हमारे देश में छोटी कहानी इन हिंदी को बहुत ही महत्व दिया गया है। इस आर्टिकल में जो भी देसी कहानी लिखीं गई है। वह सभी

छोटी कहानी इन हिंदी दादी और दादा या अम्मा के द्वारा जरुर सुने होंगे।

इस देसी कहानी से बच्चों को बहुत ही अच्छी शिक्षा मिलेगी। इस आर्टिकल में जो कहानी इन हिंदी हैं। वह बहुत ही हमारे जीवन से जुड़े हुए कहानियां हैं जिसे बच्चे और बड़े लोग भी पढ़ कर बहुत कुछ सीख सकते हैं।

इस आर्टिकल में सभी कहानी इन हिंदी को हमारी संस्कृति भाषा और साहित्य अकादमी के द्वारा यह सभी देसी कहानी लिखी गई है।

छोटी कहानी इन हिंदी

हाथी और छह आदमी की कहानी {छोटी कहानी इन हिंदी }

यह बात बहुत समय पहले की है। एक बनकटा नामक गांव में 6 अंधे आदमी रहते थे। एक दिन की बात है सभी गांव के लोग ने उन्हें बताया ” भाई साहब” आज हमारे गांव में एक हाथी आया है “उन लोग ने केवल आज तक हाथियों के बारे मे सुना था। लेकीन कभी भी उन्हें यानी हाथी को छूने का मौका नहीं मिला था।

देसी कहानी – 10+ छोटी कहानी इन हिंदी – कहानी इन हिंदी
कहानी इन हिंदी – 10+ छोटी कहानी इन हिंदी – कहानी इन हिंदी

वह सभी 6 आदमियों ने निश्चित किया है हम भले ही इस हाथी को देख नही सकतें हैं। पर आज हम लोग चलकर हाथी को छू कर महसूस तो कर सकते हैं ना ? और फिर वे छह अंधे आदमी उस जगह की तरफ़ चले, जहां पर वह हाथी आई हुई थी।

अब सभी छह अंधे आदमी हाथी के पास पहुंचने के बाद सभी ने उस हाथी को छूना शुरू किया।

” एक ने हाथी को छूते ही कहा” हां जी ” मैं समझ गया हाथी एक खंभे की तरह होता है ”  पहले आदमी ने हाथी के पैर पकड़ते हुए कहा ”

तभी अचानक दूसरे आदमी ने पीछे से पुछ पकड़ते हुए कहा ”  अरे नहीं भाइयों ” तुम गलत बोल रहे हों। हाथी तो सांप के जैसे रस्सी के आकार में होता है।

छोटी कहानी इन हिंदी Part 1 — Click here 

तभी वहा पर तीसरे ने कहा “अरे नहीं भाई तुम लोगों को नहीं पता” हाथी तो पेड़ की तने की तरह होती हैं। और वह तीसरा व्यक्ति अभी हाथी के सूंड को पकड़ा हुआ था।

” तुम लोग यह गलत बात कर रहे हों।” हाथी एक बड़े हाथ के पंखे के समान बडी होती हैं। चौथे आदमी ने हाथी के कान छूते हुए  सभी को समझाया।

“”तभी एक ने कहा ” नहीं – नहीं ये तो एक बड़े दीवार की तरह होती हैं।” पांचवे व्याक्ति ने हाथी के पेट पर हाथ रखते हुए कहा:

” लेकीन ऐसा नहीं है ” हाथी तो बहुत ही कठोर नली की तरह होती हैं। छठे आदमी ने अपनी बात कही ”

अब किसी एक की भी बात आपस में नहीं मिल रही थी। की हाथी कैसे होती हैं। तो सभी आपस में अलग अलग तरह के बताकर बहस करने लगें। और फ़िर छह अंधे आदमी अपने आप को सही साबित करने लगें। अब धीरे – धीरे उनकी बहस तेज हो गई थी। और ऐसा लगने लगा कि मानो वे सभी आपस मे ही लड़ पड़ेंगे।

तभी वहा से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था। वह आवाज दिया “अरे भाई साहब क्या हुआ और आप लोग आपस में क्यो झगड़ा कर रहे हों। क्या तुम लोगों की पत्नी भाग गई है क्या ?

अरे नहीं भाई साहब “ऐसा नहीं है। बस हम लोग यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिरकार हाथी होती कैसे हैं। और वह दिखाता कैसे हैं। उन्होने उत्तर दिया।

और फिर सभी अंधे आदमियों ने बारी – बारी से अपनी – अपनी बात उस व्याक्ति को बताएं। वह बुद्धिमान व्यक्ति सभी आदमियों के सभी की बात बहुत ही शांत भाव से सुना और वह फिर बोले ,,,, तुम सभी लोग इस हाथी के बारे मे अपनी–  अपनी सही हों। तुम लोगों के बातों में अंतर इसलिए हैं। क्युकी तुम लोगों ने हाथी के अलग अलग भाग को छुए हुए हों।

इसलिए यह देखा जाए तो तुमलोगो ने जो कुछ भी बताया। वह सभी बातें हाथी के वर्णन के लिए सही साबित होगा

सभी ने बड़े ही आश्चर्य में कहा: ऐसा हैं क्या ” सभी ने एक साथ साथ जबाव दिया। उसके बाद उनलोगो में कोई भी बहस नहीं हुआ। और सभी खुश हो गए की वे सही बोल रहे थे।

शिक्षा:– {छोटी कहानी इन हिंदी}

इस छोटी कहानी इन हिंदी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कई बार ऐसा होता है कि अपनी – अपनी बात को सही साबित करने के लिए। अपनी – अपनी बात को लेकर अड़ जाते है। की मेरी ही बात सही है। और बाकी सब गलत या झूठ बोल रहे हैं।

लेकीन संभव बात यह है कि अगर हमें सिक्के का एक ही पहलू दिख रहा हो। लेकीन इसके अलावा भी कोई दूसरा तथ्य हों जो सही हों। इसलिए हमें अपनी बात को रखनी चाहिए । लेकीन दूसरो के बात को भी सब्र के साथ सुनना चाहिए।

लेकीन कभी भी आपस मे बेकार की बहस नहीं करना चाहिए। हमारे वेद पुराणों में कहा गया है कि एक सत्य को कई प्रकार से बताया जा सकता हैं।तो, अगली बार आप लोग ऐसी किसी बहस में पड़े तो याद कर लीजिएगा। की कहीं ऐसा तो नहीं, की आपके हाथ में केवल पूंछ हैं ” और बाकी हिस्से किसी और के साथ हों।

छोटी कहानी इन हिंदी

बंदर की शिक्षा  {छोटी कहानी इन हिंदी }

यह हम सब को पता है कि बंदर की टोली में उनका एक अपना अलग ही सरदार होता है। और एक दिन की बात है बंदरों का सरदार अपने बच्चों के साथ एक बड़े से पीपल के पेड़ पर बैठा हुआ था।

तभी अचानक बंदर का बच्चा बोला ” अम्मा मुझे भुख लगी है”क्या आप हमें खाने के लिए पेड़ की कुछ पतियों को दे सकते हैं।

बन्दर की शिक्षा देसी कहानी
बन्दर की शिक्षा छोटी कहानी इन हिंदी

तभी बंदर ने मुस्कुराते हुए बोला की “”हां मैं तुम्हें दे तो सकता हूं। लेकीन अच्छा होगा कि तुम खुद अपने लिए ही पतियों को तोड़ लो !

