणों को राजा के महल की ओर चलने का के लिए कहा;,,,

जब सभी ने बीरबल को लेकर दरबार में पहुंचे,, तो महराज इस परिस्थिती को देख कर हैरान थे। महराज इस से पहले कुछ बीरबल से पूछते ,, बीरबल ने खुद ही राजा से बोले “”महाराज “दुनिया की सबसे बड़ी चीज”जरुरत ” होती है अपनी – अपनी जरुरत के कारण ही ये सब मंत्रीगण हमें पालकी में बैठा कर महल लेकर आए हैं।

इस बात को सुन महाराज मुस्कुराए बिना नहीं रह सकें। और सभी मंत्रीगण सिर झुकाएं शर्म के मारे खड़े रहे।

इस Akbar Birbal Stories की कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी की योग्यता को देखकर नहीं जलना चाहिए। बल्की उससे सीख लेकर अपनी योग्यता को बढ़ाना चाहिए।

2. Akbar Birbal Stories जोरू का गुलाम 

एक समय की बात है । बीरबल और अकबर अपने महल में बैठे कुछ अहम बातों पर चर्चा कर रहे थे। तभी बीरबल ने अकबर से कहा ”

मुझे लगता है कि ज्यादा लोग पुरुष जोरू के गुलाम होते हैं, और वे अपनी पत्नियों से डरकर के रहते हैं। बीरबल की यह बात राजा को बिल्कुल ही पसंद नहीं आया। अकबर ने इस बात का विरोध किया और नाराजगी जताई।

और इस पर बीरबल भी अपनी बात मनवाने के लिए अड़ गया। बीरबल ने कहा”महाराज मैं अपनी इस बात को सिद्ध कर सकता हूं। मगर।,,इसके लिए महाराज आपको प्रजा के बीच एक आदेश जारी करवाना होगा।

बीरबल का कहना था कि इस आदेश के अनुसार, जिस पुरुष का अपनी पत्नी के साथ डरने का बात सामने आएगी। उसे दरबार में एक सिक्का जमा कराना होगा। बीरबल की इस बात पर राजा तैयार हो गए।

अगले ही दिन राजा ने अपने प्रजा के बीच यह आदेश जारी करवा दिया कि,, अगर यह बात सिद्ध हो जाती है कि अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी से डरता है। तो उसे दरबार में आकर के बीरबल के पास एक सिक्का जमा करना होगा।

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फिर क्या था, देखते ही देखते बीरबल के पास बहुत सारे सिक्के इकट्ठा हो गए। सिक्के इतने हो गए थे कि वह सभी महल में इधर-उधर बिखरने लगे थे।

और फिर बीरबल राजा के पास पहुंचे और बोले”, महाराज,, हमारे पास इतने ज्यादा सिक्के इकट्ठा हो गए हैं कि इसके लिए आप एक विशेष तिजोरी बनवा सकते हैं। नहीं तो आप इस आदेश को वापस ले सकते हैं। लेकिन राजा बीरबल की बातों से सहमत नहीं हुए,,

और फिर महल में इतना ज्यादा सिक्के इधर-उधर बिखर चुके थे कि चारों तरफ झन झन की आवाजें आने लगी। जब राजा बीरबल की बातों से सहमत नहीं हुए तो बीरबल ने अपनी बात को सिद्ध करने के लिए एक नया उपाय सोचा।

एक  दिन बीरबल राजा के पास गए और बोले”जी महाराज मैंने सुना है कि पड़ोसी वाले राज्य में बहुत ही सुंदर राजकुमारी रहती है। अगर आपकी इच्छा हो तो क्या मैं वहां पर आपकी रिश्ता पक्का कराओ।

इस बात को सुनते ही राजा चौक उठे और बोले”बीरबल” तुम यह कैसी बातें कर रहे हो। महल में तो पहले से ही दो महारानियां में मौजूद है। अगर उन्हें इस बात की भनक भी लगी तो,, मेरी खैर नहीं होगी।

अकबर की इस बात को सुनकर के बीरबल ने तपाक से जवाब दिया,, चलिए महाराज, फिर तो आप भी मेरे पास दो मुर्गी या जमा करा दीजिए।

राजा बीरबल की बात को सुनकर शर्मा गए। और उन्होंने अपना आदेश उसी वक्त वापस ले लिया।

इस Akbar Birbal Stories की कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि, बातों की चतुराई से हम किसी भी बात को मनवा सकते हैं। जरुरत है, तो बस बीरबल की तरह आपने बात की पक्ष रखने की कोशिश करनी चाहिए।

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Akbar Birbal Stories खाने के बाद विस्तार पर आराम करना 

एक दिन की बात है,, दोपहर का समय था। महाराज अपने दरबार में बैठे कुछ सोचे रहे थे। अचानक उन्हें बीरबल के द्वारा कही हुई बातें याद आ गई। उन्हें इस बात की याद आएगी उन्हें बीरबल ने एक बार एक कहावत सुनाई थी।

जो कुछ इस प्रकार से था – खाने के बाद से लेटना और मारने के बाद से भागना एक सायाने मनुष्य की निशानी होती है।

महाराज सोचने लगे”अभी दोपहर का समय है,, और हमें इस बात का पूरा  यकीन है कि खाने के बाद से बीरबल आराम करने की सोच रहा होगा। तो चलते हैं आज बीरबल की बात को गलत किया साबित करते हैं।

यह सुनकर अकबर ने अपने एक सेवक को आदेश दिया कि,, इसी वक्त बीरबल को दरबार में उपस्थित होने का आदेश दिया जाए।

Akbar Birbal ki Kahani – Best 110+ अकबर – बीरबल की कहानी
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बीरबल अभी खाना खा कर के बैठे ही थे ,कि राजा का सेवक संदेश लेकर के बीरबल के पास पहुंचा। बीरबल इस आदेश के पीछे छिपे राजा की मनसा को भलीभांति समझ गया था। उन्होंने सेवक से कहा” तुम थोड़ी देर रुको । मैं अपने कपड़े बदल करके तुम्हारे साथ ही चलता हूं।

तभी अंदर जाकर के बीरबल हैं अपने लिए एक तंज पायजामा को चुना। वह पायजामा बहुत ज्यादा टाइट था इसके लिए उन्हें बिस्तर पर लेटना पड़ा। पजामी को पहनने के बहाने वह थोड़ी देर बिस्तर पर ही लेटे रहे। और फिर उठकर के सेवक के साथ-साथ दरबार की ओर चल दिए।

दरबार में राजा बीरबल की ही राह देख रहे थे। उनके वहां पहुंचते ही राजा ने पूछा”क्यों बीरबल। आज तुम खाने के बाद से लेटे थे या नहीं,”बीरबल ने बड़ी ही चतुराई से जवाब दिया जी महाराज”, जरूर लेटा था।

इस बात को सुनकर के राजा को बहुत ही ज्यादा गुस्सा आया। इसका मतलब है कि तुमने मेरे आदेश का अपमान किया है। तुम उसी समय मेरे सामने क्यों नहीं उपस्थित हुए ? इसके लिए मैं तुम्हें सजा देता हूं।

उसी से मैं तुरंत बीरबल ने जवाब दिया,” महाराज”यह सच है कि मैं थोड़ी देर के लिए लेटा था। लेकिन मैंने आपकी आदेश की अवहेलना नहीं किया है। आपको मुझ पर यकीन ना हो तो आप अपने सेवक से इस बात की जवाब पूछ सकते हैं। हां,, यह अलग बात है कि मुझे इस तंग पजामी को पहनने के लिए बिस्तर पर लेटना पड़ा था।

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बीरबल की इस बात को सुनकर अकबर हंसी हुए पेट फूलने लगे। और कहा अकबर को दरबार से जाने दिया जाए।

इस Akbar Birbal  ki Kahani से हमें यह शिक्षा मिलती है कि,, किसी भी परिस्थिति को भांपते हुए हमारे द्वारा उठाए गए एक कदम हमें अनेक मुसीबतों से बचा सकता है।

Akbar Birbal Story

Akbar Birbal Stories जब बीरबल बच्चा बना। –>

एक समय की बात है, बीरबल को दरबार आने में कुछ देरी हो गई। और राजा अकबर इधर बीरबल का बहुत ही देर से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही बीरबल दरबार में पहुंचे। तो अकबर ने उनसे देरी का कारण पूछा।

तब बीरबल कहानी है कि जब मैं आज घर से निकल रहा था। तो मेरे छोटे-छोटे बच्चों ने मुझे रोक दिया। और कहीं भी ना जाने की जिद करने लगे। किसी भी तरह बच्चों को समझा-बुझाकर मुझे निकलने में वहां से देरी हो गई ।

राजा पूरी तरह से गुस्सा में थे और बीरबल की इस बात के लिए राजा को बीरबल पर यकीन नहीं हुआ। राजा ने सोचा कि बीरबल देरी से आने का झूठा बहाना बना रहा है।

राजा ने बीरबल से कहा कि बच्चों को मनाना इतना भी कठिन काम नहीं होता है। अगर वे नहीं मानते हैं तो उन्हें थोड़ा डांट – डपट करके भी शांत किया जा सकता है।

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वही, बीरबल इस बात से भली-भति परिचित से कि बच्चों के इस सवाल को और जिद को पूरा कर पाना बेहद ही मुश्किल होता है। लेकिन जब अकबर इस बात से संतुष्ट नहीं हुए तो बीरबल के दिमाग में एक उपाय सूझा।

बीरबल ने कहा कि मैं इस बात को सिद्ध कर सकता हूं कि छोटे बच्चे को समझाना बहुत ही मुश्किल होता है। लेकिन इसके लिए उन्हें एक छोटे बच्चे के जैसा व्यवहार करना होगा। और राजा उन्हें समझाना होगा। राजा इस बात के लिए पूरी तरह राजी हो गए।