तभी बंदर का बच्चा बोला ” जी मुझे तो अभी अच्छी पतियों की पहचान नहीं है। और वह बंदर का बच्चा यह बोलते हुए उदास हो गया।

तुम्हारे पास एक रास्ता है “यह जवाब बंदर ने कहा दिया ” तुम बड़े ही ध्यान से इस पेड़ को देखो ! अगर तुम चाहो तो निचे की डालियों से पुरानी – कड़ी पतियों को चुन सकते हो ? या फिर ऊपर की पतली डालियों पर उगी – ताजी – नरम पतियों को तोड़कर तुम खा सकती हों।

बंदर का बच्चा कड़ी पतियों को छूते हुए कहा कि यह पति तो अच्छी नहीं है। भला ये अच्छी – अच्छी पत्तियां नीचे क्यो नही उग सकती हैं ? ताकि सभी लोग आसानी से उसे खा सकें।

छोटी कहानी इन हिंदीPart 2 — Click Here

बन्दर ने बड़े ही प्यार से मुस्कुराते हुए जवाब दिया: – यहीं तो बात है। अगर वे सबके पहुंच में होती तो उनकी उपलब्धियां हासिल कहा हो पाती “” उनके बढ़ने से पहले ही उन्हें तोड़कर खा लिया जाता  ! ,,, यह बात बड़ी ही प्यार से बन्दर ने समझाया।

बन्दर का बच्चा ने कहा ” लेकीन इन पेड़ की पतली टहनियों पर चढ़ना तो बहुत ही खरनाक साबित हो सकता हैं। वह डाल तो टूट भी सकती हैं। या फिर मेरे पांव तो फिसल भी सकते हैं।”” फिर मैं पेड़ से नीचे गिर कर घायल भी तो हों सकता हूं। यही सभी बातें बच्चे ने उस बन्दर से चिंताएं जताई।

बंदर बोला;” सुनो मेरी बच्चे ” तुम एक बात हमेशा याद रखना:” हम अपने दिमाग में जो खतरे की तस्वीर बनाते हैं। अक्सर खतरा उससे कहीं कम ही होता है।

लेकीन ऐसा हैं तो हर एक बन्दर उस ऊंची पतली डालियों से नया और ताजा पत्तियां क्यो नही खाता :” इसका उत्तर बन्दर के बच्चे ने पुछा ?

यह सवाल बहुत अच्छा था।अब इस बात को लेकर बन्दर थोडी देर के लिए रुक गया। और फ़िर सोचकर बोला – क्युकी ज्यादातर बन्दर को तुम्हारे ही जैसे डर लगता हैं। और ज्यादातर बंदरों को डर कर जीने का आदत पड़ गया होता है।

वे बंदर सड़ी – गली पतियों को खाकर उसकी शिकायत करना पसन्द करते हैं। और वे जल्दी जल्दी अपनी जगह से दूसरे जगह जाने के लिए कहते हैं। लेकीन कभी भी वे खतरा उठाकर कभी भी अच्छी–  खासी पत्तियों को पाने की कोशिश नहीं करते हैं। जो वे लोग सचमुच पाना चाहते हैं।

बन्दर ने समझाते हुए कहा कि,, लेकीन तुम ऐसा कभी भी मत करना, ये हरा जंगल तमाम  संभावनाओं से भरा पड़ा है। तुम अपने डर को भगाओ, और फ़िर तुम जाओ ऐसा जिंदगी जिओ जो तुम सचमुच जीना चाहते हों।

अब बन्दर का बच्चा यह समझ चूका था कि उसे अब क्या करना है। उसने तुंरत अपनी ही डर को वहीं पर छोड़ दिया। और फिर उस पेड़ की सबसे ऊंची डालियों पर जाकर बहुत ही नरम और ताजी पत्तियों को खाया जो आज तक नहीं खाया था। और वह अपनी भुख को मिटाया।

शिक्षा –: {छोटी कहानी इन हिंदी}

इस छोटी कहानी इन हिंदी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हम अपनी जिंदगी में अंदर झाके तो हमें भी खुद पता चल जाएगा ? हम कैसी पत्तियां खा रहे हैं।(मतलब कैसी जिंदगी जी रहे हैं) सड़ी गली या फिर नई और ताजी पत्तियों…….. हमें भी खुद इस बात को समझना होगा कि हम अपने दिमाग में जो खतरे की जो तस्वीर बनाते हैं। अक्सर हमें खतरा उससे कहीं कम ही होता है।

आप ही खुद सोचिए कि अगर खतरे को बहुत बड़ा बना दिया जाए। और उससे डर कर बैठे रहना कहा कि समझदारी है। अगर आपके जिंदगी में भी कोई सपने हैं,, कोई ऐसा काम है जिसे आप करना चाहते हैं। तो उसे किसी भी हाल में ज़रूर पुरा कीजिए। आपकी हिम्मत ही आपको मनचाही जिंदगी दे सकता हैं। अगर आप डर कर बैठ गए तो जिंदगी में कभी भी कोई सपने पुरा नही कर सकते हैं।

छोटी कहानी इन हिंदी कहानी

हेडमास्टर की शिक्षा { छोटी कहानी इन हिंदी}

एक समय की बात है कि एक दिन हेडमास्टर जी बहुत ही दिनों के बाद आज शाम को घर लौटते समय अपने दोस्त से मिलने उसकी दूकान पर पहुंचे।

इतने दिनों बाद मिल रहे दोस्तों का उत्साह देखने लायक था। दोनों ने एक दूसरे को बहुत ही प्यार से गले लगाया। और फ़िर वही पर बैठ कर गप्पे मारने लगें।

सच्ची मित्रता की देसी कहानी
सच्ची मित्रता की छोटी कहानी इन हिंदी

चाय और नाश्ता करने के कुछ समय बाद हेडमास्टर बोला :”यार तुम एक बात बताओ ? पहले जब भी मैं तुम्हारे दूकान पर आता था। तो हमेशा अच्छा खासा भीड़ लगी रहती थीं। और बड़ी ही मुश्किल से तुमसे बात कर पाते थे। लेकीन आज केवल इक्का दुक्का ही ग्राहक दिखाई दे रहे हैं। और तुम्हारे दूकान पर पहले से कम ही कम हो गए हैं।

मित्र ने इस बात को मजा किए लहजे में कहा: “अरे यार कुछ नहीं” , अरे हम इस मार्केट के पुराने खिलाड़ी हैं। आज धंधा थोड़ा कम है । लेकीन कल फिर जोर पकड़ लेता है।