अगले ही पल बीरबल एक छोटे बच्चे की तरह चिल्लाने और रोने लगे। राजा ने मनाने के लिए उन्हें अपने गोद में उठा लिया। बीरबल  राजा के गोद में बैठ कर उनकी लंबी मूछों से खेलने लगे।

कभी वे बच्चों की तरह मुंह बिगड़ते थे। तो कभी वह मूछों को ही खींचने लगते थे। और अभी तक राजा को कोई भी आपत्ति नहीं हो रहा था।

जब बीरबल मूछों से खेलकर थक गए,तो गन्ना खाने की जिद्द करने लगें। राजा ने बच्चा बने बीरबल के लिए गन्ना लाने का आदेश दिया। लेकीन जब गन्ना लाया गया तो बीरबल ने नया जिद्द पकड़ लिया की उन्हें छिला हुआ गन्ना चाहिए।

तभी वहा पर उपस्थित एक सेवक के द्वारा उस गन्ने को छिला गया। अब फिर बीरबल जोर जोर से चीखने लगे की मुझे गन्ने छोटे – छोटे टुकड़ों में काट हुआ चाहिए।

बीरबल की इस जिद्द को पुरा कराने के लिए गन्ने को छोटे छोटे टुकड़ों में काट दिया गया। जब राजा ने इस टुकड़े को बीरबल को खाने के लिए दिया तो बीरबल ने उन टुकड़ों को जमीन पर फेक दिया। राजा को यह देखकर बहुत ही गुस्सा आया।

उन्होने गुस्से से बीरबल से पूछा “तुमने गन्ने को नीचे क्यूं फेक दिया। चुपचाप से इसे खा लो। राजा की डाट सुनकर अब बीरबल और भी जोर से रोने और चीखने लगे।

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फिर अकबर ने प्यार से कहा, “कहो बीरबल। तुम क्यो रो रहे हो ? फिर बीरबल ने जवाब दिया, मुझे छोटा नही बड़ा सा गन्ना चाहिए। फिर अकबर ने उन्हें एक बड़ा सा गन्ना लाकर दिया। लेकीन बीरबल ने इस बड़े गन्ने को हाथ तक नहीं लगाए।

अब राजा अकबर  का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था। तब उन्होने बीरबल से कहा कि “तुम्हारी जिद्द के अनुसार तुम्हे बड़ा सा गन्ना लाकर दिया गया है, तो तुम उसे खाने की बजाए रो रहे हों। तब बीरबल ने जवाब दिया कि “, नहीं मुझे इन्ही छोटे – छोटे टुकड़ों को जोड़कर एक बड़ा सा गन्ना खाना है।

फिर राजा ने बीरबल की इस जिद्द को पकड़ा देख वह अपने सिर को पकड़ लेते हैं। और वहीं अपनी जगह जाकर बैठ जाते है।

उन्हे परेशान देख कर बीरबल ने बच्चा बनने का नाटक खत्म किया, और फ़िर वे राजा के समक्ष प्रस्तुत हुए। फिर बीरबल ने राजा से कहा “क्या अब आप इस बात से सहमत हैं कि बच्चों को समझना एक बहुत ही मुश्किल काम होता है। राजा ने हां में सिर हिलाया और बीरबल को देख मुस्कुराने लगे।

शिक्षा

इस Akbar Birbal Stories से हमें यह शिक्षा मिलती है कि, बच्चे बहुत ही मासूम होते हैं। और अक्सर हम उनके नादान सवालों का जवाब नहीं दे पाते हैं। लेकीन फिर भी हम उन्हें प्यार से समझकर और अनेक उदाहरण प्रस्तुत कर उनकी जिद्द और जिज्ञासा को शांत करने का पुरा प्रयास करते हैं।

Akbar Birbal Story in Hindi 

Akbar Birbal Stories सबसे बड़ा मनहूस कौन है।

एक बार की बात है कि राजा अकबर विस्तर से ही अपने सेवकों को पानी लाने का आदेश दे रहे थे। ठीक उसी समय बादशाह के कमरे के पास से कूड़ा साफ करने वाले सेवक गुजर रहा था।

उसने जब देखा कि “महाराज को प्यास लगी है। लेकीन उनके आसपास कोई सेवक नहीं है। तो वह खुद ही बादशाह के लिए पानी ले गया। कूड़ा उठाने वाले सेवक को पानी लिए अपने कमरे में खड़ा देखकर अकबर चौक गए।

लेकीन उन्हें प्यास बहुत तेज लगी थी। ऐसे में बिना ज्यादा सोचे – समझे अकबर ने उसके द्वारा लाया हुआ ग्लास लिया और पानी को पी लिया।

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ठीक उसी वक्त अकबर के कुछ खास कार्यकर्ता उनके कमरे में पहुंचे। उन्होने कूड़ा उठाने वाले सेवक को वहा देखते ही तुरंत उसे कमरे से बाहर जाने के लिए कहा ” “फिर उन्होने कुछ समय तक बादशाह से बात किया, और फ़िर वे भी उनके कमरे से चले गए।

तभी कुछ देर के बाद राजा अकबर की पेट खराब होने लगी। जैसे – जैसे दिन ढलता गया। उनकी तबियत और भी बिगड़ गया। बादशाह की ऐसी हालत देख कर बड़े बड़े हकीम को बुलाया गया। लेकीन दवाई लेने के बाद भी उनके तबियत में कोई सुधार नहीं आ रहा था।

तभी राज वैध ने बादशाह को ज्योतिषी बुलाने की सुझाव देते हुए कहा “, मुझे लगता हैं कि आप पर किसी मनहूस इन्सान को छाया पड़ गया है। राज वैध की मन रखते हुए। अकबर ने ज्योतिषी को बुलाने का आदेश दे दिया।

तभी अकबर के मन मे आया की किसी मनहूस की परछाई तो पड़ी है। मैं तो बस उस कूड़ा वाला के द्वारा लाया हुआ पानी पिया है।

इस बात को सोचते ही उस कूड़ा उठाने वाले सेवक को सजा मौत की सुना दिया। अब बादशाह के आदेश मिलते ही शिपहियो ने उस नौकर को जेल में डाल दिया।

तभी कुछ देर के बाद बादशाह के इस आदेश के बारे में पता चला। तो बीरबल तुरन्त उस सेवक के पास पहुंचा और कहा तुम चिंता मत करना मैं किसी न किसी बहाने से तुमको बच्चा लूंगा। इतना कह कर तुंरत बीरबल बादशाह अकबर के पास पहुंचा।

फिर बीरबल ने अकबर से कहा “महाराज आपको क्या हुआ है? आप कैसे इतना ज्यादा बीमार पड़ गए हैं ?

तब बादशाह अकबर ने कहा “”बीरबल एक मनहूस इन्सान की छाया हम पर पड़ गया है। इस लिए मैं बीमार हो गया हूं।

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बादशाह की जवाब सुनकर तुरंत उन्हीं के सामने हंसने लगे। यह देखकर अकबर को बहुत ही खराब लगा। फिर अकबर ने कहा “… बीरबल तुम मेरे बीमारी का मजाक उड़ा रहे हों ?

बीरबल ने हंसते हुए कहा,,, नहीं – नहीं बादशाह , मुझे तो बस इतना कहना है कि अगर मैं आपके सामने उस कूड़ा उठाने वाले सेवक से भी मनहूस इंसान को लेकर आऊ तो क्या आप उस सेवक को सजा से मुक्त कर देगें।

अकबर ने कहा “क्या उससे भी बड़ा कोई मनहूस इंसान हो सकता है क्या “चलो तुम किसी उससे भी बड़ा मनहूस इंसान को लेकर आओ मैं उसे मुक्त कर दूंगा।

तभी टपक से बीरबल बोल पड़े की महराज, उससे बड़े मनहूस तो आप स्वयं ही है। उस मामूली नौकर ने तो बस आपकी प्यास बुझाने के लिए आपको पानी दीया । लेकीन आपको लग रहा है कि उसकी वजह से आप ही आपकी तबियत खराब हो गई है।

उस बेचारे नौकर के बारे मे सोचिए की वह आपको केवल पानी देने के कारण ही जेल में पहुंच गया। सुबह सुबह आपके मुंह देखने से उसको पुरा दिन तो छोड़िए पुरी जीवन ही बर्बाद हो गया।

अब कुछ देर में ही उसे मौत की सजा मिल जायेगा। अब आप ही बताइए तबियत खराब होने के पीछे मंहुसियत हैं या मौत की सजा मिलना।

फिर आगे बीरबल ने कहा “अब आप खुद को मौत की सजा मत देना। क्युकी आप हम सब लोगों के बादशाह हैं। और हमें जान से भी प्यारे हैं।

बीरबल की ऐसी बुद्धिमता वाली बातें सुन कर अकबर ने बहुत ही जोर से हंसने लगे। और उन्होंने ने तुरंत सिपाहियों को कूड़ा – कचरा उठाने वाले उस नौकर को जेल से रिहा करने का आदेश दिया। और साथ ही साथ उसकी मौत की सजा भी माफ कर दिया।

शिक्षा

इस Akbar Birbal Stories के कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि, किसी भी व्यक्ति के झांसे में आकर कभी भी गलत फैसला नहीं लेना चाहिए। और साथ ही अंधविश्वासी तो बिलकुल नहीं होना चाहिए।

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Akbar Birbal Stories सबसे बड़ी हथियार

बादशाह अकबर कामकाज के आलावा भी कई चीजों के बारे में बीरबल से उसकी वार्तालाप करते रहते थे। ऐसे ही बैठे बैठे एक दिन बादशाह ने बीरबल से पूछा कि इस दुनियां में सबसे बड़ा हथियार तुम्हारे हिसाब से कौन सा होता है।