इस बात पर हेडमास्टर साहब कुछ गंभीर होते हुए कहा ” देख भाई तुम इस सब चीजों को इतना हल्के में मत ले। मैं अब देख रहा हूं कि अब इसी 🛣️ रोड पर कपड़े की तीन – चार और दुकानें खुल गई है। अब कंप्टीशन बहुत बढ़ गया है। और अब ऊपर से……।

छोटी कहानी इन हिंदी Part 3 — Click Here

हेडमास्टर साहब अपनी बात पूरी करते उससे पहले ही दोस्त उनकी बातों को काटते हुए कहा “अरे यार ये दूकान  जाते रहते हैं। इनसे कुछ फरक नहीं पड़ता था।

हेडमास्टर साहब कॉलेज समय से ही वह अपने दोस्त को जानते थे। और वे समझ गए कि ऐसे समझाने पर वह उनकी बात को नहीं समझेगा।

इसके बाद से हेड मास्टर साहब अगले रविवार को बंदी के दिन अपने दोस्तों को चाय पर बुलाया। उनका दोस्त उनके द्वारा दिए हुए टाइम पर पहुंच गया।

अब कुछ गपशप के बाद हेड मास्टर साहब अपने घर में बनी हुई प्राइवेट लैब में अपने दोस्त को ले गए और बोले ” देख यार”आज मैं तुमको बहुत ही इंटरेस्टिंग एक्सपेरिमेंट करके दिखाता हूं।

छोटी कहानी इन हिंदी जरुर पढें –  क्लीक करें 

हेड मास्टर साहब ने जार में एक गर्म पानी लिया ? और उसमें एक मेंढक को डाल दिया। और पानी के संपर्क में आते ही वह मेंढक खतरा को भाप लिया। और तुरंत उसमें से कूदकर के बाहर भाग गया।

इसके बाद से हेड मास्टर साहब ने उस जार में से गर्म पानी को फेंक करके उसमें ठंडा पानी डाल दिया। और एक बार फिर उसमें मेंढक को डाल दिया। और इस बार मेंढक उसमें से आराम से तैरने लगा।

तभी हेड मास्टर ने एक अजीब सा काम किया। उन्होंने उस जार को लेकर के गैस के चूल्हे पर रख दिया। और बड़ी ही धीमी आज में उस पानी को गर्म करने लगे।

अब कुछ ही देर में पानी गर्म होने लगा। और मेंढक को यह बात कुछ अजीब लगी। लेकिन मेंढक ने इस तापमान के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लिया। लेकिन इस बीच बर्नर और जलता रहा और पानी और भी ज्यादा गर्म होने लगा। लेकिन हर बार मेंढक पानी के हिसाब से अपने टेंपरेचर को मेंटेनेंस कर लेता था। और फिर आराम से उसी में पड़ा रहता था

लेकिन मेंढक की भी सहने की क्षमता थी। जब पानी काफी गर्म हो गया और खोलने को आया ।तो तब मेंढक को अपनी जान पर आने वाले खतरे का अहसास हुआ। उसने अपनी पूरी ताकत के साथ जार से छलांग लगाने की कोशिश किया। लेकिन बार-बार बदलते तापमान में खुद को डालने से उसकी पूरी एनर्जी खत्म हो चुकी थी।

और मेंढक अपने आप को बचाने के लिए उसके पास पर्याप्त शक्ति भी नहीं था और समय भी नहीं था। और देखते ही देखते पानी उबालने लगा और मेंढक की मौत हो गई उसी में उसकी जान चली गई।

More छोटी कहानी इन हिंदी पार्ट 4 — click here 

यार तुमने तो मेंढक की जान ही ले लिया…… खैर छोड़ जाने दे तुम बताओ यह मुझे तुम यह सब क्यों दिखा रहे हो?

हेड मास्टर ने कहा” मेंढक की जान मैंने नहीं लिया है उसने खुद अपना जान लिया है। अगर वह बिगड़ते हुए माहौल में खुद को बार-बार एडजेस्ट नहीं करता। अगर वह उससे बचने का कुछ उपाय सोचता तो वह आसानी से अपनी जान बचा सकता था। और यह सब मैं तुझे इसलिए दिखा रहा हूं कि कहीं ना कहीं तुम भी इस मेंढक की तरह ही अभी विहेव कर रहे हो।

तेरा अच्छा – खासा बिजनेस है पर तू चेंज हो रहे मार्केट के  ऊपर ध्यान नहीं दे रहे हो। अब मार्केट की कंडीशन बदल रही है। और तुम बस यह सोच कर एडजस्ट करते जा रहे हों। की आगे सब अपने आप सही हो जायेगा।

पर इस बात को याद ज़रूर रखना तू आज ही हो रहे बदलाव के अनुसार अगर खुद को समय रहते नहीं बदलोगे। तो हो सकता हैं कि इस मेंढ़क की तरह कल को संभलने के लिए तेरे पास न तो एनर्जी {पैसा} रहेगा और न ही समय रहेगा।

हेडमास्टर की सीख ने दोस्त की आखें खोल दिया। उसने हेडमास्टर को गले लगा लिया। और वादा किया कि एक बार फिर वह मार्केट का लीडर ज़रूर बनकर दिखाएगा।

शिक्षा:– छोटी कहानी इन हिंदी

इस छोटी कहानी इन हिंदी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि ”  दोस्तो,, हेडमास्टर साहब के उस दोस्त की तरह बहुत से लोग अपने आस – पास हो रहे बदलाव की तरफ़ ध्यान नहीं देते हैं। लोग जिन skills के कारण जॉब को चुनते हैं। बस अपने आप को उसी पर अटके रहते हैं। वे लोग खुद को कभी बदलते नहीं है। और जब कंपनी में बदलाव होता है तो सबसे पहले उन्हीं लोगों को निकाला जाता है।

पार्ट 4 छोटी कहानी इन हिंदी के लिए क्लिक करें 

लोकगीत ढांचे पर 10 साल पहले बिजनेस कर रहे होते हैं। बस उसी को पकड़ कर के बैठे रहते हैं। और देखते ही देखते कोई नया दुकानदार पूरा मार्केट में कब्जा कर लेता है और अपनी सेलिंग बढ़ा देता है।

यदि आप भी खुद को ऐसे लोगों से संबंधित कर पा रहे हैं । तो तो अपने आप को बदल ही है और इस कहानी से सीख लेते हुए। आपके आसपास हो रहे बदलाव को ध्यान में रखते हुए आप भी अपने आपको बदलाव कीजिए ताकि कोई भी बड़ी से बड़ी आधी आप की जड़ों को भी नहीं हिला पाए।

छोटी कहानी इन हिंदी

किसान और पास की पहाड़ छोटी कहानी इन हिंदी

बहुत समय पहले की बात है सोनपुर नामक गांव में मनोहर नाम का एक किसान रहता था। और उसके पास एक बड़े खेत की प्लॉट थी। वह उसी खेत में खेती किया करता था। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह थी कि उस खेत के बीच में एक बड़ा सा हिस्सा धरती के अंदर से निकला हुआ था।