Akbar Birbal ki Kahani – Best 110+ अकबर – बीरबल की कहानी
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इस बात की जवाब में बीरबल ने कहा कि इस संसार में आत्मविश्वास से बड़ा हथियार कोई नहीं हो सकता है। और यह बात अकबर को समझ में नहीं आया। लेकीन फिर भी उन्होने कुछ नहीं कहा। बादशाह के मन मे आया कि समय आने पर इस बात की परख किया जायेगा

कुछ दिन के बाद ही राज्य में एक हाथी पुरी तरह से बेकाबू हो गया। पता चलता है कि वह हाथी पागल हो गया है। उसने तुरंत कचारियो ने जंजीर में जकड़ लिया। इसकी जानकारी जैसे ही बादशाह को मिली। तो उन्होने सीधे महावत से कहा कि जब भी तुम्हें बीरबल आता दिखे तो तुम हाथी के जंजीर को खोल देना।

यह सुन कर महावत हैरान हो गए। लेकीन यह बादशाह का आदेश था। इसलिए सिर झुकाएं वह चला गया।

अब अकबर ने बीरबल को महावत के पास जाने के लिए कहा” महावत ने भी बादशाह के आदेश का पालन करते हुए बीरबल को आता देख हाथी को जंजीरों से अलग कर दिया। और बीरबल को इस बात की खबर नहीं था।

इसलिए बीरबल आराम से चल रहे थे। तभी उनकी नजर चिघरते हुए हाथी पर पडा। जैसे ही उन्होने देखा कि हाथी उनकी तरफ़ ही आ रहा है। तो वे कुछ समझ नहीं पाए।

कुछ ही समय में बीरबल के दिमाग में सवाल आया कि कहीं बादशाह ने मेरी आत्मविश्वास वाली कही हुई बातें को परखने के लिए ही इस हाथी को मेरे पीछे परखने के लिए छोड़ा होगा।

बीरबल धीरे-धीरे भागने के लिए सोच रहे थे ।लेकिन कुछ ऐसा हो नहीं पाया, सामने से हाथी आ रहा था और अगल-बगल में भागने की जगह भी नहीं थी।

तभी इतने समय में हाथी बीरबल के काफी करीब पहुंच गई। तभी बीरबल ने सामने एक कुत्ते को देखा, और उसकी टांगों को पकड़ के हाथी के तरफ फेंक दिया। वह कुत्ता चिल्लाते हुए हाथी से टकराया। उसकी ऐसी चीजें सुनकर के हाथी तुरंत उल्टी दिशा की तरफ भागने लगी।

कुछ ही देर में इसके बारे में बादशाह अकबर को पता चला, तब जाकर के अकबर ने माना कि आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा हथियार है।

शिक्षा —

इस Akbar Birbal Stories से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हर किसी की बातों पर यूं ही भरोसा नहीं कर लेनी चाहिए। जांच परख करनी जरूरी होती है। और यदि इंसान समय से पहले उम्मीद ना छोड़े तो किसी भी समस्या से बाहर निकल सकती है।

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Akbar Birbal Stories हरा रंग का घोड़ा 

एक समय की बात है एक दिन राजा अकबर अपने मंत्री बीरबल के साथ अपने शाही बगीचे में निकले हुए थे। और वह बगीचा बहुत ही सुंदर था और उसके चारों तरफ हरियाली ही हरियाली था।

और उस बगीचे में लगे हुए फूलों से बहुत ही मधुर खुशबू आ रहा था। और बगीचे का वातावरण बहुत ही सुंदर था।

लेकिन इसी बीच राजा के दिमाग में कुछ ऐसा आया कि उन्होंने बीरबल से कहा”हमारा मन है कि हम इस हरे भरे बगीचे में एक हरे रंग की घोड़े पर बैठकर के सवारी करें ।

इसलिए मैं तुम्हें आदेश देता हूं कि तुम 7 दिन के अंदर मेरे लिए एक हरे रंग के घोड़े का इंतजाम करो। अगर तुम अब मेरे इस आदेश को पूरा करने में असफल हो तो तुम कभी भी अपने शक्ल मुझे मत दिखाना।

इस बात से राजा और बीरबल दोनों वाकिफ थे कि पूरी दुनिया में हरे रंग का घोड़ा नहीं मिलता है। लेकिन फिर भी राजा चाहता था कि बीरबल इसमें अपनी हार स्वीकार कर लें।

यही कारण है कि उन्होंने बीरबल को ऐसा आदेश दिया था। लेकिन बीरबल भी तो बहुत चालाक थे। वे यह भली-भांति जानते थे कि राजा उनसे क्या चाहते हैं। इसलिए वह भी हरे रंग का घोड़ा ढूंढने के बहाने साथ दिनों तक इधर-उधर घूमते रहे।

अचानक आठवें दिन बीरबल राजा के दरबार में पहुंचे और बोले” महाराज”आपकी आज्ञा के अनुसार मैंने हरे रंग का घोड़ा का इंतजाम कर दिया है। लेकीन, उसके मालिक की दो शर्ते हैं।

राजा ने पूरी उत्सुकता से  दोनों शर्तों के बारे में जानने की इच्छा जाहिर किया। तब बीरबल ने जवाब दिया,, पपहली शर्त यह है  कि उस हरे घोड़े को लाने के लिए आपको स्वयं जाना होगा। तभी राजा इस शर्त को मान गए।

फिर अकबर ने दूसरी शर्त के बारे में पूछा” तब बीरबल ने कहा” घोड़े के मलिक की दूसरी शर्त यह है कि आपको घोड़ा ले जाने के लिए सप्ताह के सातों दिनों के अलावा आपको कोई और दिन चुनना होगा।

इस बात को सुनते ही राजा बीरबल की तरफ देखने लगे। तब बीरबल ने बड़ी ही सहजता से जवाब दिया।

“महाराज”घोड़े का मालिक कहता है कि हरे रंग के खास घोड़े को लाने के लिए, उसकी या खास शर्त तो माननी ही पड़ेगी।

राजा बीरबल की चतुराई भरी बात सुनकर के समझ गए। कि बीरबल वाकई हारने वाला नहीं है और यह बहुत ही चतुर है इसलिए उन्होंने अपनी आदेश को वापस लिया।

शिक्षा —

इस Akbar Birbal Stories से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सही सूझबूझ और समझदारी के साथ नामुमकिन लगने वाले काम को भी बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है।

Akbar Birbal short stories in hindi

Akbar Birbal Stories सबकुछ बह जाएगा।

एक बार महाराजा अकबर बीरबल को अपने साथ शिकार पर ले गए थे। और उनके साथ सेना की एक टुकड़ी तथा उनके कुछ सेवक भी साथ थे। शिकार करके अकबर कुछ ही दिनों में लौटने लगे। तभी रास्ते में अकबर ने एक गांव को देखकर मन में उसे जानने की इच्छा करने लगे।

तभी राजा ने बीरबल से पूछा कि”क्या तुम इस गांव के बारे में जानते हो ,मुझे इस जगह की पूरी जानकारी चाहिए ।

तब बीरबल ने जवाब दिया कि” महाराज “मुझे भी इस गांव के बारे में कोई जानकारी नहीं है। और मैं भी पहली बार अपने राज्य के इस गांव की तरफ आया हूं। अगर आप इस गांव के बारे में जानने के लिए इच्छुक है तो मैं किसी से पूछ करक बताता हूं आपको।

तभी बीरबल की नजर वहां पर एक आदमी पर पड़ी। बीरबल ने उस आदमी को अपने पास बुलाकर पूछा” भाई क्या तुम इस गांव के रहने वाले हो। अगर हां तो तुम इस गांव के बारे में मुझे सब कुछ बता दो प्लीज। कि यहां तो सब बढ़िया से चल तो रहा है ना।

वह आदमी भी बीरबल के सवालों का जवाब दे ही रहा था कि तब तक उसकी नजर बादशाह पर पड़ गई। और उसने उन्हे पहचान लिया। और फिर बोला कि साहब आप लोगों के राज्य में यहां कुछ खराब कैसे हो सकता है। यहां सब कुछ बढ़िया से चल रहा है।

तब बादशाह ने उससे पूछा कि””तुम्हारा नाम क्या है ?

फिर उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि मेरा नाम गंगा है।

फिर बादशाह ने पिता का नाम पुछा ” वह व्यक्ति ने जवाब दिया मेरे पिता का नाम जमुना है।

तू इस बात को सुनते ही बादशाह ने जवाब दिया कि जरूर तुम्हारी माता का नाम तब सरस्वती हो सकता है। तब उस व्यक्ति ने जवाब दिया कि नहीं साहब मेरी मां का नाम नर्मदा है।

इन सभी बातों को सुनकर बादशाह को हंसी आ गई और उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा “अब यहां से आगे बढ़ना सही नहीं है। यहां पर सारी नदियां हैं और हम लोगों के पास नाव भी नहीं है। तो आगे मत जाइए आगे बढ़ने के लिए हमें नाव की आवश्यकता हो सकती है।

और हम लोग यहां पर ज्यादा देर रुके रहे तो सब कुछ बाहर जाएगा इसलिए अब हमें यहां से निकलना चाहिए। बीरबल की इस बात को सुनकर के राजा बहुत जोर से हंसने लगे।

और वह व्यक्ति भी बीरबल का मजाक सुनकर के वहां से मुस्कुराते हुए चला गया।

शिक्षा – 

इस Akbar Birbal Stories से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हर समय व्यक्ति को गंभीर आने की जरूरत नहीं होती बल्कि उन्हें हंसी मजाक उचित समय के अनुसार करते रहना चाहिए।