जिस पत्थर से वह कई बार ठोकर खाकर घायल भी हुआ था। और बहुत ही बार उससे टकराने से उसके औजार भी टूट गया था। वह किसान रोजाना की तरह आज भी वह सुबह – सुबह खेती करने के लिए पहुंचा। पर जो सालों से होता आ रहा था उस दिन भी वहीं घटित हुआ। और इस बार भी उस किसान के हल पत्थर से टकराकर पूरी तरह खराब हो चुकी था।

किसान और खेत में पहाड़ {देसी कहानी)
किसान और खेत में पहाड़ छोटी कहानी इन हिंदी)

वह तुरन्त अपने गांव को गया और वह ग्यारह लोगों को अपने साथ लेकर खेत पहुंचा। किसान ने सभी से अनुरोध किया:– ये देखो जमीन से निकले ये पत्थर हमारे हल को बहुत नुकसान कर दिया है और यह पहली बार नहीं है यह घटना पहले भी हुआ है।

वह किसान बहुत ही ज्यादा क्रोधित हो गया था। और उसने अपने मन में सोच रहा था। की आज कुछ भी हो जाए। हम इस पहाड़ को खेत से बाहर निकाल कर फेक देंगे।

और फिर वह इस बात को कहते हुए ही एक फावड़ा से उस पहाड़ के नीचे चारों तरफ खोदने लगा। लेकिन कुछ ऐसा हुआ जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे उसी मे पहाड़ दबा हुआ है।अभी उसने उसे निकालने के लिए एक से दो बार ही मारा था। की पुरा का पुरा पत्थर बाहर निकल आया। उसके साथ में खडे लोग भी बहुत ही अचरज में पड़ गए।

छोटी कहानी इन हिंदी Part 4 — Click Here

तब उन्हीं में से एक हंसते हुए कहा :”क्यूं भाई साहब ” आप तो कहते थे। की मेरे खेत में एक बहुत ही बड़ी सी पत्थर दबी हुई है। लेकिन यह तो उसकी अपेक्षा बहुत ही छोटा पहाड़ पहाड़ हैं।

अब किसान सर मिन्दगी महसूस कर रहा था। जिसे वह धरती के अंदर बहुत ही बड़ा चट्टान समझता था। और वह एक बस छोटा सा टुकड़ा ही है। अब उसने पछतावा करने लगा कि काश मैं पहले ही इसे निकालने का प्रयास किया होता। मुझे बहुत सारे चोट नहीं लगाते। और आज तक मेरे जो भी नुकसान हुआ है वह नहीं हुआ होता। और फिर ना ही अपने दोस्तों के साथ मुझे इस तरह मजाक के पात्र बनना पड़ता।

शिक्षा :”– छोटी कहानी इन हिंदी

इस छोटी कहानी इन हिंदी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हमें कोई भी कठिनाई हो तो सबसे पहले उसे खत्म करने का प्रयास करना चाहिए जब अपने से नहीं होता है तब किसी का सहायता लेना चाहिए नहीं तो आगे चलकर के वह भी व्यक्ति आपको बोलेगा कि मैं आपकी उस दिन सहायता की थी इस दिन आप भी मेरी सहायता कीजिए। और बिना समय क्या बाते हो गई हमें उन चट्टान जैसे समस्याओं से लड़ना चाहिए ।

Desi Kahani (छोटी कहानी इन हिंदी)

छोटी कहानी इन हिंदी के लिए क्लीक करें j

क्या पता कि वह चट्टान ना होकर के एक छोटे j पत्थर के समान समस्या हो और हम उसको चट्टान बनाए बैठे हो इसलिए किसी भी समस्या को वह छोटा हो या बड़ा कोशिश जरूर करनी चाहिए।

छोटी कहानी इन हिंदी बच्चों के लिए

विश्व गुरु। { छोटी कहानी इन हिंदी }

इस छोटी कहानी इन हिंदी में हमें यह जानने को मिलेगा कि भारत एक ऐसा देश है जहां पर सबसे ज्यादा अपने शिक्षक को आदर किया जाता है। महाभारत के पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य गुरुओं के गुरु भी थे। और उन्हें धनुर्विद्या की ज्ञान बहुत ही अच्छी तरह से प्रदान किया करते थे।

एक समय की बात है एकलव्य नामक लड़का जो कि शुद्र परिवार से आता था। एकलव्य गुरु द्रोणाचार्य के पास गया और उनसे शिक्षा प्राप्ति के लिए अनुरोध करने लगा। उसने कहा कि गुरुदेव मुझे भी धनुर्विद्या की शिक्षा आपसे प्राप्त करनी है।

एकलव्य और गुरू द्रोणाचार्य की देसी कहानी
एकलव्य और गुरू द्रोणाचार्य की छोटी कहानी इन हिंदी

लेकिन द्रोणाचार्य ने एकलव्य को अपनी व्यस्तता बताइए और कहा “: आप किसी और गुरु से शिक्षा प्राप्त कर लो। इस बात को सुनकर के एकलव्य वहां से चला गया।

एक समय की बात है अर्जुन और उनके शिष्य जंगल में गए हुए थे। और उनके साथ एक कुत्ता भी गया हुआ था। वे लोग शिकार के लिए जंगल में कुछ अंदर ही चले गए। लेकिन अचानक वह कुत्ता जाकर के एक जगह बहुत ही ज्यादा भौंकने लगा।

वह काफी देर तक वैसे ही भोक्ता रहा लेकिन अचानक से भोकना ही बंद कर दिया। अभिया देख कर के गुरुदेव और अर्जुन को बहुत ही अजीब लगा। अबे लोग उस स्थान की तरफ बढ़ चले जहां से वह कुत्ते की भौंकने की आवाज आ रही थी लेकिन बंद हो गई थी।

छोटी कहानी इन हिंदी Part 5 — Click Here

वहां पर भी लोग जा कर के देखे तो आश्चर्य में पड़ गए। किसी ने उस कुत्ता को बिना किसी चोट पहुंचाए l मुंह में तीर को भर दिया था। और वह कितना भी कोशिश करने के बाद भी भौंक नहीं सकता था। इसे देखकर देख के द्रोणाचार्य चकित रह गए कि यह कौन सा यह लड़का है ।

शिक्षाप्रद छोटी कहानी इन हिंदी क्लिक करें 

जो इतना शिक्षित और कुशल धनुर्धारी है। और इतनी अच्छी शिक्षा मैं अपने सबसे प्रिय शिष्य अर्जुन को भी शिक्षा नहीं दिया हूं। और ना ही ऐसे भेदने वाले ज्ञान मेरे अलावा नहीं यहां पर कोई जानता है। तो यहl अविश्वसनीय घटना कैसे घटी गई।

तभी वहां पर उन लोगों के सामने एकलव्य अपने हाथ में तीर और कमान लिए खड़ा हुआ मिला। यह देख कर के गुरु द्रोणाचार्य और भी चौक गए।