Akbar Birbal Ki kahaniyan

Akbar Birbal Stories पानी का लहर गिनना

एक समय की बात है अकबर के दरबार में एक व्यक्ति नौकरी की इच्छा को लेकर के उनके दरबार में पहुंचा। उनकी कुछ देर बाद सुनने और बुद्धि की परीक्षा लेने के बाद से बादशाह ने उसे चुंगी यानि टैक्स वसूलने का अधिकारी बना दिया।

और बीरबल भी उसी दरबार में मौजूद थे। उन्होंने उसे कुछ देर देखने के बाद से कहा कि बादशाह या व्यक्ति हमें कुछ ज्यादा ही चालाक लग रहा है। यह जल्द ही कुछ ना कुछ बेयाईमानी जरूर करेगा ।

उसे काम करते करते कुछ समय बीत गया और वह व्यक्ति अभी तक अपनी टैक्स वसूलने का काम पूरी तरह नहीं संभालना था।

तभी एक दिन बादशाह के पास एक दो व्यक्ति उस अधिकारी कि शिकायत लेकर के आए। वह शिकायत मामूली थी। इसलिए उस पर ज्यादा किसी ने ध्यान नहीं दिया।

उसके बाद सेवा ज्यादा रिश्वत लेने और जनता को परेशान करने का आरोप भी उस अधिकारी पर लगने लगा। इतना शिकायत आने पर बादशाह नहीं सोचा कि इसका तबादला ऐसा जगह कर देता हूं। जहां इसे बेईमानी करने का मौका ही नहीं मिल पाए।

इतना सोचते हैं बादशाह ने निर्णय लिया कि इसे अस्तबल का मुंशी बनाया जाए। फिर अकबर ने सोचा कि आप घोड़े की लीड उठाने का काम मैं यह क्या बेईमानी कर सकता है।

वहां मुंशी के पद पर पहुंचते ही हुआ व्यक्ति फिर से रिश्वत लेना चालू कर दिया। उसने सीधे घोड़े के देखभाल करने वालों को कह दिया कि तुम लोग घोड़े को कम दाना– पानी खिलाते हो। यह बात बादशाह को मालूम चल गई है इसलिए मुझे लीद को मापने के लिए मुंशी के तौर पर भेजा है।

अब अगर लीड का वजन कम हुआ तो मैं तुम सब का शिकायत बादशाह से कर दूंगा। इस तरह से उस मुंशी से परेशान होकर वहां के सभी लोगों ने घोड़ों पर जोड़ करके एक ₹1 देने लगे।

फिर यह बात कुछ दिन बाद अकबर तक पहुंच गई,, तब उन्होंने सीधा यमुना में बह लहरों की संख्या गिरने का काम दे दिया। फिर बादशाह ने मन में सोचा कि अभी यहां तो वह कोई बेईमानी नहीं कर पाएगा।

कुछ दिनों में जैसे ही वह व्यक्ति यमुना के किनारे पहुंचा। तो वह व्यक्ति वहां भी अपना दिमाग दौड़ा लिया। और वह नाव की  सवारी करने वाले लोगों से कहता था कि मैं लहरों की संख्या गिन रहा हूं।

इसलिए तुम लोग यहां से निकल सकते हो। नही तो तुम्हें इस जगह पर तुम्हें दो – तीन दिन तक रुकना पड़ेगा। तो फ़िर रोज रोज इसकी यह बात सुनकर वह नाव वाले ने सभी उसे 10 रूपए रिश्वत देने लगें।

अब फिर से वह आदमी यमुना नदी के किनारे बहुत ही ज्यादा बेईमानी करने लगा। फिर यह बात 3 महीने बाद राजा तक पहुंचने लगे। अब अकबर ने एक लिखा हुआ आदेश जारी किया,,,, नाव को रोको मत, जाने दो…

वह व्यक्ति भी बहुत ही चतुर था उसने उसे लिख दिया कि,, नाव को रोको” मत जाने दो”बना दिया। इस थोड़े से हेरा फेरी करने के बाद से अकबर के आदेश को वहा पर टंगवा दिया। फिर आख़िरकार बादशाह उससे परेशान होकर उसे नौकरी से निकाल ही दिया।

तभी अचानक बीरबल की कही गई बातों को बादशाह को याद आया कि यह आदमी बेईमान जरुर होगा। तब उनके मन में विचार आया कि पहले ही गलती पर उसे दण्ड जरुर देना चाहिए था।

शिक्षा —

इस Akbar Birbal Stories से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दुष्ट अपनी दुष्टता और बेईमानी कही पर भी जानें पर नहीं छोड़ता है।

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Akbar Birbal Stories अंधों की कहानी

एक बार की बात है रानी ने निश्चय किया कि मैं अपने राज्य में उपस्थित सभी अंधे लोगों को भिक्षा दूंगा। और उन्होंने यह निश्चित किया कि हमारे राज्य में कोई भी अंधा आदमी भिक्षा लेने से छूट ना जाए।