फिर द्रोणाचार्य ने बड़े ही प्यार से पूछा  “बेटा ” तुमने यह सब कैसे किया।

एकलव्य ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया ” गुरुदेव आप की मूर्ति बनाकर के मैं उसके सामने नित्य प्रतिदिन बहुत ही कड़ी अभ्यास करता हूं । जिसके फलस्वरूप या शिक्षा हमें प्रदान हुई है। और हम उसी कड़ी परिश्रम के कारण आज इस कुत्ते को भोकना बंद किए और एक बहुत ही सुंदर और बहुत ही विश्व के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अंदर बनने के रास्ते पर हूं।

फिर द्रोणाचार्य ने हंसते हुए जवाब दिया कि तुम धन्य हो एकलव्य तुम्हारी कड़ी परिश्रम ने तुम्हें इतनी बड़ी धनुर्विद्या प्रदान किया। और आज मैं समझ गया कि बार-बार अभ्यास ही सबसे बड़ी गुरुदेव के द्वारा दी गई शिक्षा होती है अगर आप अपनी शिक्षा को बार-बार अभ्यास करेंगे तो अपने जीवन के वह कोई भी कठिनाई हो उसे आप जरूर पार पा सकते हैं।

शिक्षा : — {छोटी कहानी इन हिंदी}

इस छोटी कहानी इन हिंदी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि अगर आप किसी भी काम को चाहे वह कितना भी मुश्किल क्यों ना हो आप पूरी परिश्रम के साथ बार – बार अभ्यास करेंगे तो वह शिक्षा आपको जरूर प्राप्त हो जाएगी और उस परीक्षा में आप जरूर ही उत्तीर्ण हो जाएंगे जिस प्रकार एकलव्य ने मूर्ति के सामने गुरु का आभास करते हुए बहुत ही कड़ी परीक्षा पास करके धनुर्विद्या की शिक्षा प्राप्त किया।

रोचक छोटी कहानी इन हिंदी

छोटी कहानी इन हिंदी

हाथी का विश्वास { छोटी कहानी इन हिंदी }

एक समय की बात है। रामपुर में गोपाल नाम का एक आदमी ने एक हाथी का बच्चा अपने घर पालने के लिए लाया था। वह हाथी के बच्चे को बहुत ही प्यार से नहीं लाता था खिलाता था।

वह हाथी का बच्चा धीरे-धीरे गोपाल को ही अपना मालिक समझने लगा था। और गोपाल के द्वारा कही हुई बातें अब धीरे-धीरे वह मानने लगा था। लेकिन वह हाथी का बच्चा बहुत ही नटखट था।

देसी कहानी – 10+ छोटी कहानी इन हिंदी – कहानी इन हिंदी
कहानी इन हिंदी – 10+ छोटी कहानी इन हिंदी – कहानी इन हिंदी

अभी एक दिन हाथी का बच्चा बहुत इधर-उधर भागने लगा। इससे परेशान होकर के गोपाल ने उस हाथी के बच्चे को एक छोटे से सीकर बांधे हुए उसके पैर में लगा दिया। अब हाथी का बच्चा बहुत ज्यादा कोशिश करने लगा कि मैं यहां से निकलो लेकिन वह आज सीकर उससे टूट नहीं रही थी।

छोटी कहानी इन हिंदी

समय बीतता गया और वह हाथी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी लेकिन गोपाल उसी खुशी में सीकरी में उस हाथी को बांधा था और वह हाथी आज बड़ी भी हो चुकी थी।

और वह बाहर घूमने का उसे मन करता था लेकिन उसे विश्वास हो गया था कि या सिकर मेरे से नहीं टूटेगा। बड़े होने के बाद से उसके पास ताकत बहुत ज्यादा हो गए थे लेकिन फिर भी वह उसके विश्वास में एक समा गया था कि इस सिकर को हम नहीं तोड़ पाएंगे।

छोटी कहानी इन हिंदीPart 6 — Click Here

वहीं खड़ी हाथी आराम से तोड़ सकती थी। लेकिन छोटी उम्र में हुआ तोड़ने का प्रयास किया और उस समय वह नहीं टूटा इसलिए आज तक इस उम्र तक हुआ हाथी उसी सीकर में बांधी जाती थी ।और उसे लगता था कि अब मैं यहां से नहीं जाऊंगा।

शिक्षा :–छोटी कहानी इन हिंदी 

इस छोटी कहानी इन हिंदी  से हमें यह शिक्षा मिलती है कि समय के साथ अपने प्रयास को हमेशा जारी रखना चाहिए जो काम आप छोटे वक्त पर नहीं कर पाए तो ऐसा नहीं कि वह काम नहीं होता है समय आने पर हमें बार-बार प्रयास करते रहना चाहिए तभी हम एक दिन जरूर सफल होते हैं।

प्रेरणादायक छोटी कहानी इन हिंदी

कोयला का टुकड़ा { छोटी कहानी इन हिंदी

बहुत समय पहले की बात है। मोहित एक मध्य वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता था। मोहित बचपन बचपन से ही बहुत ही ज्यादा आज्ञाकारी और मेहनती छात्र था। लेकिन जिस समय से उसने कॉलेज में दाखिल लिया था। तो आप उसका व्यवहार पूरी तरह से बदलने लगा था।

मोहिता पहले के जैसे मेहनत भी नहीं करता था और अपने माता-पिता से उतना बात भी नहीं करता था। यहां तक कि वे अब अपने घर वालों से झूठ बोलकर भी पैसे लेने लगा था। इसका बदला हुआ आचरण सभी के लिए चिंता का विषय बन गया था।

कोयले का टुकड़ा {देसी कहानी}
कोयले का टुकड़ा कहानी इन हिंदी}

जब इसकी बारे में जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि मोहिता बुरी संगत में पड़ चुका है। कॉलेज में उसके कुछ ऐसे दोस्त बन गए हैं ,जो फिजूलखर्ची करने सिनेमा देखने और धूम्रपान करने के आदी हो गए थे।

इस बात का पता चलते ही मोहित को ऐसी संगति छोड़ने और पढ़ाई पर ध्यान लगाने की बात कही गई। पर मोहित वही सब बातों पर कोई असर नहीं पड़ता था। मोहित का बस एक ही जवाब आता था। कि मुझे अच्छे बुरे का समझ है। मैं भले ही ऐसे लड़कों के साथ रहता हूं ।पर उनके बुरे संगति का असर मुझ पर नहीं है।

मोहित के दिन धीरे-धीरे ऐसे ही बीतते गए और परीक्षा के दिन भी नजदीक आ गए। मोहित परीक्षा से पहले कुछ मेहनत किया पर वह उसके लिए पर्याप्त नहीं था। और वह एक विषय में फेल हो गया।

Most Readable छोटी कहानी इन हिंदी Part 1 — click here 

हमेशा अच्छे नंबरों से पास होने वाले अमित के लिए। यह बात किसी जोरदार झटके से कम नहीं था। अब मोहित बिल्कुल सा टूट गया था। अब वह घर से भी नहीं निकलता था और किसी से ज्यादा बात भी नहीं करता था। अब वह बस दिन भर अपने कमरे में पड़े कुछ सोचता रहता था।

मोहित की इस स्थिति को देख करके उसके परिवार के सभी लोग और ज्यादा चिंतित हो गए। और सभी लोग उसे अपना पिछला रिजल्ट भूल कर के आगे अच्छी मेहनत करने की सलाह दिया। और ऐसा लग रहा था कि मानो मोहित को सांप सूंघ गया हो। वह फेल होने के दु:ख से उभर नहीं पा रहा था।

जब इस बात की जानकारी मोहित के पिछले स्कूल के प्रिंसिपल को हुआ। तो उन्हें इस बात का यकीन नहीं हुआ। मोहित उनके स्कूल के प्रिय छात्रों में से एक था। और उसकी स्थिति जान उन्हें बहुत ही दु:ख हुआ। फिर  प्रिंसिपल ने निश्चय किया कि मैं मोहित को इस कठिनाई समय में जरूर बाहर निकाल लूंगा।

इसी प्रयोजन से उन्होंने मोहित को अपने घर बुलाया। प्रिंसिपल साहब बाहर बैठे अपने हाथ को थोड़ा ताप दे रहे थे। और मोहिता आ करके उनके साइड में बैठ गया। अभी मोहित बिल्कुल चुप बैठा था। और उसके प्रिंसिपल साहब भी कुछ नहीं बोल रहे थे। 10-15 मिनट ऐसे ही बीत गया। एक दूसरे से किसी ने कुछ भी नहीं कहा।

फिर अचानक प्रिंसिपल साहब उठे और कोयले के एक धधकते के टुकड़े को निकाल कर के उसको मिट्टी पर डाल दिया। वह कोयले का टुकड़ा कुछ देर तक तो बहुत ही गर्मी देते रहा। और अंत में हुआ ठंडा होकर के बुझ गया।

यदि करके मोहित के मन में कुछ कुछ उत्साह आया और वह बोला :”प्रिंसिपल साहब आप इस कोयले के टुकड़े को मिट्टी पर क्यों डाल दिए। ऐसे तो वह बेकार हो गया। अगर आप उसे अगिठी में रहने देते तो वह अन्य कोयले के टुकड़ों के साथ वह आपको गर्मी देने का काम आता।

तभी प्रिंसिपल साहब ने मुस्कुराते हुए बोला :” बेटा”, कुछ देर अंगीठी से बाहर रहने पर वह कोयला का टुकड़ा अभी बेकार नहीं हुआ है। लो मैं उसे दोबारा अपने अंगूठी में डाल देता हूं। अगर तुम ऐसा कहते हो तो मैं इसे वापस अंगूठी में डाल देता हूं।

वह कोयले का टुकड़ा अंगीठी में जाते हुए फिर से धधक कर जलने लगा। और वह पुनः गर्मी प्रदान करने लगा।

प्रिंसिपल ने मुस्कुराते हुए कहा ” तुम कुछ समझ में आया मोहित अभी तुम उस कोयले के टुकड़े के समान हो। पहले जब तुम स्कूल में अच्छी संगति में थे ।अच्छे से मेहनत करते थे ।अपने माता-पिता का कहना मानते थे बड़ों का आदर करते थे। तो तुम बहुत ही अच्छे नंबरों से पास होते थे।

लेकिन तुमने देखा कि जैसे ही कोयले का दादा का टुकड़ा जमीन पर गया वह बुझ गया वैसे ही तुम जैसे गलत संगत में गए तुम्हारी पढ़ाई पर से पूरी तरह से मन हट गया अपने माता पिता का कहना मानना छोड़ दिए और किसी से तुम बात भी नहीं करते थे।

और उसी गलत संगति के कारण तुम अपने इस परीक्षा में फेल भी हो गए। लेकिन तुमने देखा कि मैं कोयले को जब मीठी से बाहर रखा तो वह बुझ गया था लेकिन वह बेकार नहीं था और जब मैं उसे पुनः अंगीठी में डाला तो पुनः वह धधक कर जलने लगा।

मोहित तुम भी एक बार अच्छी संगति में आकर के और पूरी लगन के साथ मेहनत करके अच्छे से पढ़ाई करने वाले बच्चों की श्रेणी में आ सकते हो । तुम्हें इस बात का याद रखना जरूरी होता है कि ईश्वर सृष्टि में सभी जीवो से हमें सर्वश्रेष्ठ बनाया है। और हमारे अंदर बड़ी से बड़ी हार को भी जीत में बदलने की ताकत होती है। तुम उस शक्ति को पहचानो और उस शक्ति का सही उपयोग करते हुए अपने जीवन को सार्थक बनाओ।

प्रिंसिपल के द्वारा इस बात को सुनते ही मोहित के शरीर में एक अलग ही प्रकार की तरंग दौड़ गई। हम मोहित को समझ आ चुका था और उठा प्रिंसिपल के पर आसपास किया और फिर अपनी भविष्य सुधारने में लग गया।

शिक्षा: ” – {छोटी कहानी इन हिंदी}

इस कहानी इन हिंदी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा अच्छे बच्चों के साथ रहना चाहिए और हमें अपने पढ़ाई के प्रति दृढ़ विश्वास रखनी चाहिए और अपने माता-पिता के साथ साथ सभी लोगों से अच्छे व्यवहार के साथ बातें करनी चाहिए।

विद्यार्थी के लिए प्रेरणादायक कहानी

नेकी( निक्की)और छोटू की छोटी कहानी इन हिंदी

एक समय की बात है। खेलते–  खेलते नेकी की नजर छोटू के पास के पत्थर पर पड़ी। निकी भी अभी बच्ची थी वह उस पत्थर को देखते ही उस पर लाला हित हो गई। निक्की तुरंत छोटू के पास गई और बोली :”छोटू क्या तुम यह सारे पत्थर मुझे दे सकते हो। इसके बदले में तुम्हें यह चॉकलेट का पॉकेट दे दूंगा।

अब चॉकलेट देखते हैं छोटू के मुंह में पानी आ गया…… उसने अपने मन ही मन सोचा “मैं तो इस पत्थर से कई दिनों से खेल ही रहा हूं। मैं इसे देखकर कि नहीं कि से सारे चॉकलेट ले लेता हूं।

निक्की और छोटू की देसी कहानी
निक्की और छोटू की छोटी कहानी इन हिंदी

छोटू ने कहा ” ठीक है नहीं कि मैं तुम्हें अपने सभी पत्थर दे देता हूं। और ऐसा कहते हुए वह दूसरी तरफ मुड़ा और अपने सारी पत्थर उठाने लगा।

छोटू को अपने पसंदीदा पत्थर को देख करके उसको लालच आ गया। और उसने कुछ पत्थर को अपने जेब में छुपा लिया था। और फिर बाकी पत्थर को थैले में रख दिया।

फिर छोटू ने अपने सारे पत्थर पिंकी को दे दिया। फिर छोटू ने कहा कि लाओ  “और मेरे सभी चॉकलेट लाओ। अब नि ने तुरंत चॉकलेट का थैला।