और यह बात धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैल जाती है ,,फिर अशोक सम्राट ने अपने मंत्रियों को आदेश देते हैं कि हमारे राज्य में उपस्थित सभी अंधे लोगों की एक सूची तैयार किया जाए।

और फिर मंत्रियों ने राज्य में उपस्थित सभी अंधे लोगों की सूची बनाकर के राजा अकबर के सामने प्रस्तुत करते हैं। तथा उस सूची को बीरबल भी देख रहे थे। और फिर बीरबल ने बड़े ही विनम्रता पूर्वक बोले कि अभी सूची बहुत ही अधूरी है। फिर बीरबल ने उस सूची को पूरा करने के लिए अकबर से एक निश्चित समय की मांग किया।

अगले दिन बीरबल एक खाट के साथ पूरे बाजार के बीच में बैठे थे। और वे उस खाट को बनाना चालू कर देते हैं। जब भी लोग उनके पास से गुजरते हैं, तो सभी लोग बीरबल से पूछते हैं कि” आप यह क्या कर रहे हैं”लेकिन बीरबल उन लोगों को कोई भी जवाब नहीं देता था और अपने खाट की बुनाई चुपचाप करता था।

जैसे ही दिन की समाप्ति होती है अकबर भी इनकी यह हरकत बातों को सुनकर के वह भी मार्केट में अकबर से मिलने जाते हैं। और फिर भी बीरबल से पूछते हैं कि बीरबल” तुम यहां क्या कर रहे हो।

बीरबल चुपचाप अपने काम में इतना व्यस्त थे, कि राजा अकबर की बातों को ध्यान ही नहीं दिए और पूरी तरह से खाट की बुनाई में लगे रहे।

अगले दिन, बीरबल अंधों की एक बड़ी सी सूची अकबर को देते हैं। और उसमें स्वयं राजा अकबर का भी नाम था। फिर अकबर ने थोड़ा हर बढ़ाते हुए बीरबल से पूछा कि इसमें “”मेरा नाम क्यों है।

उसके बाद से बीरबल ने बड़ी है विनम्रता पूर्वक जवाब दिया बादशाह जी”आपके साथ साथ और बाकी लोग भी बाजार में खाट बूंदे समय”” मुझसे यह पूछ रहे थे कि बीरबल जी आप क्या कर रहे हो।

फिर बीरबल नहीं कहा मैं तो भरी बाजार में सबके बीच अपनी खाट को ढूंढ रहा था ,,फिर भी लोग बार-बार मुझसे यह पूछ रहे थे कि आप क्या कर रहे हैं। जैसे हमें लगा कि इन लोगों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा है यह लोग पूरी तरह से अंधे हैं इसलिए अंधों के लिस्ट में उनका भी नाम आया है।

अकबर, बीरबल की इस बात को समझ जाते है कि, दृष्टिहीन लोगों की तुलना में अधिक लोग अंधे हैं।

शिक्षा –

इस Akbar Birbal Stories से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आसपास क्या हो रहा है इसके प्रति वह अंधे हो सकते हैं। इस बात से स्पष्ट हो रही है कि जब आपको दिखाई दे रहा है कि क्या हो रहा है तब आपको ज्यादा पूछने की क्या जरूरत है।

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Akbar Birbal Storiesi एक कुआं था लेकिन 

एक बार की बात है एक किसान अपने खेत की पानी से सिंचाई करने के लिए एक अमीर आदमी से एक कुआं खरीदता है। और फिर वह अमीर आदमी उस किसान को रोक देता है कि तुमने इस कुआं को खरीदा है उसके अंदर के पानी को नहीं और फिर उसे पानी नहीं लेने देता है।

और जब भी किसान उस अमीर आदमी से पानी लेने की बात करता है तो वह पानी के बदले कुछ ज्यादा पैसे उससे चार्ज करता है नहीं तो पानी मना कर देता है।

किसान इस बात से पूरी तरह परेशान होकर “”बादशाह”” अकबर के दरबार में पहुंचा, और अपनी पूरी कहानी बीरबल को सुना दिया। फिर बीरबल ने उस अमीर आदमी को कहते हैं कि””अब क्योंकि कुआं तो किसान का है और उसमें मौजूद पानी तुम्हारा है।

बीरबल ने उस अमीर आदमी से कहा””या तो तुम इस कुएं से पानी अपने लिए दूर ले जाओ या फिर उस कुएं में पानी रखने के लिए तुम उस कुएं का किराया इस किसान को दो।

बीरबल की इस बात को सुनते हैं अमीर आदमी बहुत ही आश्चर्य हो जाता है और किसान के आगे अपनी हार मान लेता है और फिर पानी और कुवा दोनों उस किसान को दे देता है और माफी मांग लेता है।

शिक्षा –

इस Akbar Birbal Stories से हमें यह शिक्षा मिलती है कि एक बुद्धिमान और चतुर व्यक्ति किसी भी समस्या का समाधान बहुत ही सरल तरीके से निकाल लेता है।

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