छोटू को दे दिया। और फिर उस मजेदार पत्थरों से पिंकी खेलने लगी। खेलते खेलते हुए शाम हो गया और सभी बच्चे अपने घर को निकल पड़े थे।

Akbar Birbal ki Kahani Part 2 छोटी कहानी इन हिंदी – क्लीक करें

अब रात हो चुकी थी। और रात को बिस्तर पर लेटे हैं छोटू को याद आया।

आज मैंने पत्थर के लालच में पिंकी के साथ चीटिंग किया।

यह बात छोटू के मन में पूरी तरह से घूमने लगा। छोटू खुद अपने आप को समझाने लगा। क्या पता मैंने जिस तरह से कुछ पत्थर को छुपा लिए थे ।निक्की भी उसी तरह से कुछ चॉकलेट को छुपा लिया होगा। और ऐसे ही बहुत ख्यालों को वह सोच-सोच करके परेशान होने लगा। छोटू उस दिन पूरी रात अच्छे से सो नहीं पाया।

इधर पिंकी पत्थर को लेकर के अपने हाथ में कब गहरी नींद में सो गई उसे कुछ पता ही नहीं चला।

अगले दिन दरवाजे की घंटी बजी तो दरवाजा खोला तो देखा कि सामने पिंकी खड़ी है। तभी राजू ने अपनी जेब से बाकी पत्थर निकालते हुए कहा “यह लोनी कि तुम इस पत्थर को भी अपने पास रख लो। और उस पत्थर को देने के बाद से छोटू अपने घर के तरफ भाग गया।

और फिर छोटू को बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा था और उस दिन वह पूरी ही गहरी नींद में सोया और दूसरे दिन काफी वह अपने आपको अच्छा महसूस कर रहा था।

शिक्षा :” {छोटी कहानी इन हिंदी}

इस छोटी कहानी इन हिंदी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अगर हम कोई गलत काम करते हैं तो हमारा दिमाग उससे गलत काम किया है यह सोचने पर मजबूर कर देता है। और उस गलती के कारण हमें बहुत ही अफसोस होता है और हम अगले ही दिन अपनी गलती का सुधार करते हैं तो हमें बहुत ही अच्छा लगता है।

इसलिए इस छोटी कहानी इन हिंदी के माध्यम से यह बताने वाला हूं कि आप कभी भी किसी के साथ गलत मत कीजिए अच्छे व्यवहार के साथ रहिए सभी से अच्छे से बात कीजिए अपने से बड़े आदमी की इज्जत कीजिए और पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने काम को कीजिए तब भी आप इस दुनिया में अच्छे से जीवन जी सकते हैं।

विद्यार्थी के लिए प्रेरणादायक कहानी short

गांव में गुब्बारा वाला आया {छोटी कहानी इन हिंदी}

बहुत समय पहले की बात है रामपुर में एक गोपाल नाम का एक गरीब आदमी रहता था वह अपने जीवन यापन गुब्बारे को बेचकर क करता था। वह गांव के आसपास लगने वाली गांव के घाटों पर मेलों में अपना गुब्बारा बेचता था।

देसी कहानी Part 2 — Click Here
गांव में गुब्बारा वाला आया

वह बच्चों को लुभाने के लिए बहुत ही प्रकार के गुब्बारा  को रखता था। जैसे कि लाल पीले हरे नीले ब्लू और बैगनी और भी बहुत सारी कलर उसके पास मौजूद थे। गोपाल को जब भी लगता था कि मेरी आज बिक्री कम हो रही है। तभी वह झट से अपने एक गुब्बारे को वहां पर हवा में छोड़ देता था।

जिसे देखकर के सभी बच्चे खुश हो जाते थे और तुरंत उसके पास गुब्बारे खरीदने के लिए आ जाते थे। रोज की भांति इसी तरह वह एक दिन गांव की घाट पर गुब्बारे बेच रहा था। और वह अपनी बिक्री को बढ़ाने के लिए बीच-बीच में एक – एक गुब्बारा आकाश में छोड़ दिया करता था। उसके पास ही खड़ा एक छोटा सा बच्चा बहुत ही जिज्ञासा के साथ यह सब देख रहा था।

इस बार जैसे ही वह गुब्बारे वाले ने सफेद गुब्बारे को हवा में उड़ाया। वह तुरंत उसके पास गया और अपनी मासूमियत भरी आवाज में बोला “: अगर आप अपने इस काला वाले गुब्बारे को छोड़ेंगे तो क्या या अभी ऊपर जाएगा ?”

इस छोटी कहानी इन हिंदीको जरुर पढें — क्लीक करें

गुब्बारे वाले ने बहुत ही अचरज के साथ उसे देखा और कहा ” हां बिल्कुल यह अभी आकाश में जाएगा । बेटा “गुब्बारे का ऊपर जाना वह इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि वह दुबारा किस रंग का है। बल्कि उसमें क्या भरा गया है इस बात पर निर्भर करता है।

शिक्षा :”{ छोटी कहानी इन हिंदी}

इस छोटी कहानी इन हिंदी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमारे जीवन में यह बात निर्भर नहीं करती है कि अगर कोई आदमी गोरा होगा तभी वह अच्छे मार्क्स और अच्छे कंपनी में काम करता होगा और अच्छे घर से आता होगा। वह इस बात पर निर्भर करता है कि

आप कितना मेहनत करते हो आप अपने सपनों के पाने के लिए कितनी ज्यादा परिश्रम करते हो इस बात पर निर्भर करती है। और यह सब हमारे अंदर उपस्थित एटीट्यूट ही निर्धारित करता है।

युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी

भैंस की मौत कैसे हुई  {छोटी कहानी इन हिंदी}

एक समय की बात है एक गुरुजी अपने शिष्यों के साथ जा रहे थे। और चलते चलते वह सब एक खेत के पास पहुंचे। वह खेत बहुत ही अच्छी जगह पर था। पर उस खेत की फसल को देख करके लगता था ,कि उसका मालिक उस पर ध्यान नहीं देता था।

आप सभी लोगों को प्यास लगी थी। और वहां पर खेत के बीचो बीच में एक टूटी फूटी हुई घर था। वे लोग वहां पर पहुंचे और दरवाजा को खटखटाया।

भैंस की मौत
भैंस की मौत

तभी अंदर से एक आदमी निकला और उसके साथ उसकी पत्नी और उसके तीन बच्चे भी थे। वे सभी फटे पुराने कपड़े पहने हुए थे।

तभी गुरुजी ने कहा ” श्रीमान ” क्या हमें पानी मिल सकता है हमें बहुत जोर से प्यास लगी है। वह आदमी बोला ”  जरूर जरूर और अंदर से जाकर एक जग पानी ला करके गुरुदेव को दिया।

तब गुरुजी ने कहा ”  कि मैं देख रहा हूं कि आपकी यह एक बहुत बड़ी है लेकिन आपने इस पर कोई भी फसल नहीं बोया है। और ना ही यहां आस-पास कोई फलों की वृक्ष दिखाई दे रहे हैं। तो आप लोगों का गुजारा कैसे चलता है यह बात बड़े ही विनम्र भाव से गुरु जी ने पूछा ”

तब वह आदमी गुरु जी को जवाब देते हुए कहा ”  कि गुरुदेव हमारे पास एक बहुत ही अच्छी भैंस है जो काफी दूध देती है और मैं उसके दूध को गांव में बेच करके जो भी पैसे मिलता है उसी से हम अपनी गुजारा चलाते हैं।

गुरुदेव और उनके शिष्य अब आगे बढ़ने लगे तभी पीछे से वह आदमी ने बोला ” गुरुदेव ” अभी शाम काफी हो गई है और आप लोग चाहे तो हमारे यहां हैं रात को रुक सकते हैं। और फिर वे सभी लोग वहीं पर रुकने का फैसला किया।

Read More छोटी कहानी इन हिंदी — क्लीक करें 

जब आधी रात को सभी गहरी नींद में सो रहे थे तभी गुरुदेव ने अपने शिष्यों को जगाया और कहा” चलो अभी हमें यहां से चलना चाहिए। और यहां से चलने से पहले इस भैंस को भी अपने साथ ले चल कर बहुत ही दूर छोड़ दो । ताकि इस आदमी को यह भैंस नहीं मिल सके।

यह सुनकर के सभी शिष्य को अपने गुरुदेव के इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था। लेकिन वह लोग उनकी बात को मना नहीं कर सकते थे। और वे लोग भैंस को लेकर के रात ही रात गायब हो गए।

यह घटना शीशे के जहन में पूरी तरह से बैठ गई। और करीब जब 10 साल बाद वह एक सफल उद्यमी बन गया। तो उसने सोचा कि क्यों ना अपनी गलती का पश्चात करने के लिए। एक बार फिर उसी आदमी से मिला जाए। और फिर उसकी कुछ आर्थिक मदद भी किया जाएगा।

वह अपनी चमचमाती कार से उस खेत के सामने पहुंचा। यह देख कर के शिष्य को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। उजड़ा हुआ खेत और फलों की बगीचों में पूरी तरह से तब्दील हो चुका था। और टूटे-फूटे घर की जगह एक बहुत ही शानदार बंगला खड़ा था। और जहां पर अकेली भैंस खड़ी रहती थी वहां पर बहुत अच्छी अच्छी नस्ल की गाय थी।

तभी यह शिष्य  ने सोचा ”  कि महेश के मरने के बाद से यह परिवार अपनी जमीन को बेच करके कहीं चला गया होगा। और वापस लौटने के लिए वह अपनी कार को स्टार्ट करने लगा। लेकिन तभी उसे वह 10 साल पहले वाला आदमी दिखा।

उसने कहा ”  कि शायद आप मुझे पहचान नहीं पाए। मैं आप से करीब 10 साल पहले मिला हुआ था। शिव सैनी उस आदमी की तरह बढ़ते हुए यह बोला ;”

छोटी कहानी इन हिंदी 〽️

“नहीं – नहीं ऐसा नहीं मुझे अच्छी तरह से याद है कि आप और आपके गुरु जी हमारे यहां आए थे। और मैं कैसे भूल सकता हूं उस दिन को उस दिन ने तो मेरा जीवन ही बदल कर के रख दिया था। आप लोग तो बिना बताए ही हमारे यहां से चले गए लेकिन पता नहीं उसे दिन हमारी भैंस कहां पर गायब हो गई यह मालूम ही नहीं चला।

मुझे तो कुछ दिन तक कुछ समझ ही नहीं आया कि क्या करूं। लेकिन जीने के लिए मुझे कुछ तो करना था। इसलिए मैं जंगल से लकड़ी काट कर के उसे बेचने लगा । और उससे जो भी पैसे मिले उससे मैंने अपने खेत की बुवाई शुरू कर दिया। और सौभाग्य से उसमें बहुत ही अच्छी फसल लग गई।

उस फसल को बेचने के बाद से मुझे जो पैसे मिले । उसे से मैंने बगीचा लगवा दिया। और मेरा यह काम अच्छा से चल गया और मैं अपने यहां के हजारों गांव के सबसे बड़ा फल व्यापारी बन गया हूं। सचमुच यह सब संभव नहीं होता जब मेरी महसूस रात से गायब नहीं हुआ होती तो।

आज इस शिष्य को गुरु के और उस निर्देश का सही है मतलब समझ में आ चुका था। और वह बिना किसी पश्चात के वहां से वापस लौट रहा था।

शिक्षा:–{ छोटी कहानी इन हिंदी}

दोस्तों हमें इस कहानी इन हिंदी से यह शिक्षा मिलती है कि कई बार हम अपने परिस्थितियों के इतने आदी हो जाते हैं कि बस उसी पर स्थित परिस्थिति में जीना सीख लेते हैं। फिर चाहे वह परिस्थिति कितना बुरा ही क्यों ना हो।

दोस्तों हम लोग अपने-अपने जब से नफरत करते हैं लेकिन फिर भी उसे पकड़े पकड़े हम अपनी पूरी जिंदगी को उस जब को करने में बिता देते हैं। तो कई बार हम लोग इसलिए बिजनेस के बारे में नहीं सोचते हैं।

Read More छोटी कहानी इन हिंदी

क्योंकि हमारा मौजूदा जब हमारे दाल रोटी का खर्चा आराम से निकाल देता है। पर इस तरह करने से हम हमेशा पैसों की समस्या से जूझते रहते हैं। और बहुत से ऐसी वस्तुओं से चूक जाते हैं। जिसे करने की हमारे अंदर क्षमता होती है। और जो हमारी जिंदगी को कहीं और भी बेहतर बना देती है।

सोचे कहीं आपकी भी जिंदगी में कहीं ऐसा भैंस तो नहीं है। जो आपको एक बेहतरीन जिंदगी जीने से रोक रही हो। और कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको लग रहा है कि आपने उस भैंस को बांध करके रखा है । लेकिन असलियत में वह भैंस ने आपको बात करके रखी हुई है।

अगर आपको भी ऐसा लगता है कि यह बात सही है। तो आप अपने जीवन को संवारने के लिए आगे बढ़ जाइए। आप ही मत कीजिए और उस बंधन की रस्सी को काट दीजिए। उस स्थिति में आप को खोने के लिए बहुत ही कम होता है लेकिन पाने के लिए यह पूरी जहान होती है। तो आप लोग ऐसी स्थिति से निकलिए और अपने घर तथा अपनी पूरी परिवार को आगे बढ़ने में मदद कीजिए।

छोटी कहानी इन हिंदीछोटी कहानी इन हिंदीछोटी कहानी इन हिंदीछोटी कहानी इन हिंदीछोटी कहानी इन हिंदीछोटी कहानी इन हिंदीछोटी कहानी इन हिंदी

प्रेरणादायक कहानी जीवन में काम आये

Leave a Reply